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Karnataka High Court: रिव्यू कमेटी के सामने पेश नहीं हुआ ट्विटर, केंद्र ने कोर्ट के सामने रखीं दलीलें
Tue, 07 Mar 2023 01:38 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, बेंगलुरु
पीटीआई, बेंगलुरु
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 07 Mar 2023 01:38 AM IST
सार
ट्विटर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और अशोक हरनहल्ली ने दिसंबर 2022 में दलीलें पेश की थीं। केंद्र के वकीलों द्वारा मांगे गए समय के कारण केंद्र सरकार के लिए बहस में देरी हुई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केंद्र सरकार ने सोमवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय में ट्विटर द्वारा दायर रोक के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका के खिलाफ अपनी दलीलें पेश कीं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आर शंकरनारायणन ने न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की एकल न्यायाधीश वाली पीठ के समक्ष दलीलें रखीं।
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ट्विटर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और अशोक हरनहल्ली ने दिसंबर 2022 में दलीलें पेश की थीं। केंद्र के वकीलों द्वारा मांगे गए समय के कारण केंद्र सरकार के लिए बहस में देरी हुई। एएसजी ने सोमवार को अदालत को सूचित किया कि ट्विटर समीक्षा समिति के समक्ष अवरूद्ध आदेशों को चुनौती देने के लिए पेश नहीं हुआ था, बल्कि उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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केंद्र सरकार ने भारत और यूनाइटेड किंगडम में डिजिटल कानूनों के बीच अंतर का विवरण प्रस्तुत किया। साथ ही अदालत को उन खाताधारकों का ब्योरा भी दिया गया जिनके ट्विटर हैंडल को आपत्तिजनक सामग्री के लिए ब्लॉक कर दिया गया था। ट्विटर को जारी किए गए नोटिसों का प्रारूप भी कोर्ट में जमा किया गया। एएसजी ने अधिक विश्लेषण और विवरण पेश करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।
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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए टेक-डाउन आदेशों के खिलाफ जून 2022 में ट्विटर द्वारा याचिका दायर की गई थी। सोशल मीडिया कंपनी ने दावा किया है कि सरकार को उन ट्विटर हैंडल के मालिकों को नोटिस जारी करने की जरूरत थी, जिनके खिलाफ ब्लॉकिंग के आदेश जारी किए गए हैं। ट्विटर ने कहा था कि उसे खाताधारकों को सरकार के निष्कासन आदेशों के बारे में सूचित करने से रोक दिया गया था।