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ओडिशा: 'सुना बेशा' अनुष्ठान में 200 किलो सोने के आभूषणों से सजाई गई पुरी की त्रिमूर्ति
Wed, 21 Jul 2021 09:45 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, पुरी
पीटीआई, पुरी
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 21 Jul 2021 09:45 PM IST
सार
ओडिशा के पुरी में भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को बुधवार को ‘सुना बेशा’ (सोने की पोशाक) अनुष्ठान में 200 किलोग्राम से अधिक सोने के गहनों से सजाया गया।
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बलभद्र, सुभद्रा और जगन्नाथ की त्रिमूर्ति
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
परंपरा के अनुसार देवी एवं देवताओं की रथ यात्रा की वापसी के बाद वाले दिन सोने के आभूषणों से भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को सजाया जाता है। ‘सुना बेशा’ आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि या आषाढ़ के महीने में 11वें शुक्ल पक्ष में आयोजित की जाती है। हालांकि, श्रद्धालुओं को महामारी के कारण लगातार दूसरे वर्ष तीन राजसी लकड़ी के रथों पर विराजमान भगवान की स्वर्ण पोशाक को देखने का दुर्लभ अवसर नहीं मिला।
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जिला प्रशासन ने मंदिर और उसके 'लायन गेट' के पास कुछ स्थानों को छोड़ पूरे शहर से बंदी और कर्फ्यू वापस ले लिया, जहां अनुष्ठान के लिए रथ खड़े थे। भीड़ से बचने के लिए एहतियातन ग्रांड रोड के दोनों ओर के सभी होटल, लॉज और अतिथि गृह बंद कर दिए गए थे। प्रशासन की अधिसूचना में कहा गया था, '21 जुलाई को सुना बेशा, 22 जुलाई को अधरपना के मद्देनजर कुछ क्षेत्रों में 24 जुलाई को सुबह छह बजे तक बंद और कर्फ्यू लागू रहेगा।'
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सुना बेशा, जिसे 'राजधिराज बेशा' भी कहा जाता है, साल में कम से कम पांच बार होता है। यह 12वीं शताब्दी के मंदिर के अंदर चार बार तब आयोजित किया जाता है जब देवताओं को रत्न सिंहासन पर और एक बार रथों पर बैठाया जाता है। एक वरिष्ठ सेवक ने कहा, 'दशहरा, कार्तिका पूर्णिमा, पौष पूर्णिमा और दोला पूर्णिमा पर मंदिर के अंदर सुना बेशा का आयोजन किया जाता है। त्रिमूर्ति को लगभग 200 किलो सोने के आभूषणों से सजाया जाता है।'
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