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तीन तलाक बिल : विपक्षी दलों का सरकार पर आरोप, अंधेरे में रख कर पास कराया विधेयक

Wed, 31 Jul 2019 07:51 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Wed, 31 Jul 2019 07:51 PM IST
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Triple Talaq : Opposition says, Bill passed because we did not know and Government did not tell us
गुलाम नबी आजाद - फोटो : ट्विटर

तीन तलाक बिल का लगातार विरोध करने और पर्याप्त संख्याबल होने के बावजूद भी इसके राज्यसभा से पास हो जाने पर विपक्षी दल अब हाथ मल रहे हैं। राज्यसभा में इस बिल को पास कराने में विपक्ष ने गैरहाजिर रहते हुए बड़ा साथ दिया। विपक्षी दल बिल पास कराने के सरकार के तरीके को अलोकतांत्रिक बता रहे हैं और अपने सांसदों की राज्यसभा से गैरहाजिरी का ठीकरा सरकार के सिर पर फोड़ रहे हैं। 

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विपक्षी दलों ने बुधवार को राज्यसभा के अंदर और बाहर एकजुटता दिखाने की कोशिश की और कहा कि सरकार ने अलोकतांत्रिक तरीके से हमें अंधेरे में रखकर बिल पास करवाया है। बता दें कि मंगलवार को राज्यसभा में तीन तलाक बिल 99-84 वोटों से पास हुआ था। मतदान के दौरान विपक्ष के 24 सदस्य मतदान के दौरान गैरहाजिर थे। अगर ये उस वक्त सदन में मौजूद रहते तो आज तस्वीर कुछ और होती। 
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार ने इस बिल पर विपक्ष को अंधेरे में रखा। सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्ष को 23 बिलों की सूची देकर पूछा था कि इनमें से कौन से बिल सेलेक्ट कमेटी में भेजना चाहते हैं। विपक्ष ने उनमें से करीब आधे बिलों पर सेलेक्ट कमेटी के परीक्षण की बात कही, लेकिन इतनी बड़ी संख्या बिल सेलेक्ट कमेटी में भेजने पर सहमति नहीं बनी। 

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सरकार ने विपक्ष को इस बारे में नहीं बताया : गुलाम नबी

उन्होंने कहा कि इसके बाद विपक्ष ने तीन तलाक समेत आठ बिलों को छंटनी के लिए भेजने की सिफारिश की थी। चूंकि सरकार ने विपक्ष को नहीं बताया कि उसकी सिफारिश नहीं मानी गई है इसलिए हमें ऐसा लग रहा था कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जा रहा है। आजाद ने कहा कि विपक्ष ने जिन छह बिलों को प्राथमिकता में रखा था उन्हें सेलेक्ट कमेटी में नहीं भेजकर सदन में लिस्ट कर दिया गया। 


आजाद ने कहा कि सोमवार को चुपके से रात 9-10 बजे के बीच लिस्ट किया गया, तब हमें पता चला कि ट्रिपल तलाक बिल आने वाला है। हम अंधेरे में रहे इसीलिए कांग्रेस और अन्य दल भी व्हिप जारी नहीं कर सके और मतदान में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने की सूचना सांसदों को नहीं दे सके। भाजपा सांसद मात्र इसीलिए सदन में मौजूद थे क्योंकि परिस्थितियां ऐसी थीं कि उनके सांसद सदन में मौजूद रहें। 

विपक्ष के सांसद इसलिए मौजूद नहीं थे क्योंकि विपक्ष को इसकी जानकारी ही नहीं था कि कौन सा बिल आ रहा है। उन्होंने बताया कि बुधवार को लाया गया यूएपीए में संशोधन का विधेयक चर्चा के लिए लिस्ट कराया गया है, विपक्ष ने इसे भी सेलेक्ट कमेटी को भेजने की सिफारिश की थी। आजाद राज्यसभा में अचानक अपनी सीट पर खड़े हुए और आरटीआई, तीन तलाक, यूएपीए विधेयकों का मुद्दा उठाया। 

'हर संस्थान को विभाग की तरह चलाना चाहती है भाजपा'

उन्होंने कहा कि 25 साल में ऐसा पहली बार हो रहा है, ये (भाजपा) हर संस्थान को एक विभाग की तरह चलाना चाह रहे हैं। मैं सभापति का ध्यान इस ओर आकृष्ट करना चाहता हूं कि आरटीआई पर चर्चा के दौरान हम बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजना चाहते थे। विपक्ष कई और विधेयकों को सेलेक्ट कमेटी को भेजना चाहता था। तब सरकार ने संसदीय कार्य मंत्री और अन्य सहयोगियों के माध्यम से हमसे संपर्क किया।

बिल पास हो रहे हैं या पिज्जा डिलिवरी : डेरेक ओ ब्रायन

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही है। अब तक 18 बिल लोकसभा और राज्यसभा से पास हुए हैं। सिर्फ एक बिल इस सत्र में छंटनी के लिए भेजा गया है। हम बिल को बेहतर बनाने के लिए ही उसकी छंटनी की बात कह रहे हैं। संसद में क्या हो रहा है? बिल पास हो रहा है या पिज्जा डिलिवरी हो रही है? ऐसी जल्दबाजी लोकतंत्र के खिलाफ  है। कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि संसद का महत्व नहीं रह गया है, क्योंकि विधेयकों पर विपक्ष को शामिल नहीं किया जा रहा है।

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