अब दाल की नहीं होगी किल्लत, सरकार ने बनाया बड़ा प्लान
आम आदमी की थाली में दाल सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने दाल का विशाल भंडारण करने का निर्णय लिया है। सरकार 20 लाख टन दाल का बफर स्टॉक बनाएगी। जिसपर करीब 18,500 करोड़ रूपए खर्च होने के आसार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
केंद्र के जरिए 20 लाख टन दाल का बफर स्टॉक बनाने के निर्णय के बाद केंद्रीय उपभोक्ता एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता दाल, चीनी और सब्जियों के दाम को काबू करने की है। उन्होंने कहा कि दाल के दाम की चुनौती समाप्त होने के कगार पर है। अगले दो माह में दाल की कीमतें आम आदमी के पहुंच में होंगी।
पासवान ने बताया कि सरकार ने दाल का 20 लाख टन का बफर स्टाक बनाने का जो निर्णय लिया है। उसमें से 10 लाख टन भारतीय बाजार से खरीदे जाएंगे और शेष 10 लाख टन की पूर्ति आयात के जरिए सुनिश्चित की जाएगी। देश में व्याप्त दाल संकट को पैदावार की कमी और जमाखोरी का परिणाम बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी का आदेश है कि आवश्यक वस्तुओं का दाम बढ़ने नहीं देना है। उन्होंने कहा कि थोक बाजार में दाल की कीमतों में कमी आई है। जनता को भी जल्द राहत मिलेगी।
देशी बाजार से 10 लाख टन दाल खरीदने से किसानों को बड़ा राहत मिलेगा
पासवान ने कहा कि देशी बाजार से 10 लाख टन दाल खरीदने से किसानों को बड़ा राहत मिलेगा। उन्होंने कहा कि दाल की कीमतें जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे जाएंगी। उन इलाकों में सरकार न्यून्तम समर्थन मूल्य के दर पर दाल की खरीद करेगी। ताकि किसानों को उचित मूल्य नसीब हो सके।
उन्होंने कहा कि वस्तुओं के मूल्य का जमीनी आंकलन करने के लिए सरकार जल्द ही एक नीजि एजेंसी की सेवा लेगी। जोकि ब्लॉक और तहसील स्तर प बीकने वाली आवश्यक वस्तुओं के दाम से सरकार को अवगत कराएगी। अब तक सरकार इसके लिए राज्यों पर ही निर्भर रहती थी।
इस बीच उपभोक्ता एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय ने खुदरा समानों के दर को लेकर भी चिंता जताई है। मंत्रालय के सचिव का कहना है कि हम बाजार पर नजर जमाए हुए हैं। यदी खुदरा वस्तुओं के दाम कम नहीं हुए तो उसे आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल कर उसकी दर निर्धारित की जा सकती है। उपभोक्ता सचिव का कहना है कि नचले स्तर पर कंपनिया अपने उत्पाद पर 50 प्रतिशत तक का लाभ कमा रही हैं। उनके लिए वाजिब लाभ 0 से 15 प्रतिशत तय हो सकता है।