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इतिहास रंगा है तैमूर के जुल्म की कहानियों से

Thu, 22 Dec 2016 10:13 PM IST
राजीव लोचन/ इतिहासकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
राजीव लोचन/ इतिहासकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए Updated Thu, 22 Dec 2016 10:13 PM IST
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Timur's history is painted with stories of atrocities

सैफ अली खान और करीना कपूर ने अपने बेटे का नाम तैमूर रखा तो सोशल मीडिया पर ये बड़ी बहस का विषय बन गया। कई लोगों ने इसे दोनों का व्यक्तिगत मामला कहा तो कई लोगों ने इस बात पर एतराज जताया और कहा कि एक जालिम आक्रमणकारी के नाम पर बेटे का नाम रखना गलत है।

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आखिर तैमूर ने भारत में ऐसा क्या किया था?

चगताई मंगोलों के खान, 'तैमूर लंगड़े' का एक ही सपना था। वो यह कि अपने पूर्वज चंगेज खान की तरह ही वह पूरे यूरोप और एशिया को अपने वश में कर ले। लेकिन चंगेज खान जहां पूरी दुनिया को एक ही साम्राज्य से बांधना चाहता था, तैमूर का इरादा सिर्फ लोगों पर धौंस जमाना था। साथ ही साथ उसके सैनिकों को यदि लूट का कुछ माल मिल जाए तो और भी अच्छा।
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चंगेज और तैमूर में एक बड़ा फर्क था। चंगेज के कानून में सिपाहियों को खुली लूट-पाट की मनाही थी। लेकिन तैमूर के लिए लूट और कत्लेआम मामूली बातें थीं।
साथ ही, तैमूर हमारे लिए अपनी एक जीवनी छोड़ गया, जिससे पता चलता है कि उन तीन महीनों में क्या हुआ जब तैमूर भारत में था।

विश्व विजय के चक्कर में तैमूर सन 1398 ई। में अपनी घुड़सवार सेना के साथ अफगानिस्तान पहुंचा। जब वापस जाने का समय आया तो उसने अपने सिपहसालारों से मशविरा किया।

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गलत धर्म मानते थे ये लोग, इसलिए जलाकर माल डालाः तैमूर

Timur's history is painted with stories of atrocities

हिंदुस्तान उन दिनों काफी अमीर देश माना जाता था। हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली के बारे में तैमूर ने काफी कुछ सुना था। यदि दिल्ली पर एक सफल हमला हो सके तो लूट में बहुत माल मिलने की उम्मीद थी। सिपाहसालरों ने तैमूर के इस प्रस्ताव पर ना-नुकर की। तब दिल्ली के शाह नसीरूद्दीन महमूद के पास हाथियों की एक बड़ी फौज थी, कहा जाता है कि उसके सामने कोई टिक नहीं पाता था। साथ ही साथ दिल्ली की फौज भी काफी बड़ी थी।

तैमूर ने कहा, बस थोड़े ही दिनों की बात है अगर ज्यादा मुश्किल पड़ी तो वापस आ जाएंगे। मंगोलों की फौज सिंधु नदी पार करके हिंदुस्तान में घुस आई। रास्ते में उन्होंने असपंदी नाम के गांव के पास पड़ाव डाला। यहां तैमूर ने लोगों पर दहशत फैलाने के लिए सभी को लूट लिया और सारे हिंदुओं को कत्ल का आदेश दिया। पास ही में तुगलकपुर में आग की पूजा करने वाले यजदीयों की आबादी थी। आजकल हम इन्हें पारसी कहते हैं।

तैमूर कहता है कि ये लोग एक गलत धर्म को मानते थे इसलिए उनके सारे घर जला डाले गए और जो भी पकड़ में आया उसे मार डाला गया।

फिर फौजें पानीपत की तरफ निकल पड़ीं। पंजाब के समाना कस्बे, असपंदी गांव में और हरियाणा के कैथल में हुए खून खराबे की खबर सुन पानीपत के लोग शहर छोड़ दिल्ली की तरफ भाग गए और पानीपत पहुंचकर तैमूर ने शहर को तहस-नहस करने का आदेश दे दिया। यहां भारी मात्रा में अनाज मिला, जिसे वे अपने साथ दिल्ली की तरफ ले गए। रास्ते में लोनी के किले से राजपूतों ने तैमूर को रोकने की नाकाम कोशिश की।

तैमूर ने दिल्ली के सभी हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढ कर कत्ल करने का दिया था आदेश

Timur's history is painted with stories of atrocities

अब तक तैमूर के पास कोई एक लाख हिंदू बंदी थे। दिल्ली पर चढ़ाई करने से पहले उसने इन सभी को कत्ल करने का आदेश दिया। यह भी हुक्म हुआ कि यदि कोई सिपाही बेकसूरों को कत्ल करने से हिचके तो उसे भी कत्ल कर दिया जाए। अगले दिन दिल्ली पर हमला कर नसीरूद्दीन महमूद को आसानी से हरा दिया गया। महमूद डर कर दिल्ली छोड़ जंगलों में जा छिपा।

दिल्ली में जश्न मनाते हुए मंगोलों ने कुछ औरतों को छेड़ा तो लोगों ने विरोध किया। इस पर तैमूर ने दिल्ली के सभी हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढ कर कत्ल करने का आदेश दिया। चार दिन में सारा शहर खून से रंग गया। अब तैमूर दिल्ली छोड़कर उज्बेकिस्तान की तरफ रवाना हुआ। रास्ते में मेरठ के किलेदार इलियास को हराकर तैमूर ने मेरठ में भी तकरीबन 30 हजार हिंदुओं को मारा।

यह सब करने में उसे महज तीन महीने लगे। इस बीच वह दिल्ली में केवल 15 दिन रहा।

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