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घर में ही कोरोना के इलाज का ये मॉडल अपनाना है सही या साबित होगी बड़ी गलती? क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Sat, 09 May 2020 08:09 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 09 May 2020 08:09 PM IST
सार

  • कम लक्षण वाले मरीजों को घर पर रखकर इलाज करने पर बंटे विशेषज्ञ
  • आईएमए ने किया समर्थन, कहा, सामान्य मामलों में इलाज की बहुत अधिक आवश्यकता नहीं
  • अमेरिकी या यूरोपीय देशों में है कारगर, क्योंकि वहां जनसंख्या का घनत्व काफी कम

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This model of treatment of corona is to be adopted at home or will it be a big mistake? What do you say expert
कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करता स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI (File)

विस्तार

कोरोना के मामलों में अब अस्पताल में केवल उन्हीं मरीजों को रखा जाएगा जिनकी स्थिति काफी गंभीर है। सामान्य लक्षण वाले या बिल्कुल लक्षणहीन मामलों में लोगों को अब उनके घरों में ही अलग-थलग रखा जाएगा और वहीं पर उनका इलाज किया जाएगा।
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सरकार ने यह रणनीति क्यों अपनाई? कुछ विशेषज्ञ इस रणनीति को सही तो कुछ गलत बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश में यह रणनीति अपनाना सही नहीं हो सकता है और आने वाले समय में इससे संक्रमण और तेजी से फैल सकता है।
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एम्स अस्पताल के डॉक्टर श्रीनिवास राजकुमार का कहना है कि यह सही है कि कोरोना के कम गंभीर मामलों में ज्यादा इलाज की आवश्यकता नहीं पड़ती। ऐसे लोगों को घर पर आइसोलेशन में रखकर सामान्य तरीके से इलाज किया जा सकता है।
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लेकिन यह तरीका अमेरिकी या यूरोपीय देशों में ही कारगर है क्योंकि वहां जनसंख्या का घनत्व काफी कम है। लोगों के पास बड़े घर हैं। ज्यादातर परिवार एकल हैं जहां परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रहना संभव हो जाता है। वहां के लोग आपस में भी बहुत कम घुलते-मिलते हैं। इससे वहां घर पर आइसोलेशन सफल रहता है।

भारत में कारगर नहीं

डॉक्टर श्रीनिवास राजकुमार के मुताबिक, लेकिन यही तरीका भारत में कारगर नहीं हो सकता है। यहां आबादी बहुत ज्यादा है, लेकिन लोगों के घर बहुत छोटे हैं। यहां घरों में भी अलग-थलग रहना बहुत मुश्किल होता है।

जो लोग एक-दो कमरों के घरों में ही रहते हैं और सबके लिए एक ही टॉयलेट इस्तेमाल करते हैं, वहां यह तरीका कोरोना को और अधिक फैलाने वाला साबित होगा।

उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी-यूरोपीय मॉडल अपनाने की बजाय सरकार को भारतीय परिस्थितियों को समझते हुए अपना तरीका विकसित करना चाहिए। अन्यथा यह देश में कोरोना को और अधिक फैलाने वाला कदम साबित हो सकता है।

सही फैसला- आईएमए

वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजन शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि सरकार का यह फैसला बिल्कुल सही है। सामान्य मामलों में इलाज की बहुत अधिक आवश्यकता नहीं होती।

ऐसे लोगों को ज्यादा आरामदेह परिस्थितियों में उनके घरों में ही रखा जा सकता है। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित कर उन्हें ज्यादा स्वस्थ तरीके से अलग-थलग रहने और अपने इस्तेमाल की चीजों को दूसरों तक न पहुंचने को आश्वस्त करना होगा।

हालांकि मजदूर या गरीब लोगों को जिनके पास अलग-थलग रहने की व्यवस्था नहीं है, उन्हें आइसोलेशन सेंटरों में रखा जा सकता है।

लड़ने का तरीका सीख रहे

बीएलके अस्पताल के डॉक्टर संदीप नायर का कहना है कि कोविड के मामलों में हम अभी तक लड़ने का तरीका ही सीख रहे हैं। अब तक हजारों लोगों को क्वारंटीन में रखा गया। लेकिन अब अनुभवों से पता चल रहा है कि सामान्य मामलों में बहुत ज्यादा गंभीर इलाज की जरूरत नहीं होती।

उन्हें केवल अलग-थलग रखना होता है। बड़े क्वारंटीन सेंटर्स में ज्यादा देखभाल संभव नहीं है। वे ज्यादा आरामदेह भी नहीं हो सकते। ऐसे में अगर लोगों को उनके घरों में ही रखकर चिकित्सा की जाती है तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

आने वाले समय की तैयारी का संकेत

वहीं, एक अन्य वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि यह संभव है कि मई के अंत और जून के महीने में कोरोना के मामलों में बहुत ज्यादा तेजी आए। अगर ज्यादा गंभीर लक्षण वाले मरीज सामने आते हैं तो लोगों को अस्पतालों में भर्ती करना बेहद आवश्यक होगा।

अगर अस्पताल पहले से ही कम गंभीर लक्षण वाले लोगों से भरे रहेंगे, तो गंभीर लोगों को इलाज देना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में इस रणनीति को भविष्य की तैयारी के रुप में भी देखा जा सकता है।

अभी यह है आंकड़ा

हालांकि, अभी तक के आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में कोरोना से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब लगभग 30 फीसदी लोग स्वस्थ होकर अपने घरों को जा रहे हैं जबकि इस बीमारी से केवल 3.3 फीसदी के करीब लोगों की मौत हो रही है।



भारत में अभी तक 39834 केस हैं जबकि 17846 लोग स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं। भारत में कोरोना के कारण अब तक कुल 1981 लोगों की मौत हुई है। वहीं, दिल्ली में कुल केसों की संख्या 6318 हो गई है। इसमें 2020 लोग स्वस्थ हुए हैं जबकि 68 लोगों की जान चली गई है।

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