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Train Accident: लुमडिंग में कंचनजंगा एक्सप्रेस में हुए एक बदलाव से बच गई कुछ जिंदगियां, पर कई को मिला गम

Mon, 17 Jun 2024 06:00 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा झा Updated Mon, 17 Jun 2024 06:00 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में सोमवार को हुए रेल हादसे में 15 लोगों की जान चली गई। दरअसल, यात्री ट्रेन को मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर मारी थी, जिससे पीछे के डिब्बे में सवार कुछ यात्रियों की जान चली गई, जबकि आगे के डिब्बे में बैठे यात्री बाल-बाल बच गए। चौंकाने वाली बात यह है कि जो यात्री ट्रेन के रवाना होते समय ट्रेन का जो आखिरी डिब्बा था, वह असम के लुमडिंग स्टेशन में ट्रेन की दिशा में बदलाव के चलते इंजन में सबसे आगे लग गया। वहीं, सबसे आगे लगा डिब्बा इस बदलाव से सबसे पीछे हो गया। इस छोटे से परिवर्तन के चलते जहां कुछ यात्री जान बचने का शुक्र मना रहे हैं, वहीं कई लोगों के परिवारों में शोक का माहौल है।

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Train Accident: A change in the Kachenjunga Express in Lumding saved some lives, but many had to suffer
जलपाईगुड़ी के पास हुआ रेल हादसा - फोटो : pti

विस्तार

असम के लुमडिंग लुमडिंग स्टेशन जहां ट्रेनों की दिशा में बदलाव किया जाता है। दिशा बदलाव के दौरान आगे से इंजन को हटाकर पीछे की ओर लगा दिया जाता है। दिशा बदलाव के साथ ट्रेन को रवाना किया जाता है। सोमवार को 13174 अगरतला-सियालदह कंचनजंगा एक्सप्रेस में भी यह दिशा बदलाव प्रक्रिया हुई। लुमडिंग स्टेशन पर इंजन को बदलकर पीछे लगाकर गया, और ट्रेन रवाना की गई। ऐसे में लुमडिंग स्टेशन तक आगे के कोच में बैठे लोग लुमडिंग के बाद पीछे के कोच के यात्री बन गए। यही 15 लोगों को मौत के नजदीक ले गया। लुमडिंग स्टेशन के बाद आगे के कोच में बैठे कई यात्री सुरक्षित बचने पर खुद को भाग्यशाली मान रहे हैं। वहीं लुमडिंग के बाद पीछे के कोच में बैठे यात्रियों को ये दिन जीवनभर के लिए बुरी याद दे गया।  
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पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी के पास रंगापानी में एक्सप्रेस ट्रेन को एक मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक डिब्बा इंजन के ऊपर चढ़ गया। वहीं कई बोगियां पटरी से भी उतर गई थीं। कई बोगियां क्षतिग्रस्त भी हुईं। ट्रेन में बीच की बोगियों में बैठे यात्रियों ने बताया लुमडिंग के बाद गार्ड वैन उसके आगे दो पार्सल वैन और उसके आगे के दो जनरल कोच इस हादसे से ज्यादा प्रभावित हुए हैं। स्लीपर कोच में बैठे एक यात्री ने कहा, "प्रभावित कोच लुमडिंग तक आगे थे।" उन्होंने बताया सामान्य सीटिंग कोच सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जो बगल की पटरियों पर गिर गया। 
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क्षतिग्रस्त कोच के पास खड़े यात्री ने बताया, "हमारी ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी से कुछ किलोमीटर दूर रंगापानी पहुंचने पर बहुत धीमी गति से चल रही थी।" एक यात्री ने अपने हादसे का अनुभव साझा करते हुए बताया कि अचानक तेज झटका लगा और तेज आवाज के साथ ट्रेन अचानक रुक गई। उतरने पर उसने देखा कि मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर मार दी थी। 
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एक अन्य यात्री ने बताया, "हम चाय पी रहे थे, तभी अचानक झटके के साथ ट्रेन रुक गई।" उन्होंने कहा कि हम समझ नहीं सके कि ये क्या हुआ। वहीं अपने परिवार के साथ यात्रा कर रही एक गर्भवती महिला ने बताया कि टक्कर लगने पर वह अपनी सीट से गिर गई। उसने बताया, "ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो। हमें खुद को संभालने और यह समझने में थोड़ा समय लगा कि क्या हुआ है।"

मालगाड़ी ने पीछे से मारी थी टक्कर 
सियालदाह जा रही कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) को पीछे से मालगाड़ी ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे कंजनजंगा एक्सप्रेस के तीन डिब्बे बेपटरी हो गए। इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 60 से ज्यादा यात्री घायल हो गये हैं। उन घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

स्थानीय लोगों ने शुरू किया था बचाव कार्य
इस दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों ने बचाव अभियान शुरू कर दिया था। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि एक्सप्रेस ट्रेन धीमी गति से चल रही थी, तभी तेज गति से आ रही मालगाड़ी ने पीछे से उसे टक्कर मार दी। दुर्घटनास्थल का दौरा करने वाले दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्ता ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद बचाव कार्य किया गया। उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिक चिंता प्रभावित यात्रियों की मदद करना है।" सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब, जिन्होंने दुर्घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेनों में टक्कर रोधी उपकरणों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "बुलेट ट्रेनों पर भारी मात्रा में खर्च करने के बजाय, ट्रेनों में सुरक्षा उपकरण लगाना प्राथमिकता होनी चाहिए।"


सुबह-सुबह खराब था सिग्नल सिस्टम
रेलवे सूत्रों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि रानीपात्रा रेलवे स्टेशन और पश्चिम बंगाल के छत्तर हाट जंक्शन के बीच सुबह साढ़े पांच बजे से ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम खराब पड़ा था।सूत्रों ने बताया कि ट्रेन नंबर 13174 (सियालदह कंचनजंगा एक्सप्रेस) रंगापानी स्टेशन से सुबह आठ बजकर 27 मिनट पर रवाना हुई थी और सुबह पांच बजकर 50 मिनट पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम खराब होने के चलते रानीपतरा रेलवे स्टेशन तथा छत्तर हाट के बीच रुकी रही।
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