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ट्रंप-किम की मुलाकात से कांग्रेस की जीत तक, पूरे साल सियासी गलियारों में छाए ये मुद्दे

Sat, 22 Dec 2018 04:16 PM IST
Shani Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shani Mishra Updated Sat, 22 Dec 2018 04:16 PM IST
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top political incidents of year 2018 rafale trump congress nirav srilanka pakistan imran khan
politics 2018 - फोटो : self
साल 2018 कई मायनों में खास रहा। वैश्विक और भारतीय राजनीति के क्षेत्र में घटी कुछ घटनाओं ने सुर्खियां बटोरीं तो कुछ घटनाएं भविष्य की दिशा तय करने वाली रहीं। आइए एक नजर ऐसी ही दुनिया की 10 बड़ी राजनीतिक घटनाओं पर-
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सिंगापुर में हुई सबसे बड़ी मुलाकात 

12 जून 2018 को सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप के कैपेला रिजॉर्ट में भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े छह बजे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष किम जोंग उन की मुलाकात हुई। दोनों देशों ने एतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य अभ्यास रोकने और कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने का वादा किया। अमेरिका ने हथियारों को नष्ट कराने के बाद उसकी जांच कराने का एलान किया। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह साफ कहा कि शर्तों के पूरा होने तक उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध जारी रहेंगे। 
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तीसरी बार भी कार्यकाल पूरा नहीं कर सके नवाज

आम चुनावों से पहले चंद हफ्ते पहले 6 जुलाई को पनामा पेपर्स के तीन मामलों में से एक में एहतियाब अदालत ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को 80 लाख पाउंड के साथ दस साल कैद-ए-बामुशक्कत की सजा सुनाई। नवाज के अलावा एहतिसाब अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद बशीर ने शरीफ के दामाद कैप्टन (सेवानिवृत) मोहम्मद सफदर को एक साल की और बेटी मरयम को  20 लाख पाउंड का जुर्माने के साथ सात साल की कैद की सजा सुनाई गई। 
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बता दें कि लंदन में पॉश एवेनफील्ड हाउस में चार फ्लैटों के स्वामित्व से जुड़े एवेनफील्ड भ्रष्टाचार मामले में चार बार स्थगित करने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया था।

पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम बने इमरान 

जुलाई में हुए आम चुनावों में 116 सीटों के साथ पीटीआई सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। बाद में नौ निर्दलीय उम्मीदवारों के खान की पार्टी में शामिल होने से उनकी संख्या बल बढ़कर 125 हो गई। इसके अलावा संसद में महिलाओं के लिए आरक्षित 60 सीटों में 28 सीटें, और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित 10 में से पांच सीटें मिलने के बाद पीटीआई के सदस्यों की संख्या बढ़कर 158 हो गई और इमरान खान पकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बने। 

भारत सरकार ने गुरुनानक जयंती से एक दिन पहले 22 नवंबर को ऐतिहासिक करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की, जिसके बाद पाकिस्तान ने भी इसके लिए हामी भरी। पाकिस्तान स्थित करतारपुर कॉरीडोर को भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए खोलने के लिए पाकिस्तान राजी हुआ।
 

श्रीलंका में चला 51 दिनों का सियासी ड्रामा

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विक्रमसिंघे
श्रीलंका में राजनीतिक संकट तब गहरा गया जब 26 अक्टूबर को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने यूएनपी नेता और प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को बर्खास्त करके पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। इसके बाद श्रीलंका की संसद के स्पीकर कारु जयसूर्या ने रानिल विक्रमसिंघे को देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मान्यता दे दी। 

विक्रमसिंघे ने बहुमत साबित करने के लिए संसद का सत्र बुलाया तो राष्ट्रपति ने 16 नवंबर तक संसद को स्थगित दी। बर्खास्तगी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और 51 दिन की लंबी लड़ाई के बाद रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री के पद पर वापसी हुई। साल 2015 में विक्रमसिंघे की राजनीतिक पार्टी यूएनपी ने सिरिसेना की पार्टी यूपीएफए के साथ मिलकर वर्ष 2015 में सरकार बनाई थी।

लंबी लड़ाई के बाद मालदीव में हुआ सत्ता परिवर्तन

मालदीव में इस साल फरवरी में उस वक्त राजनीतिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने आपातकाल की घोषणा कर दी और महाभियोग की तैयारियों में लगे सांसदों, विपक्षी नेताओं को जेल में डलवा दिया। विपक्ष की अगुवाई में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए।

