असम राइफल्स के जवानों पर घात लगाकर हमला, दो जवान शहीद, चार घायल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगालैंड के मोन जिले में संदिग्ध नगा विद्रोहियों ने 40वीं असम राइफल्स की एक टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें दो जवान शहीद हो गए और चार अन्य जवान घायल हो गए। यह घटना जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर भारत-म्यांमार सीमा के पास अबोई में रविवार दोपहर करीब 3 बजे हुई।
असम राइफल्स के महानिरीक्षक के पीआरओ ने बताया कि भारत-म्यांमार सीमा के पास सुरक्षा बल की टुकड़ी पर छिपकर बैठे सशस्त्र हमलावरों ने उस समय गोली बरसानी शुरू की, जब वे जवान पीने का पानी एकत्र कर रहे थे। हमले में हवलदार फतेह सिंह नेगी और सिपाही हुंगंगा कोनयाक की मौके पर ही मौत हो गई।
48 वर्षीय नेगी उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लाक के बाड़व गांव के रहने वाले थे। विद्रोहियों की ताबड़तोड़ गोलीबारी में चार अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें सैन्य हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट करने के बाद असम के जोरहाट अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जवानों ने जवाबी हमला भी किया, लेकिन दूसरी तरफ हुए नुकसान की जानकारी नहीं है। पीआरओ का कहना है कि अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
दूसरी बार नगालैंड में इस तरह का हमला
नगा विद्रोहियों ने राज्य में दूसरी बार सुरक्षा बलों पर इस तरह का सुनियोजित हमला किया है। इससे पहले मई, 2015 में भी खपलांग गुट ने मोन जिले के ही चांगलांगसू के पास विद्रोहियों ने 23वीं असम राइफल्स की टुकड़ी पर हमला किया था, जिसमें 8 जवान मारे गए थे और 6 घायल हुए थे।
म्यांमार में बेस बनाकर सक्रिय खपलांग गुट ने तीन साल पहले केंद्र सरकार के साथ 15 साल पुराना संघर्ष विराम तोड़कर ये हमला किया था। इस बार भी हमले के पीछे नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (खपलांग) गुट का हाथ माना जा रहा है।
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार और नगा विद्रोहियों के एक अन्य संगठन एनएससीके (इसाक-मुइवा) के बीच वार्ता के फाइनल दौर में लगभग सहमति बन जाने से नाराज होकर ये हमला किया गया है।