नागरिकता बिल: पीएम मोदी का मास्क पहन सांसदों ने किया अनोखा प्रदर्शन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
तृणमूल कांग्रेस और एआईयूडीएफ सांसदों ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में संसद भवन परिसर में मंगलवार को धरना दिया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। उनके प्रदर्शन करने का तरीका काफी अलग था। इसका एक वीडियो भी आया है। जिसमें दिख रहा है कि एक व्यक्ति ने पीएम मोदी की तस्वीर वाला मास्क पहना हुआ है और उसके हाथों में डंडा है। वहीं कुछ लोग नीचे बैठे हुए हैं और खुद को उस डंडे से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
तृणमूल कांग्रेस और एआईयूडीएफ सांसदों ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में संसद भवन परिसर में मंगलवार को धरना दिया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। उनके प्रदर्शन करने का तरीका काफी अलग था। इसका एक वीडियो भी आया है। जिसमें दिख रहा है कि एक व्यक्ति ने पीएम मोदी की तस्वीर वाला मास्क पहना हुआ है और उसके हाथों में डंडा है। वहीं कुछ लोग नीचे बैठे हुए हैं और खुद को उस डंडे से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
All India Trinamool Congress (TMC) MPs protest against the Citizenship Amendment Bill, 2016 in the Parliament premises. pic.twitter.com/jlww8BjFfO
— ANI (@ANI) January 8, 2019
बता दें लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट पेश की गई थी। इसमें तृणमूल समेत कुछ दलों ने असहमति का नोट दिया था।
मंगलवार को संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले तृणमूल सांसदों एवं एआईयूडीएफ के बदरूद्दीन अजमल ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना दिया और नारेबाजी की। तृणमूल सांसदों के हाथों में पोस्टर थे जिन पर लिखा था "मुझे मेरे देश से मत निकालो, मैं भारत का नागिरक हूं।"
तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश किये जाने के खिलाफ है। इसके कारण 30 लाख लोग प्रभावित होंगे। यह लोगों के बुनियादी अधिकारों के खिलाफ है।
विधेयक के खिलाफ पूर्वोत्तर में 'बंद' शुरू
विपक्षी कांग्रेस, एआईयूडीएफ और कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) भी इस बंद को अपना समर्थन दे रहे हैं। पुलिस ने बताया कि वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर सड़कों पर टायर जलाए गए। गुवाहाटी, तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जिलों में वाहनों को क्षति पहुंचाई गई। रेलवे के सूत्रों ने बताया कि गुवाहाटी एवं डिब्रूगढ़ जिले में पटरियों को भी कुछ देर के लिए जाम किया गया हालांकि जीआरपी के प्रदर्शनकारियों को पटरियों पर से हटाने के बाद दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों की आवाजाही बहाल हो गई।
बहरहाल बंद से ट्रेन और विमान सेवाएं अप्रभावित रहीं।
पुलिस और आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ब्रह्मपुत्र घाटी में दुकानें, बाजार, वित्तीय संस्थान, शिक्षण संस्थान, निजी कार्यालय बंद रहे और लंबी दूरी तक जाने वाली बसों सहित निजी वाहन सड़कों से नदारद रहे। सूत्रों ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन के आभाव में सरकारी कार्यालयों में भी कर्मचारी कम संख्या में पहुंचे। असम राज्य परिवहन निगम की कुछ बसें भी बेहद कम संख्या में सड़कों पर उतरी।
श्रेत्र के कई छात्र संगठनों ने पूर्वात्तर छात्र संगठन (एनईएसओ) द्वारा बुलाए बंद का समर्थन करने का निर्णय किया था। 30 जातीय संगठन भी असम में बंद का समर्थन कर रहे हैं। इस बंद को देखते हुए राज्य भर में सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं। असम के पुलिस महानिदेशक कुलाधर सैकिया ने बताया, “जिला पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को शांति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उचित बलों की तैनाती की गई है। सभी स्थानों पर गश्त भी बढ़ा दी गई है।
बंगाली बहुल बराक घाटी में चार जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए उस भाषण के विरोध में बंद आहूत किया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 जल्द से जल्द संसद में पारित कराया जाएगा।