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अध्ययन में दावा : आंत रोग के उपचार से हल्का हो सकता है कोविड रोधी टीके का प्रभाव
Tue, 27 Apr 2021 11:16 PM IST
संजीव कुमार झा
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 27 Apr 2021 11:16 PM IST
सार
अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ऐसे अनेक लोगों में टीकाकरण के बाद बननेवाली एंटीबॉडी की संख्या कम रही। पत्रिका जीयूटी में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट में ऐसे 865 लोगों का जिक्र किया गया जो ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (टीएनएफ) रोधी ‘इन्फिलिक्सिमैब’ दवा ले रहे हैं।
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कोरोना वैक्सीन
- फोटो : PTI
विस्तार
आंत रोग के इलाज के लिए आम तौर पर सुझाई जाने वाली दवा खा रहे लोगों को यह नहीं समझना चाहिए कि वे कोविड रोधी टीके की पहली खुराक के बाद कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षित हो गए हैं। अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ऐसे अनेक लोगों में टीकाकरण के बाद बननेवाली एंटीबॉडी की संख्या कम रही।
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पत्रिका जीयूटी में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट में ऐसे 865 लोगों का जिक्र किया गया जो ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (टीएनएफ) रोधी ‘इन्फिलिक्सिमैब’ दवा ले रहे हैं। इन लोगों में फाइजर/बायोएनटेक या ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका के कोविड रोधी टीके लगाने के बाद एंटीबॉडी प्रतिक्रिया देखी गई।
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इंपीरियल कॉलेज लंदन और ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर के अनुसंधानकर्ताओं के अनुरूप टीएनएफ रोधी दवा रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी बीमारियों का प्रभावी उपचार है। उन्होंने कहा कि हालांकि रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर किए जाने से टीके का प्रभाव कम हो सकता है और गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
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अध्ययन से जुड़ी टीम ने पाया कि जब ‘इन्फिलिक्सिमैब’ लेनेवाले लोगों से वैकल्पिक उपचार के तौर पर ‘वेडोलिजुमैब’ दवा लेनेवाले 428 लोगों की तुलना की गई तो ‘इन्फिलिक्सिमैब’ लेनेवाले लोगों के शरीर में एंटीबॉडी की सांद्रता महत्वपूर्ण रूप से कम मिली।
अध्ययन रिपोर्ट के सह-लेखक निक पॉवेल ने कहा कि यह सच में काफी महत्वपूर्ण अध्ययन है जिससे पता चलता है कि टीएनएफ दवा खाने वाले लोगों में कोविड रोधी टीके की पहली खुराक रक्षात्मक एंटीबॉडी बनाने में अपर्याप्त है।
पॉवेल ने कहा, ‘‘यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया में लाखों लोग इन दवाओं का सेवन करते हैं। यह आश्वस्त करनेवाली बात है कि जिन रोगियों को टीके की दूसरी खुराक दी गई, उनमें से अधिकतर में शानदार प्रतिक्रिया (एंटीबॉडी संबंधी) देखने को मिली।’’
अध्ययन में ब्रिटेन के 92 अस्पतालों में ‘क्रोन्स’ और ‘अल्सरेटिव कोलाइटिस’ का इलाज करा रहे 6,935 रोगियों को शामिल किया गया। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि टीएनएफ रोधी दवाएं ले रहे लोगों को कोविड रोधी टीके की दूसरी खुराक प्राथमिकता के आधार पर लगवानी चाहिए।