{"_id":"692c7f971e7477b5260a35d5","slug":"truce-between-siddaramaiah-shivakumar-lull-before-storm-say-oppn-pol-analysts-2025-11-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnataka Politics: '...तूफान से पहले सन्नाटा', सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की सुलह पर विपक्ष का तंज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Karnataka Politics: '...तूफान से पहले सन्नाटा', सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की सुलह पर विपक्ष का तंज
Sun, 30 Nov 2025 11:02 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 30 Nov 2025 11:02 PM IST
सार
Karnataka Politics: फिलहाल कर्नाटक सरकार में सबकुछ शांत दिख रहा है, लेकिन सियासत के अनुभवी लोग मानते हैं- यह शांति स्थायी नहीं। यह बस वक्त का इंतजार है- जब अगला मौका आएगा, सत्ता की लड़ाई एक बार फिर सामने होगी।
विज्ञापन
सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार
- फोटो : ANI
विस्तार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच कई दिनों से चल रही सत्ता की खींचतान और बयानबाजी के बाद शनिवार को अचानक हुई सुलह ने राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक हलकों का मानना है कि यह मेल-मिलाप स्थायी नहीं, बल्कि आने वाले सियासी तूफान से पहले की शांति है। शनिवार सुबह दोनों नेता सिद्धारमैया के घर पर नाश्ते के दौरान मिले और उसके बाद एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 'एकजुटता' का संदेश दिया। दोनों ने कहा कि वे पार्टी हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे। यह विवाद कथित तौर पर उस समझौते को लेकर था, जिसमें कहा जा रहा था कि नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री बदलकर शिवकुमार को मौका दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें - वंदे मातरम के सहारे बंगाल की राजनीति: BJP-TMC ने बनाई अपनी-अपनी रणनीति, कल संसद सत्र में भी होंगे आमने-सामने
विपक्ष बोला- दिखावा है, असली लड़ाई अभी बाकी
भाजपा नेता प्रकाश सेशराघवाचार ने इस बैठक को 'सिर्फ दिखावा' बताया। उनका कहना है, 'यह समझौता स्थायी नहीं है। जब कोई नेता सत्ता के लिए ज्यादा महत्वाकांक्षी हो जाता है तो उसे कुछ समय के लिए रोका जा सकता है, पर उसकी महत्वाकांक्षा दोबारा सामने आती है।' उन्होंने दावा किया कि शिवकुमार के समर्थक संतों और विधायकों को दिल्ली भेजा गया था, जिससे दबाव बनाया जा सके। जेडीएस के नेता टी.ए. शरवण ने भी इस सुलह को राजनीति का नाटक बताया और कहा कि जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।
विज्ञापन
राजनीतिक विश्लेषकों की राय- समझौता मजबूरी, कड़वाहट बरकरार
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रामकृष्ण उपाध्याय ने कहा कि यह पूरी मुलाकात कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर हुई। 'दोनों नेता असल में टकराव में थे। बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकला। यह बस एक ऊपर-ऊपर की पैच-अप एक्सरसाइज थी।' एक अन्य राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, 'सिद्धारमैया को प्रशासन चलाने के लिए सहयोगी डिप्टी की जरूरत है और शिवकुमार अपनी छवि खराब नहीं करना चाहते। इसलिए समझौता हुआ, लेकिन मतभेद अब भी गहरे हैं।'
यह भी पढ़ें - Parliament session: शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में कांग्रेस, सोनिया गांधी के आवास पर अहम बैठक
कांग्रेस बोली- विवाद मीडिया और विपक्ष की देन
कांग्रेस प्रवक्ता एम. लक्ष्मण ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कोई विवाद था ही नहीं। 'यह विवाद भाजपा, जेडीएस और कुछ मीडिया की देन है। यह भ्रम फैलाया गया कि कांग्रेस बंटी हुई है, ताकि सरकार अस्थिर लगे।' उन्होंने कहा कि अगर मतभेद होते तो दोनों नेता शनिवार को एक साथ मंच पर दिखाई कैसे देते?
क्या आगे भी सब शांत रहेगा?
राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह समझौता फिलहाल सरकार को चलाए रखने की रणनीति है। भविष्य में जब पार्टी में नेतृत्व बदले या चुनाव नजदीक आए, तब यह टकराव फिर सामने आ सकता है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - वंदे मातरम के सहारे बंगाल की राजनीति: BJP-TMC ने बनाई अपनी-अपनी रणनीति, कल संसद सत्र में भी होंगे आमने-सामने
विज्ञापन
विपक्ष बोला- दिखावा है, असली लड़ाई अभी बाकी
भाजपा नेता प्रकाश सेशराघवाचार ने इस बैठक को 'सिर्फ दिखावा' बताया। उनका कहना है, 'यह समझौता स्थायी नहीं है। जब कोई नेता सत्ता के लिए ज्यादा महत्वाकांक्षी हो जाता है तो उसे कुछ समय के लिए रोका जा सकता है, पर उसकी महत्वाकांक्षा दोबारा सामने आती है।' उन्होंने दावा किया कि शिवकुमार के समर्थक संतों और विधायकों को दिल्ली भेजा गया था, जिससे दबाव बनाया जा सके। जेडीएस के नेता टी.ए. शरवण ने भी इस सुलह को राजनीति का नाटक बताया और कहा कि जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।
विज्ञापन
राजनीतिक विश्लेषकों की राय- समझौता मजबूरी, कड़वाहट बरकरार
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रामकृष्ण उपाध्याय ने कहा कि यह पूरी मुलाकात कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर हुई। 'दोनों नेता असल में टकराव में थे। बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकला। यह बस एक ऊपर-ऊपर की पैच-अप एक्सरसाइज थी।' एक अन्य राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, 'सिद्धारमैया को प्रशासन चलाने के लिए सहयोगी डिप्टी की जरूरत है और शिवकुमार अपनी छवि खराब नहीं करना चाहते। इसलिए समझौता हुआ, लेकिन मतभेद अब भी गहरे हैं।'
यह भी पढ़ें - Parliament session: शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में कांग्रेस, सोनिया गांधी के आवास पर अहम बैठक
कांग्रेस बोली- विवाद मीडिया और विपक्ष की देन
कांग्रेस प्रवक्ता एम. लक्ष्मण ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कोई विवाद था ही नहीं। 'यह विवाद भाजपा, जेडीएस और कुछ मीडिया की देन है। यह भ्रम फैलाया गया कि कांग्रेस बंटी हुई है, ताकि सरकार अस्थिर लगे।' उन्होंने कहा कि अगर मतभेद होते तो दोनों नेता शनिवार को एक साथ मंच पर दिखाई कैसे देते?
क्या आगे भी सब शांत रहेगा?
राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह समझौता फिलहाल सरकार को चलाए रखने की रणनीति है। भविष्य में जब पार्टी में नेतृत्व बदले या चुनाव नजदीक आए, तब यह टकराव फिर सामने आ सकता है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन