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EU को विदेश मंत्रालय की दो टूक: भारत एकतरफा प्रतिबंध नहीं मानता, उर्जा व्यापार में दोहरे मापदंड मंजूर नहीं

Fri, 18 Jul 2025 11:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 18 Jul 2025 11:12 PM IST
सार

यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर यूरोपीय संघ ने 18वीं बार कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें ऊर्जा, बैंकिंग और सैन्य क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है। भारत ने इन एकतरफा प्रतिबंधों को मानने से इनकार करते हुए कहा कि ऊर्जा व्यापार पर दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए और उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा है। रूस ने भी इन प्रतिबंधों को अवैध बताया और कहा कि वह इनके असर को कम करने की पूरी कोशिश करेगा।

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There should be no double standards on energy trade: India on latest EU sanctions package against Russia
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

यूक्रेन पर हमला करने के कारण यूरोपीय संघ (ईयू) ने शुक्रवार को रूस पर 18वीं बार नए प्रतिबंध लगाए। इसके कुछ ही घंटे बाद भारत ने कहा कि वह इस तरह के एकतरफा प्रतिबंधों को नहीं मानता है और उर्जा व्यापार जैसे मुद्दों पर दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ के इन प्रतिबंधों पर गौर किया है। उन्होंने कहा कि भारत एक जिम्मेदार देश है और अपने सभी कानूनी दायित्वों को पूरा करता है, लेकिन किसी भी तरह के एकतरफा प्रतिबंधों को नहीं मानता। उन्होंने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा बहुत जरूरी है, ताकि देश के नागरिकों की बुनियादी जरूरतें पूरी की जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि खासकर ऊर्जा व्यापार के मामले में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।
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यूरोपीय संघ के अनुसार, रूस पर लगाए गए इस 18वें दौर के प्रतिबंध पांच मुख्य हिस्सों पर आधारित हैं – रूस की ऊर्जा से होने वाली आमदनी को कम करना, उसके बैंकिंग क्षेत्र को चोट पहुंचाना, उसके सैन्य उद्योग को कमजोर करना, प्रतिबंधों से बचने की कोशिशों को रोकना और यूक्रेनी बच्चों व सांस्कृतिक विरासत के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराना। यूरोपीय संघ के बयान के मुताबिक, रूस के ‘शैडो फ्लीट’ यानी छिपे हुए जहाजों की संख्या अब 444 हो गई है और कुल 2,500 से ज्यादा व्यक्तियों व संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस बार बेलारूस पर भी नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।
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वैश्विक बाजार में पर्याप्त तेल आपूर्ति
इस बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि भारत ने तेल की खरीद के लिए अपने स्रोतों को काफी हद तक विविध कर लिया है, इसलिए अमेरिका की ओर से रूस के तेल निर्यात पर किसी भी कार्रवाई को लेकर भारत को ज्यादा चिंता नहीं है। दिल्ली में आयोजित ‘ऊर्जा वार्ता 2025’ कार्यक्रम में बोलते हुए पुरी ने कहा कि भारत अब 40 देशों से तेल खरीदता है, जबकि 2007 में यह संख्या सिर्फ 27 थी। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में फिलहाल तेल की पर्याप्त आपूर्ति है।


पुरी ने आगे कहा कि भले ही ईरान और वेनेजुएला पर अभी प्रतिबंध हैं, लेकिन क्या ये हमेशा रहेंगे? उन्होंने कहा कि ब्राजील, कनाडा जैसे कई देश अपने उत्पादन को बढ़ा रहे हैं। इसलिए आपूर्ति को लेकर फिलहाल कोई खास चिंता की बात नहीं है। मंत्री की यह टिप्पणी उस वक्त आई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर रूस ने 50 दिनों के भीतर यूक्रेन के साथ शांति समझौता नहीं किया तो वह रूस पर सख्त व्यापारिक प्रतिबंध लगाएंगे। उन्होंने रूस से तेल खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर भी द्वितीयक (सेकंडरी) प्रतिबंध लगाने की धमकी दी।

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नए प्रतिबंधों पर रूस ने क्या कहा
वहीं, मास्को ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ के नए प्रतिबंधों को अवैध बताया और कहा कि वह इसका गहराई से विश्लेषण करेगा, ताकि इसके असर को कम किया जा सके। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने सरकारी समाचार एजेंसी 'तास' को बताया कि यूरोप का रुख लगातार रूस-विरोधी बना हुआ है और रूस इस तरह के एकतरफा प्रतिबंधों को गैरकानूनी मानता है और इनका विरोध करता है। पेस्कोव ने यह भी कहा कि रूस ने समय के साथ पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के खिलाफ खुद को मजबूत बना लिया है और ऐसी स्थिति में जीने की आदत डाल ली है। उन्होंने कहा कि नई पाबंदियों का पूरी तरह से अध्ययन करना जरूरी होगा ,ताकि इसके प्रभाव को कम से कम किया जा सके।


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