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मोदी के तीन सालः सरकार उपलब्धियों से गदगद, विपक्ष बोला किसको मिली नौकरी?
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Tue, 16 May 2017 12:13 PM IST
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पीएम नरेंद्र मोदी
- फोटो : Google Plus
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वित्तीय सुधारों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के बाद केंद्र सरकार की नजरें अब इंफ्रास्ट्रक्चर, संस्थागत और न्यायिक सुधार और नौकरियों के अवसर बनाने पर है, जिसके दम पर 2019 के चुनवों में ताल ठोक सके। इसके अलावा सरकार बिजनेस कानूनों में सुधार, श्रम कानून में आसानी और निवेश को बढ़ाने पर जोर देगी। वित्त मंत्री अरूण जेटली के अनुसार जीएसटी आने के बाद टैक्स रेट कम होगा और इस दिशा में तेजी से बढ़ा जा सकेगा।
नीति आयोग के तीन साल के ड्राफ्ट एक्शन प्लान में आगामी 3 सालों में सरकारी योजनाओं को ब्लूप्रिंट है। कई अधिकारियों ने कहा कि पुराने संस्थानों में मौजूदा जरूरतों के हिसाब बदलावों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में 19वीं सदी के हिसाब से काम नहीं हो सकता। संभव है कि इन संस्थानों में यूजीसी, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और एआईसीटीई जैसे संस्थान शामिल हो सकते हैं। हालांकि, नीति आयोग इस दिशा में पहले से ही सक्रिय है।
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नीति आयोग के तीन साल के ड्राफ्ट एक्शन प्लान में आगामी 3 सालों में सरकारी योजनाओं को ब्लूप्रिंट है। कई अधिकारियों ने कहा कि पुराने संस्थानों में मौजूदा जरूरतों के हिसाब बदलावों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में 19वीं सदी के हिसाब से काम नहीं हो सकता। संभव है कि इन संस्थानों में यूजीसी, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और एआईसीटीई जैसे संस्थान शामिल हो सकते हैं। हालांकि, नीति आयोग इस दिशा में पहले से ही सक्रिय है।
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क्या अब जाकर होगा 'सबका साथ, सबका विकास'
पीएम नरेंद्र मोदी
- फोटो : Google Plus
साथ ही न्यायपालिका में सुधार का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कहा कि तकनीक के अभाव के चलते भारत के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ रहा है। भारत आसान बिजने वाले देशों की सूची में टॉप-50 देशों में अपना नाम शामिल करवाने की जुगत में लगा है।
बता दें कि इनमें से ज्यादातर बदलाव संसद से ही होंगे। ऐसे में सरकार राज्यसभा में आंकड़ो के खेल में फंस सकती है। अधिकारियों की मानें, तो सरकार ने तटीय क्षेत्रों में नौकरियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। इसके अलावा सरकार मैनुफैक्चरिंग और टैक्सटाइल सेक्टर पर भी विशेष जोर दे रही है क्योंकि इनमें लेबर की मांग अधिक होती है, जिससे ज्यादा नौकरियों के अवसर पैदा किए जा सकें। सरकार अगले 3 सालों में अपने नारे 'सबका साथ, सबका विकास' की दिशा में तेजी से काम करेगी।
बता दें कि इनमें से ज्यादातर बदलाव संसद से ही होंगे। ऐसे में सरकार राज्यसभा में आंकड़ो के खेल में फंस सकती है। अधिकारियों की मानें, तो सरकार ने तटीय क्षेत्रों में नौकरियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। इसके अलावा सरकार मैनुफैक्चरिंग और टैक्सटाइल सेक्टर पर भी विशेष जोर दे रही है क्योंकि इनमें लेबर की मांग अधिक होती है, जिससे ज्यादा नौकरियों के अवसर पैदा किए जा सकें। सरकार अगले 3 सालों में अपने नारे 'सबका साथ, सबका विकास' की दिशा में तेजी से काम करेगी।