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Tripura:'आदिवासियों के हितों की रक्षा जरूरी', त्रिपक्षीय समझौते की टिपरा मोथा प्रमुख ने की सराहना; यहां पढ़ें

Sun, 03 Mar 2024 07:49 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला Published by: आदर्श शर्मा Updated Sun, 03 Mar 2024 07:49 PM IST
सार

त्रिपुरा के आदिवासियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए त्रिपक्षीय समझौते की त्रिपुरा की विपक्षी पार्टी टिपरा मोथा ने सराहना की। पार्टी के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने कहा कि इससे राज्य के आदिवासी लोगों का भविष्य सुरक्षित होगा की 

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Tipra Motha chief: Implementation of tripartite pact key to securing future of Tripura's tribals
टिपरा मोथा के अध्यक्ष प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा। - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

त्रिपुरा के आदिवासियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए त्रिपक्षीय समझौते की सराहना करते हुए टिपरा मोथा के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक घटना है, इससे त्रिपुरा के आदिवासी लोगों का भविष्य सुरक्षित होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सफलता की कुंजी जमीन पर समझौते के कार्यान्वयन में निहित है।
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टिपरा मोथा ने भी किए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर 
पूर्वोत्तर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी टिपरा मोथा ने आदिवासी लोगों के समाने आने वाले मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर किए गए।
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पहले भी हो चुके कई समझौते- देबबर्मा
टिपरा मोथा के प्रमुख देबबर्मा ने कहा कि हालांकि पहले त्रिपुरा नेशनल वालंटियर्स (टीएनवी), ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ), नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) जैसे कई  समूहों के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। वे सभी ठोस नतीजें देने में असफल रहे। उन्होंने समझौते को ईमानदारी, धैर्य और मानवता के साथ लागू करने के महत्व पर जोर दिया। 
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प्रबुद्ध लोगों की समिति में आवश्यकता- देबबर्मा
प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने कहा कि हम संयुक्त कार्य समिति में शिक्षाविदों, कानून और राज्य के भूमि अधिकारों, इतिहास, संस्कृति और भाषा पर पकड़ वाले लोगों को चाहते हैं। देबबर्मा ने 75 साल पहले की तुलना में भूमि पर आदिवासी लोगों के पकड़ में गिरावट पर प्रकाश डाला और ग्रामीण निवासियों के लिए भूमि अधिकारों, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की बहाली का आग्रह किया।
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