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भारत से संबंध तोड़ने का असरः पाकिस्तान में टूट रही उद्योगों की कमर

Tue, 20 Aug 2019 06:36 PM IST
अनिल पांडेय रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Tue, 20 Aug 2019 06:36 PM IST
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सार
  • प्याज और टमाटर जैसी सात फीसदी आवश्यक सब्जियां भारत से मंगाई जाती हैं।
  • प्लास्टिक, रबड़, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए पाकिस्तान की निर्भरता भारत पर है।
  • पाकिस्तान में कपड़ा और दवा उद्योग तो मजबूत है, लेकिन उसके लिए कच्चा माल भारत से जाता है।
  • 1996 में भारत सरकार ने पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया था।
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Trade ties between India and Pakistan suspend, Who gains, who loses from Imran Khan move
भारत-पाकिस्तान व्यापार - फोटो : Pakistan Tribune

विस्तार

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 में भारत सरकार ने बदलाव किया तो पाकिस्तान बेगानी शादी का अब्दुल्ला दीवाना बन गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने गुहार लगाने पहुंच गया। उसने अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस से भी मिन्नतें कीं। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो भारत के साथ व्यापारिक संबंध और राजनयिक संबंध खत्म कर लिए। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच चलने वाली 'समझौता एक्सप्रेस' और 'थार एक्सप्रेस' को भी रोक दिया।



ट्रेन रुकने से दोनों देशों के नागरिकों को तकलीफ जरूर हुई, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान ही जिम्मेदार है। लेकिन व्यापारिक संबंध तोड़ने से नुकसान केवल पाकिस्तान को ही होगा। आइए जानते हैं कि दोनों देशों के बीच कारोबार पूरी तरह खत्म हो जाने के बाद पाकिस्तान को कितना नुकसान होगा?


भारत और पाकिस्तान के बीच 2018-19 में केवल 2.56 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था जो दुनिया के साथ भारत के कुल कारोबार का मात्र 0.30 फीसदी है। आपको जानकर हैरत होगी कि दोनों देशों के बीच 2015-16 के बाद से कारोबार में कमी आ रही थी। भारत के विभिन्न व्यापारिक परिसंघों की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2003 से लेकर 2019 तक भारत और पाकिस्तान के बीच 31.23 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। 2018-19 में भारत ने पाकिस्तान को 2.06 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि भारत ने पाकिस्तान से सिर्फ 0.49 अरब डॉलर का सामान खरीदा। इस तरह पाकिस्तान भारत से आने वाले सामान पर ज्यादा निर्भर रहता है।

पाकिस्तान में क्या-क्या महंगा हुआ

भारत के साथ कारोबार बंद करने के निर्णय के दुष्परिणाम पाकिस्तान को ही झेलने होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान पर भारत की निर्भरता काफी कम है। जबकि हमारा पड़ोसी मुल्क रोजाना की जरूरतों वाली वस्तुएं भी भारत से ही मंगाता है। प्याज और टमाटर जैसी सात फीसदी आवश्यक सब्जियां भारत से मंगाई जाती हैं। पाकिस्तान तक सब्जियां न पहुंचने का असर यह है कि वहां टमाटर के दाम दो सौ रुपये प्रति किलो हो गए थे। प्लास्टिक, रबड़, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए पाकिस्तान की निर्भरता भारत पर है। इनकी आपूर्ति में कमी आने और मांग में बढ़ोतरी के कारण पाकिस्तान में महंगाई बढ़ने के आसार तेज हो रहे हैं।


निर्यात में भारत के रासायन और कपड़ा उद्योग पर थोड़ा प्रभाव जरूर पड़ सकता है, क्योंकि हम दुनिया को जितना कपड़ा बेचते हैं, उसका 33 फीसदी पाकिस्तान खरीदता है। वहीं रासायनिक क्षेत्र में भी 37 फीसदी उत्पाद पाकिस्तान में ही भेजे जाते हैं। लेकिन ये भारत के लिए चिंता का विषय नहीं होगा। वैश्विक बाजार में भारत की साख और घरेलू बाजार बड़ा होने से यह माल कहीं और भी खपाया जा सकता है।

हालात तनावपूर्ण

इस साल फरवरी में पुलवामा आतंकी हमले के बाद से ही दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण है। आतंकी हमले के बाद भारत ने आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान की कमर तोड़ने के लिए पाकिस्तान से निर्यात काफी कमकर दिया था। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (Federation of Indian Export Organisations) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि व्यापार संबंधों का निलंबन पाकिस्तान को और बुरी तरह से प्रभावित करेगा। क्योंकि भारत पाकिस्तान पर कम निर्भर है।

वहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) के प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी बताते हैं कि पाकिस्तान के फैसले का असर उसके कारोबार पर ही पड़ने वाला है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण है। भारत ने पड़ोसी देश पाकिस्तान से आयातित सभी सामानों पर 200 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाया हुआ है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मार्च में पाकिस्तान का आयात 92 प्रतिशत घटकर लगभग 24 लाख डॉलर रह गया थो, जो मार्च 2018 में 3.4 करोड़ डॉलर था। भारत ने पाकिस्तान से कपास, ताजे फल, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद और खनिज अयस्क जैसे सामानों का आयात किया।

वित्त वर्ष 2018-19 की जनवरी-मार्च अवधि के दौरान पाकिस्तान से आयात 47 प्रतिशत घटकर 5.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। पाकिस्तान में भारत का निर्यात भी मार्च में लगभग 32 प्रतिशत घटकर 17 करोड़ अमेरिकी डॉलर के आसपास रहा था। हालांकि, 2018-19 के दौरान निर्यात 7.4 प्रतिशत बढ़ा।

