अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए सरकार ने आईएल एंड एफएस को नियंत्रण में लिया
देश के वित्तीय प्रबंधन और बाजार पर मंडराते संकट को देखते हुए सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है। दरअसल, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंशिंग और निर्माण से जुड़ी यह कंपनी हाल के दिनों में कुछ कर्ज चुकाने में डिफॉल्टर साबित हुई है जिस कारण इससे जुड़ी अन्य कंपनियों और देश के वित्तीय सेक्टर पर बड़ा खतरा मंडराने लगा था।
सरकार ने कहा है कि वह आईएल एंड एफएस बोर्ड को भंग कर इसकी जगह छह नामित सदस्यों की नियुक्ति करेगी। सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि कंपनी में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी ताकि कोई और चूक न हो तथा इसकी इंफ्रा परियोजनाओं को सुचारु रखा जा सके।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि सरकार कर्ज में फंसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी आईएल एंड एफएस के लिए यह असाधारण कदम उठाने को मजबूर है, ताकि जनहित में आगे किसी तरह के कुप्रबंधन से बचा जा सके। कंपनी के लिए पर्याप्त पूंजी की व्यवस्था की जाएगी। सरकार कंपनी की कर्ज अदायगी क्षमता सुनिश्चित करना चाहती है ताकि देश में वित्तीय स्थिरता बनी रह सके।
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आईएल एंड एफएस का संकट देश के आर्थिक विकास के लिए बड़ा खतरा बन सकता है और इससे कर्ज देने वाली देश की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफएस) प्रभावित हो सकती हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे भी बड़ी चिंता इस तरह की भारत में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) कई ऐसे म्यूचुअल फंड्स की स्थिति बिगाड़ सकती हैं, जिन्होंने इन कंपनियों में भारी निवेश किया है।
सरकार ने सोमवार को ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में आईएल एंड एफएस बोर्ड को भंग करने के लिए आवेदन किया जिसे एनसीएलटी ने मंजूरी दे दी। मंत्रालय के मुताबिक, आईएल एंड एफएस 1.15 खरब रुपये से भी अधिक की कंपनी है लेकिन अतीत में उधारी कुप्रबंधन के कारण इसका कर्ज बढ़ता गया।
बैंकों का एनपीए 150 अरब डॉलर करने में एनबीएफएस की भूमिका
पिछले दो साल में भारतीय बैंकों का डूबा कर्ज (एनपीए) बढ़ाने में इस तरह की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है। यही वजह है कि बैंकों पर लगभग 10,500 अरब रुपये का एनपीए हो गया है। आईएल एंड एफएस के कई बार डिफॉल्टर होने से इसकी और सहायक कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग भी गिरती गई। इन कंपनियों पर अब तक 910 अरब रुपये का कर्ज बढ़ चुका है।
निजी कंपनियों पर नियंत्रण के अन्य मामले
सरकार किसी निजी कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में शायद ही लेती है। इससे पहले 2017 में सरकार ने रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक लिमिटेड का नियंत्रण लेने का प्रयास किया था जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। अकाउंटिंग घोटाले के कारण 2009 में सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज पर सरकार ने नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था।
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8 अक्टूबर को पहली बैठक
एनसीएलटी ने नए बोर्ड सदस्यों को आम सहमति से अध्यक्ष चुनने की छूट दी है। नए बोर्ड को 8 अक्टूबर को पहली बैठक करने का निर्देश दिया है। नया बोर्ड 31 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर अपने निष्कर्ष और समाधान की रूपरेखा पेश करेगा। साथ ही कंपनी को 15 अक्टूबर तक केंद्र की ओर से उठाए सवालों का जवाब देने का निर्देश भी दिया।
ये होंगे बोर्ड के नए सदस्य
एनसीएलटी के फैसले के बाद अब सरकार कोटक महिंद्रा बैंक के उदय कोटक, सेवानिवृत्त आईएएस अफसर विनीत नय्यर, सेबी के पूर्व अध्यक्ष जीएन बाजपयी, आईसीआईसीआई के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष जीसी चतुर्वेदी, आईएएस अधिकारी मालिनी शंकर और कैग के वरिष्ठ नौकरशाह नंद किशोर को कंपनी के निदेशक बोर्ड में नियुक्त करेगी।