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न्यायपालिका-कार्यपालिका में नहीं जजों की नियुक्ति पर गतिरोध : रविशंकर

Wed, 07 Oct 2020 02:59 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 07 Oct 2020 02:59 AM IST
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There is no deadlock between the executive and the judiciary over the appointment of High Court judges, says union minister ravi shankar
ravi shankar parsad - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति को लेकर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच कोई गतिरोध नहीं है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह दावा द्रमुक सांसद को पत्र के जरिये दिए जवाब में किया।

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उन्होंने कहा, जब भी दोनों के बीच किसी मुद्दे पर वैचारिक मतभेद होता है तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि उचित व्यक्ति को ही नियुक्त किया जाए, दोनों (कार्यपालिका व न्यायपालिका) आपसी सामंजस्य बना लेते हैं।
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द्रमुक के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन को लिखे पत्र में कानून मंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा रिक्त पदों को भरने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाता है, लेकिन वे सेवानिवृत्ति, इस्तीफे या जजों के प्रमोशन के कारण लगातार बने रहते हैं।
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दरअसल कानून मंत्री ने यह पत्र इस साल फरवरी में बजट सत्र के दौरान विल्सन की तरफ से शून्य काल के दौरान हाईकोर्ट में जजों की कमी को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देने के लिए लिखा था। विल्सन ने सोमवार को प्रसाद का यह पत्र ट्विटर पर शेयर किया था। बाद में कानून मंत्री के कार्यालय ने भी इस पत्र के असली होने की पुष्टि की थी।

राज्य सभा सांसद ने ऊपरी सदन में इस मुद्दे पर अपने भाषण की वीडियो क्लिप भी जारी की है, जिसमें वे कह रहे हैं कि यह वो समय था, जिसमें हाईकोर्ट ने जजों की नियुक्तियों को लेकर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच के गतिरोध को हल कराया था।

पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रह चुके विल्सन ने दावा किया कि यह सरकार जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की तरफ से भेजे गए 230 नामों को दबाकर बैठी हुई है।

कानून मंत्री ने 28 सितंबर को लिखे अपने पत्र में कहा कि जजों की नियुक्ति के लिए मौजूदा प्रक्रिया ज्ञापन (एमओपी) के हिसाब से हाईकोर्ट में जजों की नियुक्त के लिए प्रस्ताव भेजने का अधिकार हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को होता है, जिन्हें पिछले जज की सेवानिवृत्त से छह महीने पहले ही नए जज की भर्ती प्रक्रिया चालू करनी पड़ती है। लेकिन इस टाइमलाइन का कभी पालन नहीं किया जाता।


उन्होंने कहा, खाली पड़े पदों को तेजी से भरने के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है, लेकिन सेवानिवृत्ति, इस्तीफे और जजों की प्रोन्नति के कारण रिक्तियां बढ़ने लगती है। उन्होंने लिखा, केंद्र सरकार हाईकोर्टों में खाली पड़े पदों को तेजी से भरने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, एक सितंबर को ही विभिन्न हाईकोर्ट मं 48 नए जज नियुक्त किए गए हैं।

हाईकोर्ट पर नजर
 25 हाईकोर्ट हैं देश के विभिन्न हिस्सों में
1079 जजों के पद मंजूर हैं इन सभी में
398 पद खाली पड़े थे इस एक सितंबर को

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