Report: कोरोना महामारी के पहले साल भारत में 30 लाख बच्चे समय पूर्व जन्मे, WHO और यूनिसेफ ने जारी की रिपोर्ट
मंगलवार को जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ की संयुक्त रिपोर्ट में कहा है कि विश्व में सालाना 10 लाख से अधिक प्रीमैच्योर बच्चों की मौत हो रही है।
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कोरोना के पहले साल में 30 लाख से ज्यादा बच्चों ने समय से पहले जन्म लिया। साल 2020 में पूरी दुनिया में करीब 13.40 करोड़ बच्चों ने समय से पहले जन्म लिया है, जिन्हें प्रीमैच्योर यानी अपरिपक्व शिशु कहा जाता है।
मंगलवार को जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ की संयुक्त रिपोर्ट में कहा है कि विश्व में सालाना 10 लाख से अधिक प्रीमैच्योर बच्चों की मौत हो रही है।
साल 2020 में दुनिया के 45 फीसदी प्रीमैच्योर बच्चों का जन्म पांच देश पाकिस्तान, नाइजीरिया, चीन, इथियोपिया और भारत में हुआ है। 2020 में, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बांग्लादेश में 16 फीसदी से अधिक प्रीमैच्योर जन्म दर रही है। संख्या की बात करें तो 30.16 लाख जन्म के साथ भारत पहले स्थान पर है।
वहीं, दूसरे स्थान पर पाकिस्तान है जहां 2020 में 9.14 लाख बच्चों का जन्म हुआ है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दुनिया के किसी भी देश में बीते एक दशक के दौरान प्रीमैच्योर बच्चों की जन्म दर पर कोई असर नहीं देखा गया है।
15.2 करोड़ पिछले दशक में पैदा हुए प्रीमैच्योर बच्चे
- पैदा होने वाले प्रत्येक 10 में से एक बच्चा समय से पहले पैदा हुआ। हर 40 सेकंड में, इनमें से एक बच्चे की मृत्यु हुई।
- दुनिया के किसी भी क्षेत्र में एक दशक में प्रीमैच्योर जन्म दर में कोई बदलाव नहीं आया है।
- संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, कोविड से हर जगह महिलाओं व शिशुओं के लिए जोखिम बढ़ा रहे हैं।
यहां अपरिपक्व जन्म दर सबसे ज्यादा
बांग्लादेश 16.2 %
मलावी 14.5 %
पाकिस्तान 14.4 %
भारत 13.0 %
द. अफ्रीका 13.0 %
यहां अपरिपक्व बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा
भारत 30,16,700
पाकिस्तान 9,14,000
नाइजीरिया 7,74,100
चीन 7,52,900
इथियोपिया 4,95,900
इन श्रेणी पर गौर करते हैं डॉक्टर
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की प्रसूति रोग विभाग की डॉ. रेणुका मलिक बताती हैं कि 28 सप्ताह या उससे कम में पैदा हुए बच्चे को अत्यंत अपरिपक्व, 28 से 32 सप्ताह के बीच वालों को बहुत प्रीमैच्योर और 32 से 37 सप्ताह के बीच होने वाले शिशु को मध्यम अपरिपक्व की श्रेणी में रखा जाता है।
मां के लिए खतरे को देखते हुए कराया जाता है बच्चों का जन्म
भारतीय डॉक्टरों का मानना है कि कई बार मां के जीवन को खतरा होने की वजह से भी बच्चे का जन्म कराया जाता है। कोरोना की पहली लहर में ऐसे मामले बढ़ गए थे क्योंकि संक्रमण की वजह से मां और शिशु दोनों की जान जोखिम में थी। हालांकि, दुनिया में सबसे ज्यादा और सबसे जल्दी राष्ट्रीय कार्यक्रम भारत ने संचालित किए हैं। 2014 में देश में कुल नवजात गहन देखभाल इकाइयां (एनआईसीयू) 18 थीं लेकिन अब 700 से ज्यादा जिलों में इनकी संख्या 900 से अधिक है।
कई बच्चे नहीं देख पाते पांचवां जन्मदिन
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीरजा बताती हैं कि प्री मैच्योर बच्चों में जान का जोखिम काफी अधिक है। इनमें से कई बच्चे अपना पांचवा जन्मदिन भी नहीं देख पाते हैं। जो जीवित रह जाते हैं वह भी परेशानियों का सामना करते हैं।