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तोगड़िया प्रकरण के जरिये संघ दे रहा मोदी की आलोचना से बचने का संदेश
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:14 AM IST
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विश्व हिंदू परिषद के चुनाव में डॉ. प्रवीण तोगड़िया की हार से साफ हो गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों के लिए कोई जगह है। डॉ. तोगड़िया ने अपनी हार टालने के लिए अपना अपहरण होने, जान का खतरा बताने, मोदी को पत्र लिखने और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी से लेकर विहिप मुख्यालय पर गुंडों का कब्जा होने तक कई आरोप लगाए, लेकिन संघ ने तय कर लिया था कि उसके आनुषांगिक संगठनों में ‘अनुशासन’ जरूरी है।
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सरसंघचालक मोहन भागवत कहते रहे हैं कि वर्तमान परिस्थितियों में मोदी सरकार देश के लिए सबसे बेहतर काम रही है। संघ का मानना है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर यह जरूरी है कि संघ के सभी घटक सरकार की अनावश्यक आलोचना से बचें। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन या तो केंद्र सरकार की नीतियों पर चुप्पी साधे हैं या उनका समर्थन करते नजर आ रहे हैं। सभी को डर है कि कहीं उन्हें भी तोगड़िया की तरह सरकार की आलोचना करने का दोषी न ठहरा दिया जाए। हालांकि, संघ समर्थक कह रहे हैं कि बीएमएस, किसान संघ या स्वदेशी जागरण मंच की तुलना तोगड़िया से करना ठीक नहीं है। विहिप के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष ने सरकार ही नहीं संघ की आलोचना की सभी हदें पार कर दी थीं।
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तीन महीने पहले ही तोगड़िया को हटाने का निर्णय
तीन महीने पहले भुवनेश्वर में हुई परिषद की कार्यकारिणी की बैठक में संघ ने तोगड़िया को हटाने का संकल्प ले लिया था। बैठक में संघ के उम्मीदवार जस्टिस कोकजे को सात वोट मिले थे जबकि तोगड़िया के पक्ष में 23 लोगों ने हाथ उठाए थे। तब, वहां मौजूद सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने संघ में चुनाव न होने की परंपरा की दुहाई देते हुए चुनाव रद्द करा दिए थे। हालांकि बाद में सीक्रेट बैलेट से चुनाव कराने का निर्णय लिया गया।
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