मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए अमित शाह को याद आया ‘मिशन कश्मीर’, घाटी की पहेली सुलझाने की चिंता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘बलिदान दिवस’ पर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है। पार्टी मुख्यालय पर कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ डॉक्टर एसपी मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम आज जम्मू-कश्मीर में बिना परमिट के जा सकते हैं तो इसका श्रेय सिर्फ डॉक्टर मुखर्जी को ही जाता है। पश्चिम बंगाल के भारत का अभिन्न हिस्सा होने का श्रेय भी उन्होंने पूर्व अखिल भारतीय हिन्दू महासभा अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दिया और कहा कि राष्ट्रहित उनके लिए सर्वप्रमुख था।
अपने इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने सत्ता सुख त्याग दिया था। एक देश में दो कानून, दो प्रधान और दो निशान (अलग-अलग झंडे) होने का सबसे पहले उन्होंने ही विरोध किया था और इसके विरुद्ध आंदोलन छेड़ा था। परमिट सिस्टम का विरोध करते हुए जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करते हुए अब्दुल्ला सरकार के द्वारा 11 मई 1953 को डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लखनपुर में हिरासत में ले लिया गया था। हिरासत के दौरान ही उनकी मृत्यु 23 जून 1953 को संदेहास्पद परिस्थितियों में हो गई थी।
मुखर्जी को श्रद्धांजली देने के बाद भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूरा देश डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच करवाना चाहता था, लेकिन पंडित नेहरु के न चाहने के कारण ऐसा नहीं हो सका।
कश्मीर भाजपा के लिए आज भी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। घाटी के आतंक को खत्म करना उसकी प्राथमिकता में शामिल रहा है। पार्टी कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 35ए और अनुच्छेद 370 में परिवर्तन कर उसके भारत के अन्य राज्यों के सामान दर्जे में लाना चाहती है जिसका जम्मू-कश्मीर के अनेक सियासी दलों के द्वारा विरोध किया जा रहा है। इस सरकार में भी उसके लिए ये बड़ी चुनौती बनी हुई है। माना जाता है कि राज्यसभा में भी उसके मनमुताबिक संख्या हो जाने के बाद वह ऐसा प्रयास कर सकती है।