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Bharat Band: यूसीसी पर आदिवासियों का विरोध, 7 अगस्त को भारत बंद कितना होगा सफल

Sun, 06 Aug 2023 06:01 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 06 Aug 2023 06:01 PM IST
सार

राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद ने सोमवार 7 अगस्त को भारत बंद का एलान करते हुए कहा है कि समान नागरिक संहिता आदिवासियों के हितों को चोट पहुंचाने वाली है।

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Tribals protest against UCC how Much Bharat bandh will be successful on 7th August Know all about it
समान नागरिक संहिता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब तक बेहद हंगामेदार रहे संसद सत्र में सोमवार को भी सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विपक्ष राहुल गांधी की संसद सदस्यता को अब तक बहाल न किए जाने को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है तो सात अगस्त को ही कुछ आदिवासी संगठनों ने भारत बंद का आयोजन किया है। इस बंद का झारखंड सहित चुनावी राज्यों मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में असर हो सकता है। इससे भी केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 

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राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद ने सोमवार 7 अगस्त को भारत बंद का एलान करते हुए कहा है कि समान नागरिक संहिता आदिवासियों के हितों को चोट पहुंचाने वाली है। आदिवासी समुदायों के विभिन्न समाजों में धार्मिक-सामाजिक परंपराएं अलग-अलग हैं। समान नागरिक संहिता में सबके लिए एक समान कानून बनाने से आदिवासियों की परंपराओं को चोट पहुंच सकती है। यह आदिवासियों की मूल पहचान को भी  प्रभावित कर सकती है जिसे सुरक्षित रखे जाने की गारंटी संविधान के अंतर्गत दी गई है। 
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परिषद के नेता भारती सिंह ने आदिवासियों के साथ-साथ मणिपुर का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कहा है कि मणिपुर में आदिवासियों की बड़ी संख्या है और सरकार वहां पर आदिवासियों के हितों को सुरक्षा देने में असफल साबित हुई है। सोमवार के बंद के जरिए वे इन आवाजों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं। 
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आदिवासियों के नाम पर नकारात्मक राजनीति नहीं होगी सफलः ओरांव 
वहीं, आदिवासी समुदाय के भाजपा नेता समीर ओरांव ने अमर उजाला से कहा कि अब तक आदिवासियों के नाम पर नकारात्मक राजनीति की जाती रही है। उन्हें कोई मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का कोई काम नहीं हुआ है और इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि स्वतंत्रता के 75 साल बाद भी आदिवासी इलाकों में कोई विकास नहीं हुआ है। 

वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में आदिवासी इलाकों में भारी विकास किया गया है। इन इलाकों में रोजगार की संभावनाएं पैदा कर आदिवासी युवाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने की कोशिश की गई है। केंद्र सरकार के इन प्रयासों का ही परिणाम है कि आज आदिवासी समुदाय अपने अंदर एक नई ऊर्जा महसूस कर रहा है। 


उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की विकासवादी नीतियों के कारण ही विपक्ष को अपनी राजनीति सिमटती दिखाई पड़ रही है, यही कारण है कि आदिवासियों को एक बार फिर समान नागरिक संहिता के नाम पर भड़काने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब यह कोशिश सफल नहीं होगी क्योंकि आदिवासी समुदाय भी विपक्ष की इन  चीजों को अब समझने लगा है। 

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