यहां देवी के तौर पर पूजे जाते हैं किन्नर, लोग लेते हैं इनका आशीर्वाद
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दुनिया भर के कई हिस्सों में किन्नरों को भले ही अवहेलना झेलनी पड़ती हो, लेकिन तमिलनाडु में एक ऐसी जगह है, जहां इन्हें देवी के रूप में पूजा जाता है। यहां 10 दिन तक मनाए जाने वाले मयना कोल्लई त्योहार में किन्नरों को देवी की तरह सजाया जाता है और पूरे गांव वाले उनका आशीर्वाद लेते हैं।
तमिलनाडु के देवनामपट्टनम में मयना कोल्लई त्योहार मनाया जाता है। 10 दिन के इस त्योहार के शुरू होने से पहले यहां भी किन्नर आम जिंदगी का हिस्सा होते हैं। वे भी आम लोगों के बीच अपने काम को पूरा करते हैं।
लेकिन फरवरी और मार्च के महीने में जैसे ही कोल्लई त्योहार आता है, तो उन्हें देवी के तौर पर पूजा जाने लगता है। इस क्षेत्र में किन्नरों को कोथी नाम से बुलाया जाता है। त्योहार के दौरान इन्हें सजाया और संवारा जाता है। 10 दिन के इस अंतराल में वे न शराब पी सकते हैं और न ही मर्दों के करीब जा सकते हैं। त्योहार के दौरान वे नृत्य करते हैं और पूरी गांव की सैर कर लोगों को आशीर्वाद देते हैं।
श्रृंगार और नृत्य करते हैं किन्नर
मयना कोल्लई त्योहार के लिए किन्नरों का श्रृंगार किया जाता है। करीब दो से तीन घंटे तक एक बंद कमरे में उन्हें सजाया जाता है और नृत्य के लिए तैयार किया जाता है। श्रृंगार होने के बाद ये ग्रामीणों के सामने अपना नृत्य पेश करते हैं। इस दौरान ग्रामीण इन्हें देवी के तौर पर पूजते हैं।
आशीर्वाद लेने के लिए किन्नरों को घर बुलाते हैं लोग
त्योहार के 10 दिन किन्नरों को इज्जत और बड़े ही सम्मान से नवाजा जाता है। ये लोग पूरे गांव की सैर करते हैं और हर घर में जाते हैं। जहां लोग इनसे आशीर्वाद लेते हैं। इस त्योहार की वजह से कुछ कोथी यहां इतने प्रसिद्ध हो गए हैं कि अब वे सेलेब्रिटी बन चुके हैं। लोग उनके साथ फोटो खींचने के लिए उतावले रहते हैं।