Gujarat: दो पुलिस निरीक्षकों और एक सहायक उप निरीक्षक के खिलाफ मामला दर्ज, जबरन वसूली की कोशिश करने का आरोप
Gujarat: जूनागढ़ पुलिस के तीन अधिकारियों के खिलाफ जबरन वसूली की कोशिश के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने केरल के एक व्यक्ति के बैंक खाते पर रोक लगवाई और उससे पच्चीस लाख रुपये की मांग की।
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गुजरात के जूनागढ़ जिले में शुक्रवार को दो पुलिस निरीक्षकों और एक सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) के खिलाफ जबरन वसूली का मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि इन पुलिस अधिकारियों ने केरल के एक व्यक्ति से पच्चीस लाख रुपये की जबरन वसूली करने की कोशिश की। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, आंतरिक जांच में खुलासा हुआ कि तीनों आरोपियों ने जांच के बहाने करीब 335 बैंक खातों पर रोक लगा दी थी और जब एक खाताधारक ने उनसे संपर्क किया तो उनसे जबरन वसूली का प्रयास किया।
निरीक्षक एसएन गोहिल की शिकायत के आधार पर जूनागढ़ बी डिवीजन पुलिस ने पुलिस निरीक्षक तरल भट्ट, जूनगढ़ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के साइबर अपराध प्रकोष्ठ के निरीक्षक एएम गोहिल और एएसआई दीपक जानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। शिकायतकर्ता निरीक्षक गोहिल ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 167 (लोक सेवक को नुकसान पहुंचाने के इरादे से गलत दस्तावेज तैयार करना), 465 (जालसाजी), 385 (फिरौती के लिए व्यक्ति को डराना), 120बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार अधिनियम से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अधिकारी ने कहा, 'एएम गोहिल और जानी दोनों को पहले भी सेवा से निलंबित किया जा चुका है। अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।' प्राथमिकी के मुताबिक, 'केरल निवासी कार्तिक भंडारी को दिसंबर 2023 में पता चला कि उनका बैंक खाता जब्त कर लिया गया है। बैंक अधिकारियों ने उन्हें बताया कि जूनागढ़ पुलिस के साइबर अपराध प्रकोष्ठ के आदेश पर ऐसा किया गया। इसके बाद भंडारी ने जूनागढ़ पुलिस के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कुछ दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट मांगे। लेकिन तब भी समस्या हल नहीं हुई तो वह 16 जनवरी को जूनागढ़ गए और एसओजी कार्यालय में जानी और एएम गोहिल से संपर्क किया।'
इसके बाद जानी ने कथित तौर पर भंडारी को बताया कि उनके खाते को रोक दिया गया है, क्योंकि करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के बारे में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से गोपनीय जानकारी मिली है। उन्होंने पच्चीस लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। जब भंडारी ने कहा कि वह केवल तीन से चार लाख रुपये का इंतजाम कर सकते हैं, तो जानी ने कथित तौर पर कहा कि अन्य खाताधारकों ने अपने खातों से रोक को हटाने के लिए बीस लाख रुपये का भुगतान किया है और उनके वरिष्ठ अधिकारी तीन से चार लाख रुपये के लिए समझौता नहीं करेंगे। प्राथमिकी में कहा गया कि निरीक्षक एएम गोहिल ने मामले को ईडी को भेजने की धमकी दी। भंडारी ने रेंज के आईजी से संपर्क किया और खाते पर लगी रोक को हटाने के लिए उन्हें आवेदन दिया। आईजी जजड़िया ने निरीक्षक एसएन गोहिल को जांच करने को कहा।
इसके बाद जांच में पता चला कि निरीक्षक तरल भट्ट ने कई बैंक खातों की एक सूची तैयार की। उसने एएम गोहिल को संदिग्ध लेनदेन के बहाने खातों पर रोक लगाने को कहा था। प्राथमिकी में कहा गया, भट्ट के निर्देश पर एएम गोहिल और जानी ने कथित तौर पर पिछले साल अगस्त और नवंबर के बीच विभिन्न बैंकों को पत्र जारी किए और उनसे 335 बैंक खातों पर रोक लगाने को कहा। पुलिस निरीक्षक गोहिल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।