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महाराष्ट्र: इस पहाड़ी क्षेत्र में बाघ बन चुके हैं बड़ी मुसीबत, ले चुके हैं 13 लोगों की जान

Wed, 12 Sep 2018 11:47 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, यवतमाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, यवतमाल Updated Wed, 12 Sep 2018 11:47 AM IST
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Tigers of Maharashtra Yavatmal takes more than 13 lives but people are helpless

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में स्थित पंधरवडा में अभी तक करीब 12 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस मामले में पहली शिकार थी एक बुजुर्ग महिला। रुई के खेत में मुंह के बल उसका शव पड़ा मिला। उसके शरीर पर पंजे के कई निशान पाए गए। इसके बाद एक बुजुर्ग किसान की भी यही हालत हुई। इस पहाड़ी क्षेत्र में बीते 2 साल से दहशत फैली हुई है। अगस्त महीने में ग्रमीण हाईवे पर एक और शव बरामद किया गया। यह था 12वीं शिकार।

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सभी तरह के उपाय करने के बावजूद भी कोई असर नहीं हुआ। ये सब हो रहा है बाघों के कारण। जो इन लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। बाघ इनके मास को अपना खाना बनाते हैं। रात के समय भी आसपास के गांवों के लोग टॉर्च और डंडे लेकर पेट्रोलिंग करते हैं। इससे पहले गांव के लोग जंगल के गार्डों से मारपीट कर चुके हैं क्योंकि वह यहां होने वाली मौतों को रोक नहीं पा रहे थे।
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विशेषज्ञों का कहना है कि एक अकेला बाघ इतने सारे लोगों की हत्या नहीं कर सकता। जबकि रिपोर्टस में कहा गया है कि एक नर बाघ उस क्षेत्र में घूमता रहता है। अब वन रेंजर इस बाघों को चिड़ियाघर में भेजने के लिए मिलिट्री स्टाइल ऑपरेशन करेंगे।

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सुप्रीम कोर्ट में दायर दया याचिका

Tigers of Maharashtra Yavatmal takes more than 13 lives but people are helpless

अगर यहां मारे गए लोगों के आंकड़ों की बात करें तो अगस्त माह में ही तीन गांव वालों की मौत हो चुकी है। कई राजनेता तो रेंजर्स से ये भी मांग कर रहे हैं कि वह बाघों को सीधे गोली मार दें। जो कि भारत में गैरकानूनी है। ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है। एक बाघिन (टी1) के लिए दया याचिका वन्य जीव कार्यकर्ता अजय दुबे और सिमारात संधु ने दर्ज कराई है। कई बार तो रेंजर्स को जंगलों के पेड़ों पर बने लड़की से बने स्टैंड पर रहकर बाघों पर नजर रखने को कहा जाता है।

मामले पर वानिकी अधिकारी केएम अभरना का कहना है कि वह उस सुंदर जानवर को नहीं मारना चाहते। लेकिन उन पर राजनेताओं और आम जनता का बहुत दबाव रहता है। इस याचिका में कहा गया है कि टी 1 जैसे ही भारत के 30 फीसदी बाघ भी जिन जंगलों में रहते हैं वहां किसी को घर नहीं बनाना चाहिए। उसके पहले शिकार किसान ही थे जो जंगल की भूमि पर खेती कर रहे थे। अभी तक ये बाघिन अपने ज्यादातर शिकारों का मांस खा चुकी है। यह बाघिन घोड़े और गाय को भी इससे पहले मार चुकी है।

इस बाघिन को पकड़ने की बहुत कोशिशें की गईं लेकिन वह कभी हाथ नहीं आई और झाड़ियों के पीछे छुप जाती है। जिस किसान को बाघिन द्वारा मारा गया था उसकी बेटी का कहना है कि उसे मार देना चाहिए। उसे मारने की बहुत जरूरत है इससे पहले कि वह और लोगों की जान ले। गांव के ही एक अन्य बुजुर्ग का कहना है कि वह बचपन से ही जंगलों में घूमते थे, उस वक्त ऐसा कुछ नहीं था। अब अचानक इन बाघों के हमले बढ़ते जा रहे हैं। पहले यहां बाघ नहीं होते थे, अब पता नहीं चल रहा है कि ये आ कहां से रहे हैं। हालात ये हैं कि गांव वालों की जान पर खतरा बना हुआ है और सुप्रीम कोर्ट में दर्ज याचिका और कानून के कारण बाघों को मार पाने में लोग असमर्थ हैं।

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