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Hindi News ›   Punjab ›   To save BJP leader Tajinder Pal Singh Bagga from the Punjab Police, the defense will tell the controversial history of DSP KS Sandhu to the court

बग्गा का बड़ा दांव: पंजाब पुलिस के डीएसपी केएस संधू का विवादित इतिहास कोर्ट को बताएगा बचाव पक्ष

Tue, 10 May 2022 05:26 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 10 May 2022 05:26 PM IST
सार

सिरसा ने अमर उजाला को बताया कि केएस संधू ने एक व्यक्ति को 38 लाख रुपये देकर अपनी बहाली कराई थी। संधू ने खुद इस बाबत चंडीगढ़ के सेक्टर 11 के पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके नाम बदलने के बारे में पुलिस रिकॉर्ड को खंगाला जा सकता है, जिससे उनका सच सामने आ जाएगा...

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To save BJP leader Tajinder Pal Singh Bagga from the Punjab Police, the defense will tell the controversial history of DSP KS Sandhu to the court
डीएसपी केएस संधू और तजिंदर पाल सिंह बग्गा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को पंजाब पुलिस के चंगुल से बचाने के लिए बचाव पक्ष उसी पुलिस अधिकारी का इस्तेमाल करेगी, जिसे बग्गा को गिरफ्तार करने के लिए भेजा गया था। बचाव पक्ष डीएसपी केएस संधू का ‘विवादित इतिहास’ कोर्ट को बताएगी, जिससे यह साबित किया जा सके कि बग्गा को फंसाने के लिए किस हद तक साजिश रची गई थी और उन्हें पंजाब ले जाकर प्रताड़ित किए जाने की क्या योजना थी। कथित तौर पर केएस संधू के तार ड्रग तस्करों से जुड़े हुए हैं। उन पर नाम बदलकर अपना पुराना इतिहास छिपाने की जालसाजी करने के गंभीर आरोप भी हैं।

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कितने गंभीर हैं आरोप

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने बग्गा को गिरफ्तार करने आये पुलिस अधिकारी केएस संधू पर छह मई की शाम कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि पंजाब पुलिस के डीएसपी केएस संधू ड्रग तस्करी के एक मामले में बर्खास्त कर दिए गए थे। उन्होंने 38 लाख रुपये की घूस देकर अपनी बहाली कराई और पदोन्नति पाई। एक बार बर्खास्त होने के बाद भी वे सब इंस्पेक्टर रैंक से डीएसपी रैंक तक पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च पद पर जाने से पहले उन्होंने अपना नाम भी बदल लिया था, ताकि वे अपने आपको बचा सकें।

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खुद दर्ज कराई थी एफआईआर

मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा पंजाब पुलिस के डीएसपी केएस संधू पर लगाए गए आरोप कितने सही हैं? इस बारे में सिरसा ने अमर उजाला को बताया कि केएस संधू ने एक व्यक्ति को 38 लाख रुपये देकर अपनी बहाली कराई थी। संधू ने खुद इस बाबत चंडीगढ़ के सेक्टर 11 के पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके नाम बदलने के बारे में पुलिस रिकॉर्ड को खंगाला जा सकता है, जिससे उनका सच सामने आ जाएगा।

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सिरसा के मुताबिक उन्हें एक ऑडियो टेप के बारे में भी पता चला है, जिसमें केएस संधू एक व्यक्ति से बात करते हुए यह बता रहे हैं कि वे जब चाहेंगे आरडीएक्स का उपयोग कर लिया जाएगा। वे जितना चाहेंगे, उतना आरडीएक्स उपलब्ध करा दिया जाएगा। इतना ही नहीं टेप में वे ये भी कह रहे हैं कि इतना विस्फोट करा दिया जाएगा कि उससे प्रधानमंत्री मोदी के होश ठिकाने लग जाएंगे। इसके एक ही दिन बाद पंजाब इंटेलिजेंस पुलिस के हेडक्वार्टर पर रॉकेट से विस्फोटक से हमला किया गया। इस मामले को देखते हुए ये आरोप बेहद गंभीर हो जाते हैं।

चूंकि आरडीएक्स प्रतिबंधित है और इसकी उपलब्धता सामान्य लोगों के पास नहीं हो सकती। इस बारे में यह जांच कराने का भी दबाव बनाया जा सकता है कि संधू किस आधार पर आरडीएक्स उपलब्ध कराने का दावा कर रहे थे। क्या उनके तार किसी ऐसे संगठन से भी जुड़े हैं, जो आतंकी गतिविधियों में लिप्त हैं? क्योंकि इस तरह के विस्फोटक आतंकियों के पास ही पाए जाते हैं।

चूंकि, पंजाब में नशे का पूरा अवैध कारोबार पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान से आने वाले ड्रग पर निर्भर करता है, लिहाजा इस कनेक्शन को भी खंगालने की तैयारी की जा रही है। संधू के तार जिस ड्रग तस्कर से जुड़े हुए बताए जाते हैं, उस पर पहले से ही पाकिस्तान के ड्रग पैडलर्स के संपर्क में होने के सबूत हैं। वह इसी मामले में सजा काट रहा है। लिहाजा ये तार अब संधू के गले की फांस भी बन सकते हैं।

वर्तमान मंत्री की पिटाई करने का भी आरोप

आरोप है कि केएस संधू ने मोहाली में रहते हुए एक नेता की पिटाई भी की थी। वे नेता इस समय भगवंत मान सरकार में एक महत्त्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे हैं। हालांकि इस समय इस नेता से संधू के बेहतर संबंध बताए जा रहे हैं। आरोप है कि उसी कनेक्शन को इस्तेमाल करते हुए केएस संधू को बग्गा मामले की जांच सौंपी गई है। सिरसा ने आरोप लगाया कि तजिंदर पाल सिंह बग्गा को गिरफ्तार करके उन्हें पंजाब की एक छिपी हुई जगह पर रखा जा सकता था, जहां उनको भयंकर तरीके से टॉर्चर किया जा सकता था। इस पूरी साजिश को संधू से ही अंजाम दिलाया जा सकता था। लिहाजा बग्गा की गिरफ्तारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इस मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए और संधू को अपने पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए।

कोर्ट में आएगी यह सारी दलील

बग्गा पर दर्ज एफआईआर निरस्त कराने की कोशिश में कोर्ट में यह सभी दलीलें रखी जा सकती हैं। इससे बग्गा के मामले में पंजाब सरकार भी संदेह के घेरे में आ सकती है, जिसका लाभ बग्गा को मिल सकता है। फिलहाल, चूंकि बग्गा पर एक नई एफआईआर दर्ज कर उन्हें दूसरे मामले में गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है, बग्गा इस समय अंडरग्राउंड हैं और अपनी रिहाई के रास्ते तलाश रहे हैं।

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