ये हैं वो चार कारण, जिनसे पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया...
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पाकिस्तान के बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान लगातार बैकफुट पर आता दिख रहा है। भले ही दुनिया को दिखाने के लिए ही सही, मगर पहली बार वह आतंकियों को गिरफ़्तार करने और उनके खिलाफ जांच की बात कह रहा है। मंगलवार को पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर के भाई मुफ्ती अब्दुर रऊफ और हम्जा अजहर सहित प्रतिबंधित संगठनों के 44 लोगों को हिरासत में लेने का दावा किया है। यह सब पाकिस्तान यूं ही नहीं कर रहा है, इसके पीछे चार बड़े कारण हैं, जिनके चलते वह आतंकियों के प्रति अपनी नीति में थोड़ी कठोरता लाने पर मजबूर हुआ है। इनमें आर्थिक, सामरिक, वैश्विक और कूटनीतिक कारण शामिल हैं।
वैश्विक कारण:
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद द्वारा जारी आतंकवादियों और चरमपंथियों की सूची में पाकिस्तान से ही 139 नाम शामिल हैं। इस सूची में भारत के मोस्ट वांडेट गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम, जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई दूसरे आतंकी संगठन मौजूद हैं। ओसामा बिन-लादेन के उत्तराधिकारी ऐमन अल-जवाहिरी का नाम भी सूची में सबसे ऊपर है। अधिकांश संगठन पाकिस्तान की जमीन से ही अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों से 14 सदस्य राष्ट्र, पाकिस्तान के मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए तैयार हैं।
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिवेश में सुरक्षा परिषद के दस अस्थायी सदस्य बेल्जियम, कोत दिव्वार आईवरी कोस्ट, डोमेनिकन रिपब्लिक, इक्वेटोरियल गिनी, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलेंड और साउथ अफ्रीका ने मसूद अजहर को 'ग्लोबल टैरेरिस्ट' घोषित करने के प्रस्ताव पर अपना समर्थन दिया है। वीटो पावर वाले तीन देश, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने तो खुद यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में पेश किया है। रुस भी इस प्रस्ताव पर राजी है।
वीटो पावर हासिल चीन ही पाकिस्तान के समर्थन में पहले भी तीन बार इस प्रस्ताव को गिरा चुका है। 13 मार्च को यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में रखा जाएगा। पाकिस्तान पर इस वक्त अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भारी दबाव है, इसलिए उसने प्रस्ताव के आने से पहले ही 40 आतंकियों को पकड़ने की बात कही है। साथ ही यह भी कहा है कि वह दो सप्ताह तक ऐसी कार्रवाई जारी रखेगा।
पूर्व रॉ अफसर जयदेव राणाडे का कहना है कि इस एयर स्ट्राइक से पाकिस्तानी आर्मी बैकफुट पर है। आईएसआई को गंभीरता से सोचना होगा कि वह अपने टूल यानी आतंकी समूहों की गतिविधियों को बिल्कुल बंद कर दे। भले ही पाकिस्तान की ओर से कोई भी बयान आए, लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि वहां की आर्मी इस वक्त दबाव में है।
सामरिक कारण:
एयर कोमोडोर अशमिन्दर सिंह बहल (सेवानिवृत) का कहना है कि पाकिस्तान में आतंकियों को पालने वाली सेना और आईएसआई है। वहां की सरकार चाहते भी कुछ नहीं कर सकती। सेना द्वारा सरकार को जो कुछ कहा जाता है, वही करती है। बिना सेना की इजाजत के सरकार एक कदम भी इधर-उधर नहीं रख सकती। भारत ने वहां के आतंकी ठिकानों पर जो एयर स्ट्राइक की है, उससे पाक आर्मी भारी दबाव में है।वह जानती है कि ऐसी स्ट्राइक दोबारा भी हो सकती है। इधर, पीएम मोदी भी यह इशारा कर चुके हैं कि ये अभी शुरुआत है। अब पाकिस्तानी आर्मी को यह पता चल गया है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कहीं तक भी जा सकता है।
आर्थिक कारण:
पुलवामा आतंकी हमले के बाद पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को आतंक के वित्तपोषण पर रोक लगाने की चेतावनी दी है। वित्तीय निगरानी इकाई ने पाकिस्तान में 2017 में जारी 5,548 संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) की तुलना में 2018 में 8,707 संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) जारी किए हैं। इस साल जनवरी और फरवरी में लगभग 1,136 एसटीआर जारी किए गए हैं। दुनिया भर में आतंकी फाइनेंसिंग को रोकने के लिए काम करने वाली संस्था फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में बरकरार रखा है।
टास्क फोर्स के अनुसार, अक्टूबर, 2019 तक यदि पाकिस्तान उसकी 27 मांगों पर काम नहीं करता है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। भारत-पाक सम्बन्धों के जानकार और इंडियन इन्स्टिटूट ऑफ पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज से जुड़े सरल शर्मा बताते हैं कि अगर ऐसा होता है तो आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान बुरी तरह फंस जाएगा।वहां की अर्थव्यवस्था जो पहले ही चरमरा रही है, ब्लैकलिस्ट होने के बाद तो वह खत्म होने की कगार पर पहुंच सकती है।
कूटनीति कारण:
आतंकवाद के मसले पर दुनिया के साठ से ज्यादा देश भारत के साथ खड़े हैं। सभी जानते हैं कि सुरक्षा परिषद में चीन और पाकिस्तान 'ऑल वेदर फ्रेंड्स' हैं। चीन ही आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं होने देता। वजह, बीजिंग, नई दिल्ली को एक प्रतियोगी के तौर पर देखता है। चीन की यह सोच भी रहती है कि भारत उसके लिए खतरा बन सकता है।
भारत में मध्यम वर्ग की आर्थिक क्षमता जिस तेजी से बढ़ी है, उससे यहां एक बड़े बाजार की संभावनाएं बनती जा रही हैं। चीन यह नहीं चाहता है कि भारत उससे आगे निकल जाए। यही वजह है कि वह पाकिस्तान को आर्थिक मदद देकर भारत के खिलाफ अपने छिपे एजेंडे को आगे बढ़ाता रहता है। इस बार पुलवामा हमले के बाद अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सहित दुनिया के कई दूसरे नेता भारत के साथ खड़े रहे हैं।
भारत ने विभिन्न देशों के राष्ट्र अध्यक्षों, शासनाध्यक्षों और दूतावास अधिकारियों के साथ संपर्क कर उन्हें अपने पक्ष में किया है। विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज ने चीन का दौरा कर वहाँ की सरकार को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। हालांकि बड़ी बात ट्रम्प का आतंकवाद को लेकर भारत का पक्ष लेना, यह भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता रही है।
एयर स्ट्राइक से पहले ट्रम्प का यह कहना कि भारत कुछ बड़ा करने वाला है और स्ट्राइक शुरु होने के बाद ट्रम्प ने कहा, भारत-पाक से अच्छी खबर आने वाली है, ये बातें साबित करती हैं कि अमेरिकन राष्ट्रपति के संज्ञान में बहुत कुछ था।इसके चलते भी अब पाकिस्तान आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहा है। सुरक्षा परिषद के वीटो हासिल तीन देश जो जैश ए मोहम्मद के ख़िलाफ़ प्रस्ताव ला रहे हैं, उनमें अमेरिका सबसे ऊपर है।