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HC: महज पक्षपात के शक पर न्यायिक अधिकारियों को मामले पर कार्यवाही से नहीं हटा सकते, बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी
Sun, 10 Nov 2024 12:32 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 10 Nov 2024 12:32 PM IST
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी न्यायिक अधिकारी से किसी मामले पर कार्यवाही सिर्फ इसलिए स्थानांतरिक नहीं की जा सकती, क्योंकि उस पर किसी पक्ष ने आरोप लगाए हैं। दरअसल, मामला लीलावती अस्पताल के ट्रस्ट संस्थापक की ओर से चैरिटी कमिश्नर पर लगाए पक्षपात के आरोपों से जुड़ा है। इसी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने यह टिप्पणी की।
हाईकोर्ट ने लीलावती अस्पताल के ट्रस्टियों के बीच चल रहे विवाद के मामले को चैरिटी कमिश्नर से किसी और न्यायिक अधिकारी के पास स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया। जज ने पाया कि इस मामले में चैरिटी कमिश्नर पर पक्षपात की कोई भी ठोस वजह नहीं पाई गई। उन्होंने कहा कि सिर्फ विपरीत आदेश मामले के स्थानांतरण की मांग की वजह नहीं हो सकता।
जज ने कहा, "यह जरूरी है कि न्याय के सभी पक्षों को सुरक्षित किया जाए और शक के आधार पर लगाए आरोपों की कोई तर्कसंगत वजह हो। सिर्फ अनुकूल माहौल न होने की बात किसी न्यायिक अधिकारी के स्थानांतरण का कारण नहीं बन सकती।"
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इसी के साथ कोर्ट ने लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट के संस्थापक चारू मेहता और स्थायी ट्रस्टी राजेश मेहता-प्रशांत मेहता की याचिका को रद्द कर दिया। इन लोगों ने चैरिटी कमिश्ननर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मांग की थी कि ट्रस्ट के मामले में कार्यवाही को किसी और न्यायिक अधिकारी को सौंपा जाए।
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हाईकोर्ट ने लीलावती अस्पताल के ट्रस्टियों के बीच चल रहे विवाद के मामले को चैरिटी कमिश्नर से किसी और न्यायिक अधिकारी के पास स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया। जज ने पाया कि इस मामले में चैरिटी कमिश्नर पर पक्षपात की कोई भी ठोस वजह नहीं पाई गई। उन्होंने कहा कि सिर्फ विपरीत आदेश मामले के स्थानांतरण की मांग की वजह नहीं हो सकता।
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जज ने कहा, "यह जरूरी है कि न्याय के सभी पक्षों को सुरक्षित किया जाए और शक के आधार पर लगाए आरोपों की कोई तर्कसंगत वजह हो। सिर्फ अनुकूल माहौल न होने की बात किसी न्यायिक अधिकारी के स्थानांतरण का कारण नहीं बन सकती।"
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इसी के साथ कोर्ट ने लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट के संस्थापक चारू मेहता और स्थायी ट्रस्टी राजेश मेहता-प्रशांत मेहता की याचिका को रद्द कर दिया। इन लोगों ने चैरिटी कमिश्ननर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मांग की थी कि ट्रस्ट के मामले में कार्यवाही को किसी और न्यायिक अधिकारी को सौंपा जाए।