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लोकसभा में आज पेश होगा तीन तलाक विधेयक, सदन में हंगामे के आसार
Thu, 25 Jul 2019 10:43 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 25 Jul 2019 10:43 AM IST
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triple talaq
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तीन तलाक विधेयक पर आज लोकसभा में चर्चा होगी। केंद्र सरकार बिल को पारित करने की आज पूरी कोशिश करेगी। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों को इसके लिए व्हिप जारी किया है और उनसे सदन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है।
सदन में इस बिल को लेकर हंगामे की स्थिति पैदा हो सकती है। विपक्षी दल इसके प्रावधानों को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। इस मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में बिल लोकसभा में तो पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में पास नहीं हो सका था। इस बार भी बिल लोकसभा में आसानी से पास हो जाएगा लेकिन राज्यसभा में मुश्किलें आएंगी।
विधेयक में एक साथ अचानक तीन तलाक दिए जाने को अपराध करार दिया गया है और साथ ही दोषी को जेल की सजा सुनाए जाने का भी प्रावधान किया गया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने मई में अपना दूसरा कार्यभार संभालने के बाद संसद के इस पहले सत्र में सबसे पहले इस विधेयक का मसौदा पेश किया था।
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कई विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है लेकिन सरकार का यह कहना है कि यह विधेयक लैंगिक समानता और न्याय की दिशा में एक कदम है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक मांग कर रही हैं कि इसे जांच पड़ताल के लिए संसदीय समिति को सौंपा जाए।
भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार के पास निचले सदन में पूर्ण बहुमत है और उसके लिए इसे पारित कराना कोई मुश्किल काम नहीं होगा। लेकिन राज्यसभा में सरकार को कड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ सकता है जहां संख्या बल के लिहाज से सत्ता पक्ष पर विपक्ष भारी है। जनता दल (यू) जैसे भाजपा के कुछ सहयोगी दल भी विधेयक के बारे में अपनी आपत्ति जाहिर कर चुके हैं।
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सदन में इस बिल को लेकर हंगामे की स्थिति पैदा हो सकती है। विपक्षी दल इसके प्रावधानों को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। इस मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में बिल लोकसभा में तो पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में पास नहीं हो सका था। इस बार भी बिल लोकसभा में आसानी से पास हो जाएगा लेकिन राज्यसभा में मुश्किलें आएंगी।
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विधेयक में एक साथ अचानक तीन तलाक दिए जाने को अपराध करार दिया गया है और साथ ही दोषी को जेल की सजा सुनाए जाने का भी प्रावधान किया गया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने मई में अपना दूसरा कार्यभार संभालने के बाद संसद के इस पहले सत्र में सबसे पहले इस विधेयक का मसौदा पेश किया था।
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कई विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है लेकिन सरकार का यह कहना है कि यह विधेयक लैंगिक समानता और न्याय की दिशा में एक कदम है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक मांग कर रही हैं कि इसे जांच पड़ताल के लिए संसदीय समिति को सौंपा जाए।
भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार के पास निचले सदन में पूर्ण बहुमत है और उसके लिए इसे पारित कराना कोई मुश्किल काम नहीं होगा। लेकिन राज्यसभा में सरकार को कड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ सकता है जहां संख्या बल के लिहाज से सत्ता पक्ष पर विपक्ष भारी है। जनता दल (यू) जैसे भाजपा के कुछ सहयोगी दल भी विधेयक के बारे में अपनी आपत्ति जाहिर कर चुके हैं।