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युद्धाभ्यास 'त्रिशूल': पाकिस्तानी सीमा पर तीनों सेनाओं का साझा अभ्यास, अब भैरव-अश्नि बटालियन का दिखाएंगे शौर्य

Tue, 04 Nov 2025 05:20 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 04 Nov 2025 05:20 AM IST
सार

पाकिस्तान सीमा पर सोमवार से शुरू हुए तीनों सेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल’ में सेना ने अपनी नई हमलावर इकाइयों भैरव और अश्नि प्लाटून को शामिल किया। बड़े पैमाने पर वास्तविक युद्ध जैसे हालात में यह इन इकाइयों का पहला ऑपरेशनल परीक्षण है। भैरव बटालियन को तेज और सटीक कार्रवाई के लिए बनाया गया है, जिसमें 250 विशेष प्रशिक्षित सैनिक शामिल हैं।

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Trishul Joint three armed forces on Pakistani border now the Bhairav-Ashni Battalion will showcase its valor
युद्धाभ्यास त्रिशूल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान सीमा पर सोमवार से शुरू हुए तीनों सेनाओं के साझा युद्धाभ्यास त्रिशूल में सेना ने अपनी नई हमलावर इकाइयों भैरव और अश्नि प्लाटून को उतार दिया है। बड़े पैमाने पर वास्तविक युद्ध के हालात में इन दोनों इकाइयों का यह पहला ऑपरेशनल परीक्षण होगा। सेना के बड़े अधिकारी ने बताया कि हाल ही में तैयार की गई पांच भैरव बटालियनें ऑपरेशनल ड्यूटी पर तैनात भी कर दी गई हैं। त्रिशूल अभ्यास का मकसद जमीन, हवा, समुद्र, डिजिटल व साइबर डोमेन में देश के सुरक्षा तंत्र के बीच ऑपरेशनल तालमेल की पुष्टि करना है।

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भैरव बटालियन
इस बटालियन का गठन सेना के विशेष ऑपरेशनों में तेज और चौंकाने वाली कार्रवाई के लिए किया गया है। सेना अगले छह महीने में ऐसी 20 भैरव बटालियनें और तैयार करेगी। हर बटालियन में 250 विशेष प्रशिक्षित और अत्याधुनिक तकनीकों से लैस सैनिक होते हैं। दुश्मन के ठिकानों पर गहराई तक हमले के लिए बनी भैरव बटालियन में पैदल सेना, तोपखाने, एयर डिफेंस व सिग्नल जैसी इकाइयों से सैनिक शामिल हैं, जिससे यह एक ऑल-आर्म इकाई बन जाती है।
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अश्नि प्लाटून
सेना ने थार के मरुस्थल में ड्रोन व ड्रोन-रोधी ऑपरेशन में माहिर अश्नि प्लाटून भी उतारी है। एक अश्नि प्लाटून में 20 से 25 सैनिक होते हैं। हर अश्नि प्लाटून 10 ड्रोनों से लैस होती है। इनका मुख्य कार्य युद्धक्षेत्र में खुफिया जानकारी जुटाना और त्वरित हमला करना है। सेना की योजना 380 इंफेंट्री बटालियनों के पास अश्नि प्लाटून रखने की है। युद्ध के बदलते स्वरूप के कारण सेना परंपरागत के साथ युद्ध के तकनीकी आयाम पर काफी ध्यान दे रही है।
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अरब सागर पर फोकस
नौसेना ने बताया कि गुजरात के क्रीक इलाके और उत्तरी अरब सागर में बड़े समुद्री ऑपरेशन होंगे। युद्धाभ्यास से सेनाओं की आसूचना, निगरानी, टोही मिशन, इलेक्ट्रॉनिक व साइबर युद्ध संबंधी योजनाएं परिष्कृत की जाएंगी। अभ्यास में नौसेना, वायुसेना के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट कैरियर से जुड़े ऑपरेशन भी करेगी। त्रिशूल से मिली सीख से युद्ध के तौर तरीकों का परिशोधन किया जाएगा।


मरु ज्वाला
त्रिशूल के अंतर्गत राजस्थान के जैसलमेर में मरु ज्वाला उच्च तीव्रता वाले इंटीग्रेटेड अभ्यास शुरू किए गए हैं। इसमें सभी हथियार प्रणालियां जैसे तोपें, रॉकेट, ड्रोन व मिसाइल आदि साझा डिजिटल नेटवर्क से जुड़कर लक्ष्य पर एकीकृत आघात करती हैं। लंबी दूरी तक वार करने वाले हथियारों का परीक्षण भी किया जा रहा है। त्रिशूल की तैयारी के लिए पहले कई छोटे अभ्यास भी किए गए थे। इस महीने की 11, 12, और 13 तारीख को त्रिशूल का आखिरी चरण होगा।

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