सितंबर में मालदीव में चुनाव हुए और मालदिवियन डेमोक्रैटिक पार्टी के उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को जीत मिली। सोलिह भारत समर्थक माने जाते हैं, जबकि उनके पूर्ववर्ती अब्दुल्ला यामीन चीन समर्थन माने जाते रहे हैं। 

मध्यावधि चुनाव में जनता ने ट्रंप को नकारा 

मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा यानी कांग्रेस के लोअर चेंबर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर कब्जा कर लिया। अमेरिकी कांग्रेस में प्रतिनिधि सभा की कुल 435 सीटों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने 245 के करीब सीटें जीती। हालांकि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बरकरार है। रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट में कुल 100 सीटों में से 51 के बजाए अब 54 सीटें मिल गई हैं। इस साल आठ वर्षों के बाद 435 सदस्यों के सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी ने फिर से बहुमत हासिल किया। माना जा रहा है कि 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच बीच कांटे का मुकाबला होगा।
 

 

राफेल बना सियासत का केंद्र 

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Rafale Politics

साल 2015 में भारत और फ्रांस के बीच इस विमान की खरीद को लेकर समझौता किया। दोनों देश विमानों की आपूर्ति की शर्तों के लिए अंतर-सरकारी समझौता करने को सहमत हुए। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए 126 विमानों के लिए 54,000 करोड़ रुपये दे रही थी, जबकि मोदी सरकार सिर्फ 36 विमानों के लिए 58,000 करोड़ दे रही है।एक प्लेन की कीमत 1555 करोड़ रुपये हैं, जबकि कांग्रेस 428 करोड़ में रुपये में खरीद रही थी।

कांग्रेस के मुताबिक यूपीए के सौदे में विमानों के भारत में एसेंबलिंग में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड को शामिल करने की बात थी। लेकिन एनडीए के सौदे में एक निजी कंपनी को सौंपने की बात है। कांग्रेस का आरोप है कि सौदे से एचएएल को 25000 करोड़ रुपये का घाटा होगा। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस डील की जांच करवाने से इंकार कर दिया। वहीं विपक्ष अभी भी राफेल डील पर संसद की संयुक्त समिति से जांच पर अड़ा है।

कर्नाटक में सरकार को लेकर हुआ 'नाटक' 

राज्य की 222 विधानसभा सीटों के लिए 12 मई को मतदान हुआ। इसका परिणाम 15 मई को घोषित किया गया जिसमें बीजेपी को 104 सीटें हासिल हुई थीं। वहीं कांग्रेस को 78 सीटों पर जीत हासिल हुई। जनता दल (सेक्युलर) भी राज्य में 37 सीटें जीतने में कामयाब रही। सरकार बनाने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच लंबी खींचतान चली।

राज्यपाल ने बीजेपी के येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया तो कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। बाद में कोर्ट के आदेश के बाद येदियुरप्पा सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए और जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस के समर्थन से राज्य में सरकार बना ली। 

सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण

स्टैच्यू ऑफ युनिटी का साल सरदार के जन्मदिन पर अनावरण किया गया। यह मूर्ति 182 मीटर ऊंची है। फिलहाल यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। लौह पुरुष की मूर्ति के निर्माण में लाखों टन लोहा और तांबा लगा है और कुछ लोहा लोगों से मांगकर लगाया है।

इस मूर्ति को बनाने के लिए लोहा पूरे भारत के गांव में रहने वाले किसानों से खेती के काम में आने वाले पुराने और बेकार हो चुके औजारों का संग्रह करके जुटाया गया। इसके लिए एक ट्रस्ट भी बना सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट। इसकी नींव 2013 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। इसके खर्च के लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए।

राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस की पहली बड़ी कामयाबी

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस भाजपा के लंबे का अंत करने में कामयाब रही तो वहीं राजस्थान में पार्टी ने पांच साल बाद सत्ता में वापसी की। तीनों राज्यों में कांग्रेस सत्ता में आने में कामयाब रही। चुनावी वादे के मुताबिक मध्य प्रदेश में सरकार बनने के चंद घंटों में ही किसानों के दो लाख कर्जमाफ किए गए। बाकी दो राज्यों में भी बाद में कर्ज माफी का फैसला लिया गया। 
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