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ICMR: सस्ते इलाज के लिए खोजी गईं 21 स्वदेशी तकनीक का ट्रायल जल्द, 15-15 करोड़ देगा आईसीएमआर

Sat, 08 Jul 2023 05:48 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 08 Jul 2023 05:48 AM IST
सार

आईसीएमआर ने नियम तय किया है कि किसी एक क्षेत्र के अनुसंधान केंद्र को सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च में तब्दील किया जाएगा। यहां अधिकतम पांच तकनीकों पर अध्ययन किए जा सकते हैं। प्रत्येक तकनीक के ट्रायल पर आठ करोड़ तक खर्च होंगे।

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Trial of 21 indigenous techniques discovered for cheap treatment soon
ICMR - फोटो : ANI

विस्तार

सस्ते इलाज के लिए देश में खोजी गईं 21 स्वदेशी तकनीकों पर जल्द ही क्लीनिकल ट्रायल शुरू होगा। इसके लिए देश भर में सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च स्थापित होंगे। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) शोध के लिए 15-15 करोड़ रुपये का बजट मुहैया कराएगा।

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आईसीएमआर के अनुसार, क्लीनिकल ट्रायल पूरे होने के बाद इन तकनीकों को निजी कंपनियों के साथ मिलकर विकसित किया जाएगा और फिर इन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों तक उपलब्ध कराया जाएगा। हाल ही में आईसीएमआर ने जो 21 तकनीकों की एक सूची तैयार की है उसे देश के सभी सरकारी और प्राइवेट अनुसंधान केंद्रों के साथ साझा किया गया है। इस सूची में कैंसर जांच से लेकर आंखों की स्क्रीनिंग और हड्डियों में किए जाने वाले इम्प्लांट तक शामिल हैं।

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एक केंद्र पर अधिकतम 5 अध्ययन
आईसीएमआर ने नियम तय किया है कि किसी एक क्षेत्र के अनुसंधान केंद्र को सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च में तब्दील किया जाएगा। यहां अधिकतम पांच तकनीकों पर अध्ययन किए जा सकते हैं। प्रत्येक तकनीक के ट्रायल पर आठ करोड़ तक खर्च होंगे।

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बायोप्सी गन, स्मार्ट फोन स्क्रीनिंग, नेमोकेयर भी
सूची में स्वदेशी बायोप्सी गन भी शामिल है जिसके जरिए कैंसर के संदिग्ध रोगी का सैंपल लिया जाता है। आईसीएमआर ने एक ऐसी बायोप्सी गन की खोज की है, जिसका इस्तेमाल एक से अधिक बार आसानी से किया जा सकता है। मोबाइल फोन की सहायता से मोतियाबिंद की जांच की तकनीक भी विकसित की है। सूची में नेमोकेयर रक्षा तकनीक भी है, जो एक उपकरण है। इसे शिशु के पैरों में लगाया जाता है। यह समय पूर्व जन्म वाले बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी करता है।

पीलिया से शिशुओं को बचाने के लिए एनलाइट-360 
हाल ही में आईसीएमआर व पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिकों ने नवजात को पीलिया से बचाने के लिए एनलाइट-360 तकनीक की खोज की। इसे भी क्लीनिकल ट्रायल के लिए सूची में रखा है। देश में हर साल 67 लाख बच्चे गंभीर पीलिया की चपेट में आ रहे हैं।

 

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