पेगासस: ये एप डाउनलोड कीजिए और बन जाइए जासूस, लेकिन ऐसा करना हो सकता है खतरनाक, जानिए क्यों
इंटरनेट ने अब जासूसी करना बेहद आसान बना दिया है, लेकिन ऐसा करने पर आप कानूनी पचड़े में भी फंस सकते हैं और आपको तीन साल तक की जेल भी हो सकती है।
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पेगासस विवाद ने जासूसी को चर्चा का विषय बना दिया है। साइबर विशेषज्ञ कहते हैं कि आज सॉफ्टवेयर तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि अब साइबर जासूसी के दायरे से कोई भी बाहर नहीं है। आपकी कोई भी सूचना जो आपके स्मार्टफोन के मेल, इनबॉक्स, गैलरी या संदेशों में लिखी हुई है, वह कभी भी खतरे में पड़ सकती है। गूगल प्ले स्टोर से लेकर गूगल सर्च इंजन पर अनेक ऐसे एप उपलब्ध हैं जो मुफ्त में या कुछ शुल्क लेकर दूसरे स्मार्टफोन तक आपकी पहुंच आसान बना देते हैं। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही एप के बारे में जानकारी दे रहे हैं…
स्पाइन (Spyine)
जासूसी के लिए स्पाइन एक ऐसा एप है जिसे हैकर बहुत पसंद करते हैं। इसका उपयोग कर दूसरे स्मार्टफोन में उपलब्ध कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉल्स, फोटो, वीडियो, भेजे या आए हुए संदेश पढ़े-देखे जा सकते हैं। स्मार्टफोन उपयोगकर्ता की जानकारी के बिना यह तक पता लगाया जा सकता है कि उसने वेब ब्राउजर से कौन-कौन सी वेबसाइट पर जाकर क्या-क्या सर्च किया है। चूंकि यह भी पेगासस की तरह अपने पीछे कोई निशान नहीं छोड़ता है, डिजिटल फॉरेंसिक लैब्स में मोबाइल को चेक कराए बिना यह बताना बेहद मुश्किल है कि इस सॉफ्टवेयर के जरिए किसी मोबाइल की जासूसी की गई है या नहीं। स्पाइन के आधिकारिक वेबपेज से इसे 50 अमेरिकी डॉलर से लेकर 100 अमेरिकी डॉलर में एक महीने के लिए खरीदा जा सकता है। वांछित सेवाओं के बदले में मूल्य कम या अधिक हो सकता है।
की-लॉगर (Key-Logger)
यह भी स्पाइन एप की तरह हैकरों के सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले एप में शामिल है। इसके जरिए किसी स्मार्टफोन पर बैंक डीटेल्स, पासवर्ड और इस तरह की अन्य जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। अगर यूजर ने कोई मैसेज पढ़कर डिलीट कर दिया है तो भी इससे उन संदेशों को पढ़ा जा सकता है। आर्थिक और आपसी संबंधों की दृष्टि यह सॉफ्टवेयर बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
अपना एप भी विकसित कर लेते हैं
साइबर एक्सपर्ट मयंक जायसवाल ने अमर उजाला को बताया कि एक औसत साइबर विशेषज्ञ एक से दो दिन में एक ऐसा एप विकसित कर लेता है जो किसी दूसरे व्यक्ति के स्मार्ट फोन को आसानी से हैक कर सकता है। इस प्रकार कहें तो साइबर दुनिया में कोई भी स्मार्टफोन हैकिंग से ज्यादा दूर नहीं है। गूगल के प्ले स्टोर पर भी अनेक ऐसे एप उपलब्ध हैं जो मुफ्त में दूसरों की जानकारियां आप से साझा करते हैं। प्ले स्टोर समय-समय पर ऐसे एप हटाता रहता है, लेकिन बार-बार इस तरह के एप प्ले स्टोर पर डाल दिए जाते हैं।
बचना है तो केवल यही है उपाय
साइबर विशेषज्ञ कहते हैं कि सबको एक बात अपने मन-मस्तिष्क में बिल्कुल साफ कर लेनी चाहिेए कि आपके स्मार्टफोन में मैसेज, गैलरी में फोटो, कॉल लॉग्स, एप के रूप में या अन्य किसी भी रूप में कोई भी जानकारी है वह जासूसी के खतरे से बाहर नहीं है। इसलिए बैंक डीटेल्स सहित कोई भी गोपनीय जानकारी अपने स्मार्टफोन में रखने से बचें। इस इंटरनेट के जमाने में भी एक डायरी बनाना और बेहद आवश्यक जानकारी उसमें लिखना, इंटरनेट जासूसी से बचाने में सबसे ज्यादा कारगर है। हालांकि, जासूसी से बचने के लिए किसी भी एप को गैर-जरूरी अनुमति देने से बचना और फायरवाल व एंटी वायरस का उपयोग कुछ हद तक आपको इस खतरे से बचा सकता है। समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहना भी आपको सुरक्षित बनाता है।