पाक खुफिया एजेंसी में है जबरदस्त बौखलाहट, सेना की सीक्रेट जानकारी चुराने के लिए बनाई ये विंग
आईएसआई ने भारतीय सेना की खुफिया जानकारी चुराने के लिए युवकों की एक विंग बनाई है। पाकिस्तान के मौजूद आतंकी संगठनों की मदद से बनी इस विंग का संचालन आईएसआई कर रही है...
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अब ऐसे में आईएसआई ने भारतीय सेना की खुफिया जानकारी चुराने के लिए युवकों की एक विंग बना दी है। पाकिस्तान के मौजूद आतंकी संगठनों की मदद से बनी इस विंग का संचालन आईएसआई कर रही है।
इसमें जम्मू-कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों से युवाओं की भर्ती की जा रही है। इस नापाक इरादे के चलते दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों के गुमराह युवाओं को अपने यहां आने का वीजा दे रहा है।
यह विंग सेना की हर मूवमेंट पर नजर रखने का प्रयास करती है। सेल से जुड़ने वाले युवाओं को कब और कौन सा मोबाइल फोन, सिम एवं नेट इस्तेमाल करना है, ये सब आईएसआई के स्थानीय गुर्गे तय करते हैं।
एनआईए एवं खुफिया एजेंसियों के मुताबिक अब पाकिस्तानी आईएसआई की हर पोल खुलती जा रही है। अपनी इस ताजा नापाक करतूत पर पाकिस्तान ज्यादा समय तक पर्दा नहीं डाल पाया और इसकी कलई खुल कर सामने आ गई।
एनआईए ने उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मोहम्मद रशीद मामले में कई अहम खुलासे किए हैं। उसके ठिकाने पर की गई छापेमारी के बाद यह सामने आया है कि वह संदिग्ध आईएसआई हैंडलर के संपर्क में था।
उनके लिए भारतीय सेना के महत्वपूर्ण ठिकानों और जवानों की मूवमेंट की तस्वीरें व वीडियो बनाता था। वह दो बार पाकिस्तान जा चुका है। सूत्र बताते हैं कि उसे आईएसआई से ट्रेनिंग भी दी गई है।
बड़ी बात यह है कि यह खेल देश के कई हिस्सों में चल रहा है। इसमें पाकिस्तान के कई आतंकी संगठन शामिल हैं। भले ही वे युवक किसी भी संगठन के लिए काम करें, लेकिन उनकी ओवरऑल रिपोर्टिंग आईएसआई को होती है।
इनका नेटवर्क अब जम्मू-कश्मीर या उत्तरप्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, तेलंगाना व आंध्रप्रदेश सहित कई अन्य प्रदेशों तक फैला है।
जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों में आईएसआई बड़े पैमाने पर स्लीपर सेल की भर्ती कर रही है। इसके लिए पाकिस्तानी दूतावास की मदद ली जाती है। बहुत से युवकों को स्लीपर सेल की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान बुलाया जाता है।
दूसरा, जिन युवाओं को स्लीपर सेल से आगे यानी आतंकी बनाना होता है, उन्हें भी शिक्षा देने के नाम पर पाकिस्तान का वीजा दिलाया जाता है। खास बात है कि आतंकी विंग में जाने वाले युवा जब वापस भारत लौटते हैं तो वे हवाई जहाज से नहीं आते।
उन्हें लॉचिंग पैड से भारतीय सीमा में घुसपैठ कराई जाती है। हो सकता है कि वे घुसपैठ के दौरान सुरक्षा बलों की गोलियों का निशाना बन जाएं।
जैसे गत अप्रैल के शुरू में केरन सेक्टर में हुई घुसपैठ के दौरान मारे गए आदिल हुसैन मीर, उमर नाजिर खान और सज्जाद अहमद हुर्राह 2018 में वीजा के जरिए पाकिस्तान गए थे।
साल 2017 से लेकर अब तक करीब चार सौ युवाओं को पाकिस्तानी दूतावास से वीजा जारी किया गया है। इसमें 218 युवकों की जानकारी कहीं नहीं है। इनकी लोकेशन और शिक्षा संस्थान बाबत भी कुछ साफ नहीं हो रहा है।
जांच एजेंसियों के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि आईएसआई अब सीधे तौर पर युवाओं को अपने जाल में फांस रही है। इसके लिए भारत में मौजूद कुछ संगठनों की मदद ली जा रही है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के अलावा कई राज्यों की स्पेशल टॉस्क फोर्स भी इस मामले की तह तक पहुंचने के प्रयासों में जुटी हैं।