दीपावली 2018: महंगी होगी खरीदारी, कपड़े से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान पर पड़ेगा असर
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डॉलर के मुकाबले रुपया के कमजोर होने से इस दीपावली बिजली से जलने वाले दीये और लड़ियों के साथ-साथ प्लास्टिक के सजावटी सामान महंगे हो जाएंगे। यही नहीं, कृत्रिम धागों से बनने वाले कपड़े से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान पर भी इसका असर पड़ रहा है।
राहत की बात है कि टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, मिक्सर, ग्रांइडर जैसे सामान महंगे नहीं होंगे। हालांकि इस उद्योग के कच्चे माल की कीमत में भी बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन वे त्योहारी मौसम तक दाम में बढ़ोतरी का खतरा शायद ही मोल लें।
बिजली से जलने वाले दीये, लड़ियां एवं अन्य सजावटी सामान चीन से आयात करने वाली दिल्ली की सिंघल ट्रेडिंग कंपनी के निदेशक प्रवीर सिंघल ने बताया कि पिछले कुछ ही सप्ताह में उनके आयातित सामानों के दाम में चार से पांच फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। यही नहीं इन सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क का भुगतान तो रुपया में होता है, लेकिन कितना शुल्क का भुगतान होगा, इसका निर्धारण डॉलर से होता है।
ऐसा इसलिए, क्योंकि सामान के बिल ऑफ एंट्री में कीमत डॉलर में अंकित होती है। जबसे डॉलर महंगा हुआ है, कारोबारियों को आयात शुल्क मद में भी ज्यादा राशि का भुगतान करना पड़ रहा है। इससे लड़ियों के दाम पर कितना असर पड़ेगा, इस सवाल पर सिंघल का कहना है कि उनके स्तर पर ही कम से कम दस फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।
इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे
रुपये के कमजोर पड़ने का असर इलेक्ट्रॉनिक सामान पर भी पड़ा है। हालांकि सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की वजह से स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट टेलीविजन तक का निर्माण भारत में होने लगा है, लेकिन अभी भी इसके अधिकतर कल-पुर्जे विदेश से ही आ रहे हैं।
टेलीविजन के पैनल की बात करें या प्रिंटेड सर्किट बोर्ड की, सब विदेश से ही आ रहे हैं। पैनासोनिक अप्लायंस इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हिदेनोरी आसो का कहना है कि सिर्फ टेलीविजन में ही देखें तो इसके साजो-सामान की कीमत में अभी 15 से 18 फीसदी का इजाफा हो चुका है।
कृत्रिम धागे से बने कपड़ों की लागत बढ़ी
मिक्सी-गीजर बनाना भी महंगा
उषा तथा महाराजा व्हाइटलाइन जैसी घरेलू सामान बनाने वाली कंपनी में सीईओ रहे सुनील वाधवा का कहना है कि इस समय रुपये के कमजोर होने का तो असर दिख ही रहा है, डीजल की कीमत में बढ़ोतरी होने का असर भी यह उद्योग झेल रहा है। उनके मुताबिक इस समय पंखा, मिक्सी, गीजर जैसे उपकरणों के करीब 90 फीसदी उपकरण यहां ही बनते हैं। हालांकि उसके लिए कुछ कच्चा माल आयात करना होता है। कुल मिला कर रुपये के कमजोर पड़ने से 4-5 फीसदी का असर देखने को मिलेगा, जबकि डीजल के महंगा होने से ढुलाई खर्च बढ़ने का असर 1-1.5 फीसदी तक पड़ रहा है।