कश्मीर में आतंकियों की नई चाल, 'एके-47' के साथ रख रहे हैं ये विदेशी पिस्टल
2019 में आतंकियों के खिलाफ चलाए गए विभिन्न ऑपरेशनों में 80 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इस साल वह आंकड़ा 30 है। खास बात यह है कि मौजूदा वर्ष में मारे गए आतंकियों की संख्या 90 से अधिक हो गई है...
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खास बात यह है कि ज्यादातर पिस्टल विदेशी हैं। जम्मू-कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद सहित दूसरे आतंकी समूह अपने सदस्यों को यह पिस्टल मुहैया कराते हैं।
सुरक्षा बलों के एक अधिकारी का कहना है कि खासतौर पर कश्मीर घाटी में अब आतंकियों को लोकल स्पोर्ट का मिलना बहुत कम हो गया है।
दूसरा, सेना, सीआरपीएफ एवं जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकियों और उनके ठिकानों के आसपास ऐसा शिकंजा कसा है, जिससे वे इधर उधर भाग रहे हैं।
उन्हें बहुत जल्द अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है। आतंकियों को यह डर लगा रहता है कि रास्ते में सीआरपीएफ व लोकल पुलिस की चेक पोस्ट मिलेगी, वहां जांच हुई तो फंस जाएंगे। 'एके-47' को छुपाना मुश्किल है।
हालांकि मुठभेड़ के दौरान उनके पास दोनों हथियार रहते हैं।
कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों के एक अधिकारी के अनुसार, पिछले साल 101 'एके-47' राइफल पकड़ी गई थीं। इस बार वह संख्या 31 मई तक 50 के पार पहुंच गई है।
इसके अलावा गत वर्ष 71 पिस्टल बरामद की गई, जबकि इस साल मई तक 77 से अधिक पिस्टल पकड़ी गई हैं।
2019 में आतंकियों के खिलाफ चलाए गए विभिन्न ऑपरेशनों में 80 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इस साल वह आंकड़ा 30 है। खास बात यह है कि मौजूदा वर्ष में मारे गए आतंकियों की संख्या 90 से अधिक हो गई है।
अगर सुरक्षा कर्मियों के घायल होने का आंकड़ा देखें, तो गत वर्ष यह संख्या 139 थी, जबकि इस बार 46 कर्मी घायल हुए हैं।
इस साल लॉकडाउन के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों पर तीन तरफा मार की है। एक, तलाशी अभियान लगातार जारी रहा। दूसरा, सेना ने सीआरपीएफ और पुलिस के साथ मिलकर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा ऑपरेशनों को अंजाम दिया है।
तीसरा, स्थानीय स्तर पर जो पिकेट लगाई गई, उससे आतंकियों को इधर-उधर आने जाने में दिक्कत हुई। पिछले दिनों एक सेंट्रो कार, जो कि विस्फोटकों से भरी हुई थी, वह सुरक्षा बलों की चौकसी का ही नतीजा था कि वे उस कार को टारगेट तक नहीं ले जा सके।
सुरक्षा बलों ने पहले ही कार को अपने कब्जे में लेकर उड़ा दिया। गहन चेकिंग के चलते आतंकियों ने इधर-उधर जाने के लिए एके-47 की बजाए अपने साथ पिस्टल रखना शुरू कर दिया।
जब उन्हें लगता कि उनका ठिकाना अब सुरक्षा बलों ने घेर लिया है, तो वे एके-47 का इस्तेमाल करते थे। हालांकि पिस्टल उस वक्त भी उनके साथ ही रहती थी।
इस साल जो 77 पिस्टल बरामद हुई हैं, वे सभी मुठभेड़ स्थल पर ही मिली हैं। कुछ पिस्टल आतंकियों के ठिकाने पर रखी हुई थीं।