दोनों मुल्कों के बीच हुए कारोबार की स्थिति

पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापार रोककर अपना ही नुकसान कर लिया है। असल में पाकिस्तान में कपड़ा और दवा उद्योग तो मजबूत है, लेकिन उसके लिए कच्चा माल भारत से जाता है।

कच्चा माल जाता है पाक

कपास और ऑर्गेनिक केमिकल या कार्बनिक रसायन कपड़े और दवा के लिए प्रमुख कच्चे माल होते हैं। अगर इन उत्पादों का भारत से निर्यात बंद हुआ तो इससे खुद पाकिस्तान के कपड़ा और फार्मा उद्योग को भारी नुकसान हो सकता है।

पाक से छीना था मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा

दोनों देशों के बीच जब तनाव बढ़ता है तो इसका सबसे पहला असर आपसी व्यापार पर ही पड़ता है। इसी साल 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबार निचले स्तर पर आ गया था। भारत ने हमले के बाद पाकिस्तान से आने वाली चीजों पर 200 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगा दी थी। इस साल की शुरुआत में भारत ने पाकिस्तान को दिया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले लिया था और कई वस्तुओं पर भारी कर लगा दिए थे। 

क्या होता है एमएनएफ

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौता (गैट) के सिद्धांतों के अनुसार, जिसका भारत एक हस्ताक्षकर्ता/अनुबंध वाला सदस्य है, हर डब्ल्यूटीओ सदस्य देशों को अपने सभी दूसरे सदस्यों को मोस्ट फेवर्ड ट्रेडिंग पार्टनर के तौर पर समान व्यवहार करना चाहिए।

डब्ल्यूटीओ कहता है, किसी को विशेष फेवर देना चाहिए (जैसे कि कस्टम ड्यूटी रेट को कम करना) और आपको ऐसा ही दूसरे डब्ल्यूटीओ सदस्यों के साथ करना होगा। एमएनएफ (फेवर्ड नेशन का दर्जा) किसी को ऐसा दर्जा है जिसमें किसी भेदभाव के उन्हें व्यापारिक सुविधाएं दी जाती हैं।

कब मिला था एमएनएफ का स्टेटस

भारत एक जनवरी 1995 को डब्ल्यूटीओ का सदस्य बना था। एक साल बाद डब्ल्यूटीओ के सदस्य के तौर पर 1996 में भारत सरकार ने पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया था। लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया। 2015 में पाकिस्तान की व्यापार नीति की समीक्षा पर आई डब्ल्यूटीओ की रिपोर्ट के अनुसार, 'पाकिस्तान भारत को गैर-भेदभावपूर्ण बाजार (एमएनएफ के समान) पहुंच प्रदान करने की प्रक्रिया में है।'

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में और आएगी गिरावट 

भारत के साथ कारोबारी रिश्ते खत्म करने के बाद पाकिस्तान में महंगाई काफी बढ़ गई है। मुल्क की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से परेशान पाकिस्तान की इमरान सरकार की मुश्किलें भी लगातार बढ़ रही हैं। एक डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया वैसे ही 160 रुपए तक गिर चुका है। पिछले दिनों विश्व बैंक ने कहा था कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की हालत अभी और बिगड़ेगी और वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान उसकी जीडीपी में बढ़त दर गिरकर 2.7 फीसदी ही रह जाएगी।

विश्व बैंक ने यह भी चेताया है कि वित्त वर्ष 2020 में महंगाई बढ़कर 13.5 फीसदी तक पहुंच सकती है। साल 2017-18 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 5.8 फीसदी की बढ़त हुई थी जो कि पिछले 11 साल का शीर्ष स्तर था। विश्व बैंक के अनुसार इसके बाद के दो वर्षों में पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में गिरावट आएगी। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक विश्व बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 में पाकिस्तान की जीडीपी में बढ़त महज 3.4 फीसदी रहेगी और सरकार द्वारा वित्तीय और मौद्रिक नीतियों में सख्ती बरते जाने की वजह से इसके अगले वित्त वर्ष यानी 2019-20 में ग्रोथ रेट महज 2.7 फीसदी रह जाएगी।

पाकिस्तान से यह सामान आयात करता है भारत

ताजे फल, सीमेंट, खनिज और अयस्क, तैयार चमड़ा, प्रसंस्कृत खाद्य, अकार्बनिक रसायन, कच्चा कपास, मसाले, ऊन, रबड़ उत्पाद, अल्कोहल पेय, चिकित्सा उपकरण, समुद्री सामान, प्लास्टिक, डाई और खेल का सामान निर्यात करता था, जबकि भारत से निर्यात किए जाने वाले जिंसों में जैविक रसायन, कपास, प्लास्टिक उत्पाद, अनाज, चीनी, कॉफी, चाय, लौह और स्टील के सामान, दवा और तांबा आदि शामिल हैं।

राजनयिक संबंध में कब-कब तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध को लेकर पहले कई बार तनाव देखने को मिला है। अक्सर ये तनाव आतंकी घटनाओं के बाद बड़ा है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब भारत के आंतरिक मामले को लेकर पाकिस्तान इतना बेचैन है।

  • दिसंबर 2001: भारतीय संसद पर हमला हुआ। हमले के एक हफ्ते बाद भारत ने पाकिस्तान से अपना उच्चायुक्त वापस बुला लिया। 
  • मार्च 2018: इस्लाबाद में भारतीय राजनयिक और नई दिल्ली में पाकिस्तानी राजनयिकों से कथित बदसलूकी हुई। इसके बाद दोनों देशों ने अपने उच्चायुक्तों को बुला लिया।
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