फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Touching appeal of landslide victims dont bother by taking out the dead body

Maharashtra: भूस्खलन पीड़ितों की मार्मिक अपील, मलबे में फंसे लोगों को वहीं रहने दें; शव निकालकर कष्ट न दें

Tue, 25 Jul 2023 01:17 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 25 Jul 2023 01:17 AM IST
सार

कमलू का कहना है कि मैं केवल कल्पना कर सकता हूं कि मेरे परिवार के पांच सदस्यों के साथ क्या हुआ होगा, जिन्हें बचाया नहीं जा सका। मुझे हमेशा अपने पोते-पोतियों, बेटे-बहू और पत्नी की याद आती है। उनका चेहरा मेरे सामने घूमता है। लेकिन मैं असहाय हूं, क्या कर सकता हूं।

विज्ञापन
Touching appeal of landslide victims dont bother by taking out the dead body
रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी गांव में भूस्खलन के बाद खोज और बचाव अभियान जारी। - फोटो : PTI

विस्तार

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी में 19 जुलाई को भीषण भूस्खलन हुआ था। हााहरदसे में कई लोगों की मौत हो गई। भूस्खलन में अपने दो पोते-पोतियों सहित परिवार के पांच सदस्यों को खोने वाले एक बुजुर्ग का कहना है कि जो मलबे में दब गया है, उसे वहीं आराम करने दिया जाए। 

विज्ञापन

नौ में से चार सदस्यों की बची जान
इरशालवाड़ी के रहने वाले कमलू पारधी (65) ने बताया कि वह होम स्टे का काम करते हैं। पहाड़ी पर आने वाले ट्रैकर्स और पर्यटकों को वह किराये से कमरा दिया करते थे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के नौ लोग भूस्खलन में फंस गए थे और वहीं दबे रह गए। स्थानीय लोगों के साथ मिलकर रेस्क्यू टीम ने चारों शवों को बाहर निकाला। कमलू की पत्नी, बेटा, बहू और दो पोते-पोतियां वहीं दबे रह गए। कमलू का कहना है कि शव अबतक सड़ चुके होंगे। इसलिए बेहतर है कि वे वहीं मलबे में पड़े रहें। वहीं आराम करें। मैं नहीं चाहता कि उनके शव को क्षत-विक्षत हालत में बाहर निकाला जाए और उन्हें कष्ट दिया जाए। 

विज्ञापन

इसलिए शव को नहीं निकाला जा रहा है बाहर
कमलू का कहना है कि मैं केवल कल्पना कर सकता हूं कि मेरे परिवार के पांच सदस्यों के साथ क्या हुआ होगा, जिन्हें बचाया नहीं जा सका। मुझे हमेशा अपने पोते-पोतियों, बेटे-बहू और पत्नी की याद आती है। उनका चेहरा मेरे सामने घूमता है। लेकिन मैं असहाय हूं, क्या कर सकता हूं। मैंने उनके लिए ढेर सारे सपने देखे थे लेकिन अब क्या ही करूं। कमलू ने बताया कि उनका छोटा बेटा काशीनाथ स्नातक उत्तीर्ण था। वह ग्राम पंचायत सदस्य के रूप में काम करता था। कोविड-19 में मेरे बेटे ने गांव के लोगों की खूब मदद की थी। मुझे लग रहा था कि जैसे बचाव दल ने मेरे परिवार के चार सदस्यों की जान बचाई, वैसे ही वे सभी सदस्यों को बाहर निकाल लेंगे। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। मलबा 20 फीट ऊंचा था। कई लोगं के शव क्षत-विक्षत थे, जिस वजह से बचाव दल को शव बाहर निकाल देने के लिए मना कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

144 लोगों को मंदिर के पास ठहराया
भूस्खलन की जानकारी देते हुए राज्य मंत्री उदय सामंत ने रविवार को बताया था कि हादसे में 57 लोग लापता हैं। वहीं, इरशालवाड़ी में रहने वाले 228 लोगों में से 144 लोगों को पास के एक मंदिर में भेज दिया गया था। हालांकि, बचाव दल ने रविवार तक 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। लेकिन शव के सड़ जाने की आशंका के कारण लोगों ने और लोगों के शवों को बाहर निकालने से मना कर दिया था, जिस वजह से आगे रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चलाया जा सका।





 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed