हेरिटेज टूरिजम को बढ़ावा देने के लिए इन पांच लाइनों को संरक्षित करेगा रेल मंत्रालय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बनाई गई पांच लाइनों को भारतीय रेलवे संरक्षित करेगा। यह कदम मंत्रालय ने हेरिटेज टूरिजम को बढ़वा देने के लिए उठाया है। इन पांच लाइनों में से चार अभी भी चालू स्थिति में हैं जबकि असम में स्थित पांचवीं लाइन बंद है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी के मुताबिक वह हेरिटेज स्ट्रक्टर को बढ़ावा देने के लिए मीटरगेज ट्रैकों को संरक्षित करने पर जोर दे रहे हैं। बता दें रेलवे का यह प्रोजेक्ट दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे से प्रेरित है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला 3 फरवरी को हुई मीटिंग में लिया गया था। जिसके बाद अधिकारियों को ऐसी लाइनों की पहचान करने को कहा गया जिससे टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सके और जो ज्यादा से ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती हों। जिसके बाद इन पांच लाइनों की पहचान की गई। उनके मुताबिक भारतीय रेलवे की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए इन लाइनों को संरक्षित करना आवश्यक है।
यह हैं पांच लाइनें
-मऊ-पातालपानी-कालाकांडी (मध्यप्रदेश)- 16 किमी।
-विसावदर-तलाला (गुजरात)- 42.27 किमी।
-मावली जंक्शन-मारवाड़ जंक्शन (राजस्थान)- 162 किमी।
-नानपुर-मिलानी (उत्तर प्रदेश)- 171 किमी।
-माहुर-हरांगजाओ (असम)- 47 किमी।
ये हैं इन लीइनों की खासियत
इनमें से चार लाइनें अभी चालू हैं जबकि असम स्थित पांचवीं लाइन का परिचालन अभी बंद है। अधिकारी ने बताया कि रेल मंत्रालय ने इन लाइनों की परिचालन व्यवहारिकता के बारे में जानने कि लिए जोनल रेलवे से जानकारी मांगी है। जैसे ही अप्रैल के तीसरे हफ्ते तक जोनल रेलवे की ओर से जवाब आएगा वैसे ही मंत्रालय इस योजना को लॉन्च करेगा।
लाइनों के बारे में जानकारी देते हुए रेलवे अधिकारी ने बताया कि गुजरात स्थित विसावरा-तलाला जाने वाली लाइन गुजरात के गिर जंगलों से होते हुए गुजरती है। अभी इस लाइन से एक दिन में महज तीन ट्रेनें ही गुजरती हैं। वहीं मध्यप्रदेश स्थित लाइन पहाड़ियों, घाटियों और सुरंगों से होते हुए गुजरती हैं। साथ ही यह चोलर और मीलिन्दी नदियों को भी पार करते हुए जाती है जिससे यात्रा और भी यादगार बन जाती है खासकर बारिशों के बाद।
उत्तरप्रदेश स्थित लाइन दुधवा टाइगर रिजर्व से होते हुए गुजरती है। अभी यहां तकरीबन छह ट्रेनें चलती हैं जो 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती हैं। जिसे एक्सीडेंट के खतरे के कारण 20 किमी कर दिया गया है। यह लाइन ब्रिटिश काल में 19 वीं सदी में बनाई गई थी।
अभी पहाड़ी ट्रेनों में दार्जिलिंग हिमालयन ट्रेन, नीलगिरी पहाड़ी रेलवे, कालका-शिमला रेलवे, कांगड़ा वैली रेलवे और मैथेरन हिल रेलवे पर्यटकों के लिए भारत में सबसे आकर्षित पहाड़ी ट्रेनें हैं।