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ये 5 बड़े झूठ बोलती हैं इंश्योरेंस कंपनियां, पॉलिसी लेते वक्त रखें ध्यान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 12 Aug 2018 07:11 PM IST
These 5 big lies speak insurance companies, take care while taking the policy
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सरकार कभी भी जीवन बीमा कंपनियों की बिक्री में गिरावट नहीं देखना चाहती है क्योंकि देश के जीवन बीमा कारोबार करने वाली लाइफ इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी की मालिक सरकार खुद है जिसका बाजार में कारोबार 79 फीसदी है।
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इसमें जो रोचक तथ्य हैं वह यह कि जीवन बीमा कंपनियों को सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करना जरूरी होता है। जैसे-जैसे सरकारी जेब में ज्यादा पैसा आएगा सरकार ब्याज दरों को कम रखने की कवायद में जुट जाती है और इसका फायदा वोट बैंक के रूप में सरकार को ही मिलता है।  इसलिए समझ लें कि म्यूचुअल फंडों में जीरो एंट्री लोड कर दिया गया है लेकिन लाइफ इंश्योरेंस उत्पादों में कभी भी एंट्री लोड शून्य या खत्म नहीं किया जा सकता है। 

निवेशकों के हित को सुरक्षित करने के लिए कई कदम उठाए जा चुके हैं और इसी दिशा में राज्यसभा ने बीमा कानून (संशोधन) विधेयक 2015 को पारित किया था, जिसके तहत एजेंट द्वारा मिस-सेलिंग के लिए बीमा कंपनियों को जवाबदेह माना गया है। विधेयक के तहत कानून का उल्लंघन करने पर, जिसमें मिस-सेलिंग और अपनिर्वचन शामिल है, बीमा कंपनियों पर 1 करोड़ रुपये से लेकर 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

चाहे बीमा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ने के साथ केवीऐट एम्प्टॉर (क्रेता सावधान) के दिन खत्म हो गए हों, लेकिन चालबाजों से बचने के तरीके सीखना अब भी जरूरी है।लेकिन जब सरकार और एजेंट जीवन बीमा की पॉलिसी बेचने आपके पास आता है तो  इन तरकीबों का इस्तेमाल करता है जो सरासर झूठे होते हैं, आप भी जानिए क्या हैं वो पांच सफेद झूठ 

झूठ 01. ये एक बढ़िया निवेश विकल्प है 

जीवन बीमा प्रोडक्ट जिसे चलाने के लिए शुल्क वसूले जाते हैं, कभी भी एक निवेश उत्पाद नहीं हो सकता है। जोखिम शुल्क, ऐसेट मैनेजमेंट चार्ज, वगैरह ये सभी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ वसूले जाते हैं। इसलिए बढ़िया निवेश की बात गलत है। 

झूठ 02. मेडिकल टेस्ट नहीं कराने होंगे 

ऐसी पॉलिसी में जोखिम कवर बहुत कम होता है। पहले तो आपको कहा जाएगा कि आप पूरी तरह ठीक हैं, लेकिन अगर भविष्य में आपको कुछ हो जाता है (मृत्यु) तो पूरी छानबीन होती है। आपके नॉमिनी को बता दिया जाएगा कि कोई बीमारी थी तो आपके नॉमिनी को क्लेम नहीं मिलेगा। 

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झूठ 03. बैंकों की अपेक्षा बढ़िया रिटर्न मिलेंगे 

किसी भी देश और कंपनी के लिए इस दर (15-18% ) पर विकास करना लगभग असंभव है। जो उत्पाद बड़ी जनसंख्या के लिए चलाए जा रहे हों उनमें इतना रिटर्न देना मुश्किल है। 

झूठ 04. निवेश के लिए ये आखिरी सप्ताह 

पॉलिसी बंद होने से पहले ही डेट सार्वजनिक हो जाती है। ये बीमा एजेंटो का वो झूठ है जो ज्यादातर लोगों पर काम कर जाता है। चाहे लोग पढ़े-लिखे, अनपढ़, स्त्री, पुरूष सभी इस चिंता में आकर कि इतनी बढ़िया स्कीम फिर नहीं मिलेगी, पॉलिसी खरीद लेते हैं जबकि नियमत: क्लोजिंग डेट हमेशा बताई जाती है। 

झूठ 05. यूनिट लिंक्ड प्लान में गारंटेड रिटर्न 

किसी भी यूलिप में गारंटेड रिटर्न नहीं मिल सकता। अगर आप पारंपरिक यूलिप प्लान लेते हैं तो आप गारंटीड रिटर्न हासिल कर सकते हैं। हालांकि ये सबसे कम दरों पर रिटर्न देते हैं। यूलिप प्लान किसी भी से लें, एसबीआई, एचडीएफसी, एलआईसी, आईसीआईसीआई। जोखिम पूरी तरह आप पर ही होगा तो सावधान रहें। 

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