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Supreme Court:‘न्यायाधीशों को निशाना बनाने की कोई सीमा होती है', सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से जताई नाराजगी
Thu, 28 Jul 2022 03:18 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 28 Jul 2022 03:18 PM IST
सार
डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा कि मैंने ऑनलाइन खबरें देखी थी कि न्यायाधीश सुनवाई में देरी कर रहे हैं। हम पर दबाव बनाना बंद करिए। एक न्यायाधीश कोरोना वायरस से संक्रमित थे और इस वजह से हम मामले पर सुनवाई नहीं कर सके।
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न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़(फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
उच्चतम न्यायालय(Supreme Court) ने देशभर में ईसाई संस्थानों और पादरियों पर बढ़ते हमलों का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई में देरी करने की मीडिया में आयी खबरों पर नाखुशी जताते हुए गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को निशाना बनाने की एक सीमा होती है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि हम पर दबाव बनाना बंद करें। पीठ ने कहा कि पिछली बार मामले पर सुनवाई नहीं की जा सकी थी क्योंकि मैं कोविड-19 से संक्रमित था। आपने अखबारों में छपवाया कि उच्चतम न्यायालय सुनवाई में देरी कर रहा है। देखिए, न्यायाधीशों को निशाना बनाने की एक सीमा होती है। ये सभी खबरें कौन देता है?
हम पर दबाव बनाना बंद कीजिए: डी वाई चंद्रचूड़
डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने आगे कहा कि ऑनलाइन खबरों में बताया जा रहा है कि न्यायाधीश सुनवाई में देरी कर रहे हैं। आप बिना तथ्य और प्रमाण के ऐसा कैसे कह सकते हैं। हम पर दबाव बनाना बंद करिए। एक न्यायाधीश कोरोना वायरस से संक्रमित थे और इस वजह से हम मामले पर सुनवाई नहीं कर सके। खैर, हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे, वरना फिर कोई और खबर आएगी। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा मामले पर सुनवाई किए जाने के अनुरोध पर ये टिप्पणियां की। वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्वेज ने जून में अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया था और कहा था कि देशभर में ईसाई संस्थानों और पादरियों के खिलाफ हर महीने औसतन 45 से 50 हिंसक हमले होते हैं।
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हम पर दबाव बनाना बंद कीजिए: डी वाई चंद्रचूड़
डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने आगे कहा कि ऑनलाइन खबरों में बताया जा रहा है कि न्यायाधीश सुनवाई में देरी कर रहे हैं। आप बिना तथ्य और प्रमाण के ऐसा कैसे कह सकते हैं। हम पर दबाव बनाना बंद करिए। एक न्यायाधीश कोरोना वायरस से संक्रमित थे और इस वजह से हम मामले पर सुनवाई नहीं कर सके। खैर, हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे, वरना फिर कोई और खबर आएगी। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा मामले पर सुनवाई किए जाने के अनुरोध पर ये टिप्पणियां की। वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्वेज ने जून में अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया था और कहा था कि देशभर में ईसाई संस्थानों और पादरियों के खिलाफ हर महीने औसतन 45 से 50 हिंसक हमले होते हैं।
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