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तीन देशों के साथ लगती सीमा पर घुसपैठ रोकेगी ये टेक्नोलॉजी, खराब मौसम में भी दिखेगी घुसपैठियों की फोटो

Sat, 30 May 2020 07:03 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 30 May 2020 07:03 PM IST
सार

इस तकनीकी सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह होता है कि इसकी मदद से खराब मौसम जैसे आंधी तूफान, बरसात, धुंध व बर्फबारी में व्यक्ति, पशु-पक्षी या अन्य किसी उपकरण की तस्वीर साफ नजर आती है...

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This technology will prevent infiltration along the border with three countries, photos of intruders will be seen even in bad weather
बीएसएफ (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारत के साथ लगती तीन देशों की सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की योजना है कि नेपाल, भूटान और म्यांमार बॉर्डर के कुछ हिस्सों पर तकनीकी उपकरणों की मदद से सर्विलांस की जाए।
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संबंधित बॉर्डर गार्ड फोर्स से कहा गया है कि वह बीएसएफ को साथ लेकर संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस) का ट्रायल शुरू करे। बीएसएफ पहले ही इस तकनीकी सिस्टम को पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर लगा रही है।

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इस तकनीकी सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह होता है कि इसकी मदद से खराब मौसम जैसे आंधी तूफान, बरसात, धुंध व बर्फबारी में व्यक्ति, पशु-पक्षी या अन्य किसी उपकरण की तस्वीर साफ नजर आती है।
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मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नेपाल, भूटान और म्यांमार के साथ लगते बॉर्डर पर कई क्षेत्र अति संवेदनशील हैं। नेपाल और भूटान से लगती सीमा की चौकसी की जिम्मेदारी सशस्त्र सीमा बल को सौंपी गई है, जबकि म्यांमार बॉर्डर की सुरक्षा असम राइफल करती है।


इन दोनों देशों के साथ लगते बॉर्डर के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां नदी, नाले और पहाड़ हैं, वहां फेंसिंग भी ज्यादा कारगर साबित नहीं होती।

ऐसी जगहों के लिए ही सीआईबीएमएस लगाया जाएगा। फिलहाल बीएसएफ पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती सीमा पर करीब दो हजार किलोमीटर लंबे हिस्से में यह सिस्टम लगा रही है।

सीआईबीएमएस इजरायली तकनीक पर आधारित है। पिछले साल असम के धुबरी जिले में व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली की शुरुआत की गई है। इस सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिकली क्यूआरटी इंटरसेप्शन टेक्नोलॉजी के जरिए बॉर्डर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।

धुबरी जिले का 61 किलोमीटर लंबा सीमा क्षेत्र, जहां से ब्रह्मपुत्र नदी बांग्लादेश में प्रवेश करना आरंभ करती है, वहां बॉर्डर की सुरक्षा बहुत मुश्किल कार्य है।

ब्रह्मपुत्र एवं उसकी कई सहायक नदियों का विषम परिक्षेत्र सीमा निगरानी को एक जटिल एवं चुनौती भरा कार्य बना देता है। बरसात के मौसम में तो यह काम जोखिम से भरा रहता है। घुसपैठ करने वाले लोग बरसात का इंतजार करते रहते हैं। 

सेंसर प्रणाली और कैमरों के जरिए होती है चौकसी

सीआईबीएमएस प्रणाली में सेंसर और कमरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। बीएसएफ ने ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलीय क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश की बिना बाड़ वाली सीमाओं की प्रभावी निगरानी के लिए इसी सिस्टम की मदद ली है।

इसके तहत कैमरे व सेंसर सिस्टम हर मौसम में 24 घंटे काम करते हैं। बॉर्डर के जिस क्षेत्र में यह सिस्टम लगाया जाता है, वहां पर पूरे क्षेत्र को डाटा नेटवर्क पर आधारित संचार प्रणाली यानी ओएफसी केबल्स, डीएमआर कम्युनिकेशन, दिन और रात निगरानी करने वाले कैमरों और घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली द्वारा कवर किया गया है।



ये तकनीकी उपकरण बीएसएफ कंट्रोल रूम को हर तरह का फीडबैक प्रदान करते हैं। क्रॉस बॉर्डर और सीमा क्षेत्रों में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु दिखती है तो बीएसएफ के पास अलर्ट चला जाता है।इससे बीएसएफ की क्विक रिएक्शन टीमों को समय रहते मदद मिल जाती है।

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