नरेश ने खत्म किया कैमरे और कूची का फर्क
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क्या आपने कैमरे के जरिये बनी पेंटिंग देखी है। बदलते हुए दौर में अब फोटोग्राफी महज सीधे-सीधे तस्वीरों को कैद करना नहीं रह गई है। अब कैमरे और कूची का फर्क भी खत्म होने लगा है। छठे दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के दौरान आपको ये कमाल देखने को मिलेगा।
यहां वैसे तो अलग अलग कलाकारों के करीब 600 पेंटिंग्स आपको नजर आएगी लेकिन इसमें सबसे खास है वरिष्ठ छायाकार नरेश शर्मा की वो दस तस्वीरें जो बरबस लोगों का ध्यान खींच रही हैं। नरेश के ये चित्र उनकी माइक्रोफोटो पेंटिंग का हिस्सा हैं।
माइक्रोफोटो पेंटिंग फोटोग्राफी की नई तकनीक है जिसमें लाइट और वाइब्रेशन्स के साथ साथ मूल ऑब्जेक्ट के क्लोज़अप पर खास ध्यान दिया जाता है।
फूलों की पंखुड़ियों पर ओस की बूंदों का सौंदर्य हो या फिर पानी में टपकती पानी की बूंदों का कंपन, जामा मस्जिद में हज़ारों नमाजियों के एक साथ झुके सिर हों, जंतर मंतर की कलात्मकता हो या फिर बादलों को छूता कुतुब मीनार, इन चित्रों को देखना किसी कलाकार की कल्पना से गुजरने जैसा है।
नरेश अपने इस अभिनव प्रयोग के लिए लंबे समय से जाने जाते हैं। 2002 से अबतक कई शहरों में उनकी प्रदर्शनी लग चुकी है। 9 दिसंबर तक चलने वाले फिल्म समारोह के दौरान तमाम फिल्मकार, राजनेता और कलाप्रेमी इसका आनंद उठा रहे हैं।