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चिंताजनक: सात राज्यों के भूजल में मानक से अधिक जहरीले तत्व, आयरन की सबसे गंभीर स्थिति यूपी में

Tue, 23 Jun 2026 06:24 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 23 Jun 2026 06:24 AM IST
सार

देश के कई राज्यों में भूजल संकट गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। कई राज्यों के भूजल में लवणता, फ्लोराइड, यूरेनियम, नाइट्रेट, आयरन व आर्सेनिक जैसे हानिकारक तत्व तय सीमा से अधिक पाए गए हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित हैं। विस्तार से पढ़िए रिपोर्ट-

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toxic elements in groundwater seven states iron contamination worst in uttar pradesh
भूजल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई

विस्तार

देश में संकट भूजल गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। जहां एक ओर भूजल स्तर घट रहा है, वहीं देश के अनेक हिस्सों के भूजल में लवणता, फ्लोराइड, यूरेनियम, नाइट्रेट, आयरन और आर्सेनिक जैसे प्रदूषक निर्धारित मानकों से अधिक मात्रा में पाए गए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में, जहां ये सभी छह प्रदूषक सामान्य मानक से अधिक दर्ज किए गए हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या भविष्य में बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। भूजल के अंधाधुंध दोहन, रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के रिसाव तथा प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं के कारण कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार नाइट्रेट सबसे व्यापक प्रदूषक बन चुका है। 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 409 जिलों में इसका स्तर सीमा से ऊपर पहुंच गया है। इससे यूपी के 44 जिले प्रभावित हैं। कृषि में नाइट्रोजन उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग, सीवेज रिसाव इसके प्रमुख कारण हैं।
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187 जिलों के भूजल में फ्लोराइड की अधिकता
25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 187 जिलों में दर्ज की गई है। राजस्थान इस मामले में सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 25 जिले सुरक्षित सीमा से ऊपर हैं। फ्लोराइड की अधिकता दंत फ्लोरोसिस' और कंकाल फ्लोरोसिस जैसी बीमारियों का कारण बनती है।
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राजस्थान और गुजरात में लवणता की सबसे बड़ी मार 
भूजल में लवणता की समस्या 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 165 जिलों में दर्ज की गई है। गुजरात में 22 जिले और राजस्थान में 21 जिले इस समस्या से प्रभावित हैं। लवणता बढ़ने से पानी पीने योग्य नहीं रह जाता और कृषि उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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पंजाब-हरियाणा में यूरेनियम की चिंता 
यूरेनियम का स्तर 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 79 जिलों में सामान्य मानक से अधिक पाया गया है। पंजाब इस मामले में सबसे ऊपर है, जहां 23 जिले प्रभावित हैं। हरियाणा में 17 जिले प्रभावित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई क्षेत्रों में यूरेनियम की उपस्थिति प्राकृतिक भूगर्भीय कारणों से होती है, लेकिन लंबे समय तक इसके संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।

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आयरन की सबसे गंभीर स्थिति यूपी में 
रिपोर्ट के अनुसार, 21 राज्यों के 196 जिलों में आयरन का स्तर सामान्य सीमा से अधिक है। यूपी में सबसे अधिक 49 जिले प्रभावित हैं। इससे पानी का स्वाद, रंग और गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। 

आर्सेनिक का खतरा भी बरकरार 
आर्सेनिक 11 राज्यों के 60 जिलों में सामान्य से ऊपर पाया गया है। बिहार में सबसे अधिक 16 जिले प्रभावित हैं। इसके लंबे समय तक सेवन से त्वचा रोग, हृदय रोग और विभिन्न प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
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