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जजों की सत्यनिष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, तीन वकील अवमानना के दोषी
Tue, 28 Apr 2020 04:10 AM IST
संजीव कुमार झा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 28 Apr 2020 04:10 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
निसंदेह कोई भी नागरिक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिप्पणी या आलोचना कर सकता है, लेकिन उसे अदालत के जज की क्षमता, योग्यता, ज्ञान, ईमानदारी, निष्ठा और निप्पक्षता की कुछ जानकारी होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस विनीत सरन पर लगाए गए आरोपों को अपमानजनक व शर्मनाक करार देते हुए इंडियन बार एसोसिएशन (आईबीए) के अध्यक्ष निलेश ओझा, इसी एसोसिएशन के महाराष्ट्र व गोवा राज्य अध्यक्ष विजय कुर्ले और मानवाधिकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय सचिव राशिद खान पठान को अवमानना का दोषी करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी निर्णय में लिखी।
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जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध गुप्ता ने 1 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सजा सुनाने की घोषणा भी की। पूर्व में दोनों जजों ने अधिवक्ता मैथ्यूज नेदुम्पारा को अवमानना का दोषी ठहराया था। इसी पर आरोपी वकील कुर्ले ने एसोसिएशन के हवाले से राष्ट्रपति को पत्र लिख इन दोनों जजों को न्यायिक कार्य से हटा उन पर अभियोग चलाने की मांग की थी।
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