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पॉक्सो एक्ट: जस्टिस इंदिरा बनर्जी बोलीं,  शिकायतों से निपटने के लिए कानून में संशोधन का वक्त आया

Sat, 09 Apr 2022 09:21 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Amit Mandal Updated Sat, 09 Apr 2022 09:21 PM IST
सार

'मानव तस्करी और बाल कल्याण पर जागरूकता बढ़ाने' के विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कई अहम सवाल उठाए।  

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Time for amendment of law to deal with complaints by third parties under POCSO Act : SC judge
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने शनिवार को कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत तीसरे पक्ष द्वारा दर्ज की गई शिकायतों से निपटने के लिए कानून में संशोधन करने का समय आ गया है। कुछ मामलों में युवाओं के संबंधियों द्वारा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। जस्टिस बनर्जी ने कहा कि पोक्सो अधिनियम के तहत कॉलेज के छात्रों से जुड़ा मामला आया था जिसमें एक की उम्र 17 साल और 11 महीने जबकि दूसरा उसी कक्षा का है जो 18 साल और एक महीने का है।

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'मानव तस्करी और बाल कल्याण पर जागरूकता बढ़ाने' के विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, क्या उम्र केवल एक संख्या है? क्या साढ़े 17 साल और 18 साल की उम्र के बीच बहुत अंतर है? मैं इसका जिक्र बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ कानूनों के संदर्भ में करती हूं जिनकी व्याख्या न्यायिक अधिकारियों ने की है। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत 18 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति बच्चा है।
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जिस तरह जघन्य अपराधों की अवधारणा लाने के लिए 2015 में किशोर न्याय अधिनियम 2000 में संशोधन किया गया था, शायद ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानून में संशोधन के बारे में सोचने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का कल्याण, उनके अधिकार और बाल शोषण क्या जटिल मुद्दे हैं, बच्चे के हित में क्या है, इसकी बहुआयामी अवधारणाएं हैं।
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उन्होंने कहा कि इसका मूल्यांकन बच्चे की पृष्ठभूमि और स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ किया जाना चाहिए। अगस्त 2016 तक कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहीं न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल मानव तस्करी का एक स्रोत, ट्रांजिट बिंदु और गंतव्य है। उन्होंने कहा कि हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के बाद मानव तस्करी अभी तीसरा सबसे बड़ा संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध है।
 

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