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West Bengal Bypolls: चुनाव आयोग से तृणमूल कांग्रेस की मांग, सभी 10 सीटों पर एक साथ कराया जाए उपचुनाव
Tue, 11 Jun 2024 05:03 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 11 Jun 2024 05:03 PM IST
सार
West Bengal Bypolls: लोकसभा चुनाव के बाद अब कई राज्यों में विधानसभा उपचुनाव भी होने हैं। इस कड़ी में पश्चिम बंगाल में चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा चुनाव आयोग ने की है। वहीं इसे लेकर राज्य की सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है और राज्य की सभी 10 सीटों पर एक साथ उपचुनाव कराने की मांग की है।
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भारत निर्वाचन आयोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में चाप विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा चुनाव आयोग ने की है। वहीं इसे लेकर राज्य की सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है और राज्य की सभी 10 सीटों पर एक साथ उपचुनाव कराने की मांग की है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि अलग-अलग चुनाव कराना उचित नहीं और भेदभावपूर्ण होगा। बता दें कि चुनाव आयोग ने हाल ही में सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की घोषणा की है, जिसमें 10 जुलाई को वोट डाले जाएंगे। इसमें पश्चिम बंगाल की चार विधानसभा सीटें- रायगंज, रानाघाट दक्षिण, बागदा, मनिकतला शामिल हैं।
'सभी 10 सीटों पर एक साथ हो उपचुनाव'
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखते हुए राज्य की सभी 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की मांग की है और कहा कि राज्य की उन छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराएं जाएं, जिन सीटों के विधायकों ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है। टीएमसी ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा कि- जिन विधायकों ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है, वो जल्द ही अपने पदों से इस्तीफा देंगे। जिसके बाद से राज्य की छह विधानसभा सीटें खाली हो जाएंगी, इनमें मदरीहाट, नैहाटी, तालदांगरा, मेदिनीपुर, सिताई और हरोआ विधानसभा सीटें शामिल है। फिलहाल जिन चार विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें तीन सीटों पर विधायकों ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अपनी सीटें खाली की थी। जबकि मनिकतला सीट टीएमसी के वरिष्ठ नेता और मंत्री साधन पांडे के मृत्यु के बाद खाली हुई है।
'अलग-अलग चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं'
टीएमसी ने पत्र में आगे लिखा कि इन सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि राज्य की कुछ विधानसभा सीटें जल्द ही खाली हो जाएंगी। और लगातार चुनाव कराने से राज्य में सरकार का कामकाज और प्रशासनिक प्रणाली भी कहीं-न-कहीं प्रभावित होगी। अगर एक साथ सभी 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे तो इससे कम संसाधनों का इस्तेमाल होगा, क्योंकि छह विधानसभा सीटें छह महीने के अंदर खाली हो जाएंगी। पार्टी के मुताबिक चुनाव आयोग पहले ही सात चरणों में लोकसभा चुनाव और राज्य में सभी सातों चरण में लोकसभा चुनाव कराने को लेकर आलोचना झेल चुका है।
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छह में से पांच विधानसभा सीटों पर है टीएमसी का कब्जा
वहीं अगर अन्य छह विधानसभा सीटों की बात करें तो छह में से पांच विधानसभा सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। मदरीहाट विधानसभा से भाजपा के मनोज तिग्गा विधायक हैं, जिन्होंने अलीपुरद्वार लोकसभा सीट से जीत हासिल की है। जबकि नैहाटी से टीएमसी विधायक पार्थ भौमिक बैरकपुर से जीतकर सांसद बने हैं। वहीं तालदांगरा के विधायक अरूप चक्रवर्ती बांकुरा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। इस कड़ी में मेदिनीपुर से टीएमसी विधायक जून मालिया मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद बनीं हैं, जबकि सिताई विधायक जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया कूच बेहर से लोकससभा सांसद चुने गए हैं। वहीं हरोआ विधानसभा सीट से टीएमसी विधायक हाजी नरुल इस्लाम बशीरहाट लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए हैं।
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'सभी 10 सीटों पर एक साथ हो उपचुनाव'
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखते हुए राज्य की सभी 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की मांग की है और कहा कि राज्य की उन छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराएं जाएं, जिन सीटों के विधायकों ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है। टीएमसी ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा कि- जिन विधायकों ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है, वो जल्द ही अपने पदों से इस्तीफा देंगे। जिसके बाद से राज्य की छह विधानसभा सीटें खाली हो जाएंगी, इनमें मदरीहाट, नैहाटी, तालदांगरा, मेदिनीपुर, सिताई और हरोआ विधानसभा सीटें शामिल है। फिलहाल जिन चार विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें तीन सीटों पर विधायकों ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अपनी सीटें खाली की थी। जबकि मनिकतला सीट टीएमसी के वरिष्ठ नेता और मंत्री साधन पांडे के मृत्यु के बाद खाली हुई है।
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'अलग-अलग चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं'
टीएमसी ने पत्र में आगे लिखा कि इन सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि राज्य की कुछ विधानसभा सीटें जल्द ही खाली हो जाएंगी। और लगातार चुनाव कराने से राज्य में सरकार का कामकाज और प्रशासनिक प्रणाली भी कहीं-न-कहीं प्रभावित होगी। अगर एक साथ सभी 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे तो इससे कम संसाधनों का इस्तेमाल होगा, क्योंकि छह विधानसभा सीटें छह महीने के अंदर खाली हो जाएंगी। पार्टी के मुताबिक चुनाव आयोग पहले ही सात चरणों में लोकसभा चुनाव और राज्य में सभी सातों चरण में लोकसभा चुनाव कराने को लेकर आलोचना झेल चुका है।
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छह में से पांच विधानसभा सीटों पर है टीएमसी का कब्जा
वहीं अगर अन्य छह विधानसभा सीटों की बात करें तो छह में से पांच विधानसभा सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। मदरीहाट विधानसभा से भाजपा के मनोज तिग्गा विधायक हैं, जिन्होंने अलीपुरद्वार लोकसभा सीट से जीत हासिल की है। जबकि नैहाटी से टीएमसी विधायक पार्थ भौमिक बैरकपुर से जीतकर सांसद बने हैं। वहीं तालदांगरा के विधायक अरूप चक्रवर्ती बांकुरा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। इस कड़ी में मेदिनीपुर से टीएमसी विधायक जून मालिया मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद बनीं हैं, जबकि सिताई विधायक जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया कूच बेहर से लोकससभा सांसद चुने गए हैं। वहीं हरोआ विधानसभा सीट से टीएमसी विधायक हाजी नरुल इस्लाम बशीरहाट लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए हैं।