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Tripura: भाजपा ने नार्थ ईस्ट की जीत को बताया 'डिवाइन', विकास कार्यों पर लगी जनता की मुहर
Thu, 02 Mar 2023 05:31 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Thu, 02 Mar 2023 05:31 PM IST
सार
पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा का बड़ा चेहरा बन चुके असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस चुनाव अभियान में पार्टी की कमान संभाले हुए थे। उन्होंने इन राज्यों की नब्ज को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र विशेष के अनुसार रणनीति बनाई और क्षेत्रीय नेताओं को चुनावी अभियान में झोंका।
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भाजपा
- फोटो : amar ujala
विस्तार
भाजपा अपने गठबंधन सहयोगियों के सहारे उत्तर-पूर्व के तीनों राज्यों (त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय) में सरकार बनाती दिख रही है। पार्टी ने इन राज्यों में मिली जीत को केंद्र सरकार के विकास कार्यों पर जनता की मुहर बताया है और कहा है कि उसकी यह जीत 'डिवाइन' (Development in North East) है। पूर्वोत्तर के ईसाई बहुल राज्यों में हिंदुत्व की छवि ओढ़ने वाली भाजपा को लगातार जीत मिलने के कई विशेष संदेश निकाले जा रहे हैं। भाजपा की यह जीत कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है।
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नार्थ ईस्ट के इन राज्यों में आदिवासी समुदाय के लोग भारी संख्या में रहते हैं। केंद्र सरकार ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासियों का साथ पाने का ट्रंप कार्ड खेला था। भाजपा ने अपने चुनावी अभियान में इस मुद्दे का जमकर प्रचार किया। आदिवासी इलाकों में पार्टी के आदिवासी चेहरों को झोंककर उन्हें यह बताने की कोशिश की गई कि वर्तमान सरकार न केवल उनका विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि वह उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने के लिए भी गंभीर है। भाजपा को जिस तरह आदिवासी बहुल नार्थ ईस्ट में सफलता मिली है, माना जा रहा है कि उसका ट्रंप कार्ड काम कर गया है।
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भाजपा ने नार्थ ईस्ट के अपने पूरे चुनावी अभियान में हिंदुत्व के मुद्दे को सीधे तौर पर नहीं छुआ। मेघालय के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी लाइन से अलग हटकर संवेदनशील पशु के मांस को खाने की बात कही और जनता को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि पार्टी के सत्ता में आने के बाद भी किसी प्रकार के मांस खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। चुनाव परिणाम बताते हैं कि उसका यह दावा जनता ने स्वीकार किया और उसके वादे पर मुहर लगाई है।
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पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा का बड़ा चेहरा बन चुके असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस चुनाव अभियान में पार्टी की कमान संभाले हुए थे। उन्होंने इन राज्यों की नब्ज को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र विशेष के अनुसार रणनीति बनाई और क्षेत्रीय नेताओं को चुनावी अभियान में झोंका। उन्होंने पूर्वोत्तर में विकास के एजेंडे को केंद्र का प्रमुख लक्ष्य बताया और जनता को इसका विश्वास दिलाया। पार्टी को इसका लाभ मिला।
इस चुनाव अभियान के बीच ही हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में बालविवाह के विरुद्ध बड़ा अभियान चलाया। बाल विवाह के मामले में अनेक लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनके इस कदम को एक वर्ग विशेष के विरुद्ध माना गया और यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय तक जा पहुंचा। लेकिन तमाम गतिरोध के बाद भी इस मुद्दे को बहुसंख्यक समुदाय के बीच बड़ा समर्थन मिला। पूर्वोत्तर के बेहद खुले समाज के बीच लव जिहाद जैसे मामलों से यहां के ईसाई बहुल समुदाय के बीच भी वर्ग विशेष के प्रति आशंका की खाई बढ़ी है। माना जा रहा है कि इस कारण भी ईसाई बहुल समुदाय के बीच भाजपा को पैठ बनाने में मदद मिली है।
केंद्र के एजेंडे को समर्थन
भाजपा प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला ने अमर उजाला से कहा कि उनकी पार्टी और सहयोगी दलों को मिली जीत केंद्र सरकार की उन नीतियों की जीत है जिनके अंतर्गत पूर्वोत्तर को विकसित बनाने का संकल्प लिया गया था। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद से अब तक पूर्वोत्तर को अनदेखा किया गया था। लोगों को आवाजाही के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन वर्तमान सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में रेल-सड़क संपर्क मजबूत बनाने के साथ-साथ हवाई सेवाओं को बढ़ावा दिया।
पूर्वोत्तर के राज्यों में लोगों को इलाज के लिए दिल्ली तक आना पड़ता था, लेकिन अब उन्हीं के आसपास एम्स की स्थापना की जा रही है। पूर्वोत्तर खेल के मामलों में हमेशा आगे रहा, लेकिन खेल प्रशिक्षण के लिए युवाओं के पास उचित सुविधाएं नहीं थीं। लेकिन अब वहां पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम विकसित किये जा रहे हैं। केंद्र सरकार के इन कार्यों को जनता अपनी आंखों से देख रही है। यही कारण है कि जनता ने भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर भरोसा जताया।