फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Tiger Reserve: 72749 sq km land for tigers, government spending Rs 34000 lakh

Tiger Reserve: 72749 वर्ग किमी जमीन बाघ के नाम, खर्च हो रहे 34000 लाख रुपये, सीमा पार भी मिलती है सुरक्षा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 17 Sep 2022 03:20 PM IST
सार

Tiger Reserve: बाघ को अब कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं। अगर वह घूमता हुआ या शिकार के चक्कर में पड़ोसी देश की सीमा पार कर जाता है, तो उसे कोई हाथ नहीं लगाएगा। संबंधित देश, उसे सम्मान सहित भारत को लौटाएगा। नेपाल और भूटान के साथ यह समझौता हो गया है...

विज्ञापन
Tiger Reserve: 72749 sq km land for tigers, government spending Rs 34000 lakh
Tiger Reserve - फोटो : pixabay

विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर नामीबिया से आठ चीते भारत आ गए हैं। शनिवार को पीएम ने उन्हें मध्यप्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ दिया है। अब भारत की 'कैट फैमिली' में एक नया सदस्य 'चीता' जुड़ गया है। जंगल का राजा शेर, बाघ और तेंदुआ, अभी तक ये तीनों भारत की 'कैट फेमिली' में शामिल रहे हैं। वैसे तो देश में इस फैमिली का एक ही सदस्य यानी 'बाघ' राज करता है। देश में बाघों के लिए 72749 वर्ग किमी जमीन संरक्षित की गई है। अगर सालाना खर्च की बात करें, तो वह लगभग 34000 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। 'कैट फैमिली' की सुरक्षा को लेकर भी केंद्र सरकार बहुत सचेत रहती है। बाघ को कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं। अगर वह घूमता हुआ या शिकार के चक्कर में पड़ोसी देश विशेषकर नेपाल और भूटान की सीमा में घुस जाता है, तो उसे कोई हाथ नहीं लगा सकता। संबंधित देश, उसे सम्मान सहित वापस लौटाएगा।

विज्ञापन

इन 50 रिजर्व में चलता है 'बाघ'

देश में 50 बाघ रिजर्व बनाए गए हैं। इनमें प्रमुख तौर से बांदीपुर, कॉर्बेट, अमानगढ़, मेलघाट, पलामू, रणथंभौर, सुंदरवन, पेरियार, सरिस्का, बक्सा, नमदक, दुधवा, कालकाद मुंडनथुराई, बांधवगढ़, पन्ना, डम्पा, नमेरी, काजीरंगा, नागरहोल, पराम्बिकुलम, सहयाद्रि, अमरबद, बोर, ओरंग व कमलंग बाघ रिजर्व शामिल हैं। इन रिजर्व में कोर/क्रिटिकल बाघ पर्यावास क्षेत्र के अलावा बफर/पेरिफेरल क्षेत्र को शामिल किया जाता है। इन सभी 50 रिजर्व का कोर/क्रिटिकल बाघ पर्यावास क्षेत्र करीब 40145.30 वर्ग किलोमीटर है, जबकि बफर/पेरिफेरल क्षेत्र 32603.72 वर्ग किलोमीटर है। देश में 2020 के दौरान एशियाई शेरों की संख्या 674 रही है। 2018 में 2967 बाघ मौजूद रहे हैं। 2017 में हाथियों की संख्या 29964 रही है।

विज्ञापन

केंद्र सरकार खर्च कर रही 34000 लाख रुपये

बाघ रिजर्व परियोजना की चालू केंद्रीय प्रायोजित स्कीम के तहत गत पांच वर्ष में भारी भरकम राशि स्वीकृत की गई है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, 2015-16 में बाघ रिजर्व पर 15484.6437 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। 2016-17 में 34224.749 लाख रुपये, 2017-18 में 34003.10 लाख रुपये, 2018-19 में 32292.42 लाख रुपये, 2019-20 में 28175.56 लाख रुपये और 2020-21 में 29 जनवरी 2021 तक 17970.258 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। साल 2018 में 101 बाघ मारे गए हैं। 2019 में 96 और 2020 में 106 बाघ मारे गए थे। अगर मध्यप्रदेश की बात करें, तो वहां 39 बाघों की मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया है। महाराष्ट्र में 18, उत्तराखंड में 13 व कर्नाटक में मारे गए 18 बाघों की मौत का कारण भी प्राकृतिक रहा है। अवैध शिकार के चलते 57 बाघों की मौत हुई है। बाघों को जब्त करने के 27 मामले और अप्राकृतिक मौत के सात केस देखने को मिले हैं। संवीक्षाधीन केसों की संख्या सौ है। साल 2018 से लेकर 2020 तक 303 बाघ मारे जा चुके हैं।

 

बाघ को लेकर नेपाल और भूटान के साथ हुआ ये समझौता

बाघ को अब कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं। अगर वह घूमता हुआ या शिकार के चक्कर में पड़ोसी देश की सीमा पार कर जाता है, तो उसे कोई हाथ नहीं लगाएगा। संबंधित देश, उसे सम्मान सहित भारत को लौटाएगा। नेपाल और भूटान के साथ यह समझौता हो गया है। टाइगर के साथ हाथी, गैंडा और सफेद तेंदुआ आदि जानवर भी विशेषाधिकार के दायरे में आ गए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित 'रिजर्व' से कई बार वन्य जीव सीमा पार चले जाते हैं। पहाड़ी या नदी नाले वाले कुछ इलाकों में कंटीली फैंसिंग नहीं होती। ऐसे में बाघ और दूसरे वन्य जीव सीमा पार कर जाते हैं।

दूसरे मुल्क में आसानी से पहचाने जाते हैं अपने जीव

बॉर्डर के आसपास दूसरे देश में भी वन क्षेत्र होता है, इसलिए ज्यादातर जीव वहीं पर घूमते रहते हैं। बाघ के साथ हाथी भी सीमा पार पहुंच जाता है। गैंडा, सफेद तेंदुआ व गिद्ध कई बार सीमा रेखा का उल्लंघन कर देते हैं। ऐसे में दूसरे देश का वन्य प्राणी स्टाफ उन्हें पकड़ लेता है। भारत के अधिकांश वन्य जीवों पर विभाग का कोई न कोई चिन्ह अंकित रहता है, इसलिए उन्हें आसानी से पहचान लिया जाता है कि वे भारतीय सीमा से आए हैं। कई जगह पर कैमरे लगे होते हैं तो उनके जरिए भी मालूम हो जाता है कि फलां जानवर दूसरे देश में चला गया है। इसके बाद वहां का बॉर्डर गार्डिंग फोर्स और वन्य प्राणी विभाग से संपर्क साधा जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed