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पश्चिम बंगाल: टीएमसी ने प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चुनाव आयोग पर साधा निशाना, कहा- यह घबराहट की राजनीति
Mon, 16 Mar 2026 04:27 PM IST
Nirmal Kant
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: Nirmal Kant
Updated Mon, 16 Mar 2026 04:27 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में बड़े प्रशासनिक फेरबदल को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। पार्टी ने इसे घबराहट में उठाया गया कदम बताया, जबकि भाजपा और माकपा ने इस कदम की सराहना की है। पढ़िए रिपोर्ट-
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कुणाल घोष, प्रवक्ता, तृणमूल कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सोमवार को एक बार फिर चुनाव आयोग (ईसीआई) पर निशाना साधा। उन्होंने आयोग की ओर से पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादले को 'घबराहट में उठाया गया कदम' बताया। वहीं, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने इस फेरबदल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा, पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को हटा दिया। आयोग ने कहा कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव से जुड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। चुनाव आयोग के अनुसार, यह फैसला राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया है।
टीएमसी ने क्या आरोप लगाया?
टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और इसे पिछले दरवाजे की राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भाजपा पश्चिम बंगाल की जनता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच रिश्ते को कमजोर करने में असफल होगी। उन्होंने कहा, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राज्यपाल या वरिष्ठ अधिकारियों को बदल सकती है। लेकिन उसके पास पश्चिम बंगाल के मतदाताओं की सोच बदलने की ताकत नहीं है। घोष ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग को अपने अंग की तरह इस्तेमाल कर रही है और जल्दबाजी में शीर्ष अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिनमें राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी शामिल हैं।
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उन्होंने कहा, आप जिसे चाहें बदल दीजिए, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नहीं बदल पाएंगे। वह भारत की शेरनी हैं और जितना विपक्ष उन्हें निशाना बनाएगा, पार्टी उतनी ही मजबूत होकर उभरेगी। घोष ने कहा कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्य सचिव को मनमाने और अलोकतांत्रिक तरीके से हटाया। टीएमसी प्रवक्ता ने केंद्र पर यह भी आरोप लगाया कि उसने राज्य के 1.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया रोक रखा है। इसमें मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के फंड शामिल हैं। उन्होंने कहा कि फंड रोके जाने के बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से लोगों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ देना जारी रखे हुए है।
ये भी पढ़ें: चुनाव कार्यक्रम पर प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल, कहा- क्या BJP की सुविधा देखकर तय हुई मतदान की तारीख?
भाजपा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, मुझे खुशी है कि चुनाव आयोग ने उन अधिकारियों को वापस जिम्मेदारी दी है, जिन्हें ममता बनर्जी सरकार ने इसलिए किनारे कर दिया था, क्योंकि उन्होंने उनकी पार्टी का रुख नहीं माना और टीएमसी की हिंसक कार्रवाइयों के खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारियों को टीएमसी शासन में महत्वहीन पदों पर रखा गया था। अब उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं और वे कानून-व्यवस्था संभालकर शांतिपूर्ण, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेंगे।
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चुनाव आयोग ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा, पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को हटा दिया। आयोग ने कहा कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव से जुड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। चुनाव आयोग के अनुसार, यह फैसला राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया है।
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टीएमसी ने क्या आरोप लगाया?
टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और इसे पिछले दरवाजे की राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भाजपा पश्चिम बंगाल की जनता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच रिश्ते को कमजोर करने में असफल होगी। उन्होंने कहा, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राज्यपाल या वरिष्ठ अधिकारियों को बदल सकती है। लेकिन उसके पास पश्चिम बंगाल के मतदाताओं की सोच बदलने की ताकत नहीं है। घोष ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग को अपने अंग की तरह इस्तेमाल कर रही है और जल्दबाजी में शीर्ष अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिनमें राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी शामिल हैं।
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उन्होंने कहा, आप जिसे चाहें बदल दीजिए, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नहीं बदल पाएंगे। वह भारत की शेरनी हैं और जितना विपक्ष उन्हें निशाना बनाएगा, पार्टी उतनी ही मजबूत होकर उभरेगी। घोष ने कहा कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्य सचिव को मनमाने और अलोकतांत्रिक तरीके से हटाया। टीएमसी प्रवक्ता ने केंद्र पर यह भी आरोप लगाया कि उसने राज्य के 1.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया रोक रखा है। इसमें मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के फंड शामिल हैं। उन्होंने कहा कि फंड रोके जाने के बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से लोगों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ देना जारी रखे हुए है।
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भाजपा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, मुझे खुशी है कि चुनाव आयोग ने उन अधिकारियों को वापस जिम्मेदारी दी है, जिन्हें ममता बनर्जी सरकार ने इसलिए किनारे कर दिया था, क्योंकि उन्होंने उनकी पार्टी का रुख नहीं माना और टीएमसी की हिंसक कार्रवाइयों के खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारियों को टीएमसी शासन में महत्वहीन पदों पर रखा गया था। अब उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं और वे कानून-व्यवस्था संभालकर शांतिपूर्ण, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेंगे।
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