नोट बंदी के कारण तीन और लोगों को गंवानी पड़ी जान
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जबकि मुरादाबाद के मूंढापांडे क्षेत्र के किसान की हालत बिगड़ने पर बड़े नोट की वजह से समय से दवा न मिल पाने से मौत हो गई। इसी तरह जौनपुर में फुटकर नोटों का इंतजाम न हो पाने के चलते बीमार बालक ने दम तोड़ दिया।
नोट बंदी के चलते मंगलवार को भी आम लोगों को राहत मिलती नहीं दिखी। हजार रुपये बदलने के लिए मेरठ में तीन दिन से गोलाकुआं स्थित एसबीआई शाखा की लाइन में लग रहे रहे वृद्ध अजीज (60) की मंगलवार सुबह धक्कामुक्की के बीच हालत बिगड़ गई। वृद्ध बेहोश होकर गिरा तो बैंक के बाहर अफरातफरी मच गई। आसपास के लोग उसे अस्पताल ले जाने के बजाय तमाशबीन बने रहे। होश में आने पर वृद्ध ने खुद ही फोन कर एक रिश्तेदार को बुलाया। जब तक रिश्तेदार डॉक्टर को लेकर पहुंचा, वह दम तोड़ चुका था। वह बिहार के दरभंगा क्षेत्र के अलीनगर का निवासी है।
मेडिकल स्टोर से दवा नहीं मिली और दम तोड़ दिया
वहीं मुरादाबाद के मूंढापांडे क्षेत्र के खगड़पुर जगतपुर निवासी गुरुबचन सिंह के फेफड़ों में इंफेक्शन हो गया था। परिजन दो दिन पहले गुरुबचन को रामपुर के जिला अस्पताल ले गए और भर्ती करा दिया। लेकिन पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के कारण मेडिकल की दुकानों से दवा नहीं मिल पाई थी। इसके बाद परिजन गुरबचन को मुरादाबाद ले आए और लाजपत नगर में एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। आखिरकार सोमवार देर रात गुरुबचन सिंह की मौत हो गई।
जौनपुर के मछलीशहर कोतवाली क्षेत्र के मुस्तफाबाद में मो. ईदू का पुत्र समी (12) बुखार से पीड़ित था। बालक को मंगलवार को जिला अस्पताल से वाराणसी रेफर कर दिया गया। परिवारीजनों का कहना है कि वाराणसी ले जाने के लिए पैसों का बंदोबस्त किया जा रहा था। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। मंगलवार को ही ईदू की भतीजी की शादी थी।
वहीं, कानपुर के जाजमऊ में मंगलवार को नोट बदलवाने के दौरान बैंक में मची भगदड़ में मोहम्मद इसराइल (74) के कूल्हे की हड्डी टूट गई। जाजमऊ गज्जूपुरवा निवासी मोहम्मद अपने बेटे की तनख्वाह में मिले चार हजार के पुराने नोटों को बदलने के लिए लिए सुबह 6:30 बजे एसबीआई जाजमऊ के बाहर लाइन में लगे थे। दोपहर 12:30 बजे बैंक में अचानक भगदड़ मच गई।