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तीन तलाक को दंडनीय बनाने वाले अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Tue, 25 Sep 2018 03:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 25 Sep 2018 03:39 PM IST
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Triple Talaq: Central government ordinance is challeged by Sunni Muslims in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट

एक बार में तीन तलाक देने को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश के प्रावधानों की सांविधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक याचिका दायर की गई।

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मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों का संरक्षण) अध्यादेश 19 सितंबर को अधिसूचित किया गया था। इससे पहले, इस अध्यादेश को मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी थी। ‘तलाक-ए-बिद्दत’ के नाम से प्रचलित एक बार में तीन तलाक की प्रथा में एक मुस्लिम शौहर एक ही बार में तीन बार तलाक तलाक कहकर अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है।
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इस महीने जारी अध्यादेश के अंतर्गत तीन तलाक को गैरकानूनी और शून्य घोषित करते हुए इसे दंडनीय अपराध कहा गया है। ऐसा करने पर पति को तीन साल की जेल की सजा हो सकती है। इस कानून के दुरुपयोग की आशंका को दूर करते हुए सरकार ने इसमें आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान करने जैसे कुछ सुरक्षा उपाय भी किए हैं।
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केरल स्थित मुस्लिम संगठन समस्त केरल जमीयतुल उलेमा ने इस अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए इसे निरस्त करने का अनुरोध किया है। 

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